बंजर भूमि में हरियाली लाने वाला हिमाचल का युवा हरित सिपाही

बंजर भूमि में हरियाली लाने वाला हिमाचल का युवा हरित सिपाही

नई दिल्ली. विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हम आपको पर्यावरण के ऐसे सिपाही से रुबरु कराने जा रहे हैं जो कम उम्र में ही हजारों पेड़-पौधों को लगाकर एक मिसाल कायम की है. पर्यावरण का यह हरित सिपाही हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के भंगाड़ी गांव के रहने वाले युवा जयचंद हैं. जिन्होंने अपने गांव की बंजर भूमि में पेड़ों को लगाकर हरियाली ला दी है.

विश्व पर्यावरण दिवस पर स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम जयचंद की जिंदगी में अहम मोड़ लेकर आया. जयचंद ने स्कूल में पर्यावरण को लेकर जो जाना, उस पर अमल करना चाहा. फिर क्या था जयचंद हरित सिपाही बन गया. जयचंद ने शुरुआत अपने स्कूल से की, स्कूल परिसर और आसपास पौधे लगाए, आगे बढ़ते हुए उसने सड़क के किनारे वाली जमीन और फिर बंजर जमीन पर पेड़ लगाए, गांव की पगडंडी को भी उसने नई जान दी. सौ से डेढ़ सौ आबादी वाले भंगाड़ी गांव में जयचंद किसी हीरो से कम नहीं हैं.

जयचंद कहना है, “स्कूल में पर्यावरण को लेकर एक कार्यक्रम ने मेरा मन बदल दिया. मैंने सोचा कि क्यों न खाली जमीन पर छोटे पौधे लगाऊं और क्षेत्र को हरा भरा बनाऊं. पहाड़ के लोग पर्यावरण को लेकर सचेत रहते हैं. जलवायु परिवर्तन का असर अब पहाड़ों पर भी साफ नजर आता है. अगर हम अपने पर्यावरण के बारे में नहीं सोचेंगे तो और कौन सोचेगा. मौसम तेजी से बदल रहा है और प्रदूषण से इंसानों की मौत हो रही है. हमें अब जागना होगा और आगे बढ़कर पर्यावरण की रक्षा करनी होगी, इसीलिए मैंने आबादी के लिए स्वच्छ वातावरण के निर्माण के लिए यह कदम उठाया.”

18 साल के जयचंद ने अखरोट, सेब, आड़ू, नाशपाती और देवदार जैसे पेड़ लगाए. जयचंद के मुताबिक, ” मैं बारिश के मौसम में ही पेड़ लगाता हूं, क्योंकि उस वक्त जमीन नर्म होती है और पौधा तेजी से बढ़ता है. पौधे लगाने के कुछ दिन बाद मैं दोबारा उसे देखने जाता हूं. अगर पौधे के आसपास घास उग आती है तो मैं उसे हटा देता हूं. इसी तरह से मैं कुछ महीनों बाद दोबारा उसे देखने जाता हूं और पेड़ की कटाई छंटाई करता हूं ताकि वह एक विशाल वृक्ष का रूप ले सके.”

2015 में एनवायरमेंट लीडरशिप अवॉर्ड से सम्मानित

जयचंद के पिता श्रीराम लाल पेशे से किसान हैं और इस काम में वह भी जयचंद की मदद करते हैं. श्रीराम लाल कहते हैं, “जयचंद के पेड़ लगाने के काम से गांव के लोग भी प्रभावित होते हैं और जंगल की अहमियत समझते हैं, गांव वाले भी वृक्षारोपण के इस काम की सराहना करते हैं और वे भी क्षेत्र को हरा-भरा बनाने में सहयोग देते हैं.”

पर्यावरण के लिए जयचंद के योगदान को हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी पहचाना और उसे साल 2015 में एनवायरमेंट लीडरशिप अवॉर्ड से सम्मानित किया. जयचंद का लक्ष्य पूरे हिमाचल प्रदेश में इस मुहिम को फैलाना है. उनका कहना है, ” मैं जो कर रहा हूं वह किसी लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं. मुझे बहुत गर्व होता है जब मेरे बारे में लोग जानते हैं और मेरी ही तरह पेड़ लगाने के लिए प्रेरित होते हैं, स्कूल के दोस्त भी मेरी सहायता करते हैं. छुट्टी के दिन हम सब मिलकर हरियाली बढ़ाने के लिए समय देते हैं.” जयचंद का कहना है कि अभी तो उन्होंने कुछ एक हजार ही पेड़ लगाए लेकिन इस संख्या कहीं अधिक बढ़ाकर लाखों में करना है.

पिता को बना दिया 10 बीघा जमीन का मालिक

जयचंद ने पिछले चार सालों में वनों की कटाई की रोकथाम की दिशा में विशेष काम किया है. यह काम एक छोटी सी पहल के रूप में जयचंद ने जब शुरू किया जब वो 8वीं कक्षा में था. जयचंद ने उस दिशा में कार्य करना शुरू किया जहां लोगों का यह मानना था कि यह बंजर भूमि है और यहां सिर्फ घास के अलावा और कुछ पैदा नहीं हो सकता. जयचंद ने बंजर भूमि में पौधे लगाए, सड़क के किनारे पौधे लगाए, साथ ही स्कूल के अंदर भी पौधे लगाया. जयचंद की इस पहल ने उसके पिता को 10 बीघा जमीन का मालिक बना दिया है. आज रायचंद 100 से भी अधिक पेड़ों के बीच रहते हैं. इन पेड़ो में देवदार, अखरोट और सेब जैसे फलों और अन्य पेड़ों का बागीचा है.

जयचंद का कहना है कि मुझे पेड़-पौधो पर किसी भी तरह का कोई खर्च करने की जरुरत नहीं पड़ी. मैं पौधो की नर्सरी में जाता था और छोटे पेड़ों को खोजता था. मैं पौधो की खोज में जंगलों में जाता हूं, उन्हें घर लाता हूं. मेरे पिता ने इन पौधो को बड़ा करने में मेरी बहुत मदद की है. उन्होंने उनकी देखरेख करने में मेरी मदद की है.