नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शुक्रवार को पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को समय पर कराने को लेकर भारी बहस हुई। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पंचायत और जिला परिषदों के re-delimitation (पुनर्सीमांकन) की अधिसूचना को एक अन्य खंडपीठ ने रद्द कर दिया है और लोगों को आपत्तियां दर्ज करने के लिए 10 जनवरी तक का समय दिया गया है। ऐसे में नियमों के अनुसार चुनाव करवाने में कम से कम छह महीने अतिरिक्त लगेंगे।
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि सरकार जानबूझकर Panchayat Elections 2026 टाल रही है। उन्होंने कहा कि रद्द की गई अधिसूचना केवल जिला परिषद शिमला से संबंधित थी, पूरे प्रदेश पर लागू नहीं होती।
कोर्ट की प्रतिक्रिया: चुनाव करवाने में राज्य सरकार ‘अपाहिज’ महसूस कर रही
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार पंचायत चुनाव कराने में hesitant है। दूसरी खंडपीठ ने 5 दिसंबर 2025 को Himachal Pradesh Panchayati Raj Act के तहत संशोधित नियम 9(2) को रद्द कर दिया था। यह नियम जिला परिषद एवं पंचायत समिति के चुनाव क्षेत्रों के पुनर्सीमांकन से संबंधित था। अदालत ने कहा कि संशोधित नियम arbitrary, unjust और unconstitutional था।
अब मामला उस खंडपीठ को भेजा गया है, जिसने पहले इस अधिसूचना को रद्द किया था, ताकि constitutional issues पर उचित निर्णय लिया जा सके।
नगर निगम बद्दी की अधिसूचना रद्द, आपत्तियों पर जल्द निर्णय
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने Baddi Municipal Corporation Notification को रद्द कर दिया। न्यायाधीश संदीप शर्मा की पीठ ने सरकार और अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता दीपेंद्र कुमार सिंगला और अन्य की आपत्तियों पर 10 जनवरी तक निर्णय लिया जाए।
कोर्ट ने कहा कि कोई निर्णय लेने से पहले याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुना जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग थी कि उनके क्षेत्र को नगर परिषद या प्रस्तावित नगर निगम में उचित स्थान मिले।
Background: 23 दिसंबर 2024 को नगर परिषद बद्दी को नगर निगम बनाने की अधिसूचना जारी की गई थी, जिसे बाद में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया था। वर्तमान में बद्दी नगर परिषद ही अस्तित्व में है।
तीसरे बच्चे पर भी महिला कर्मचारी को मिलेगा मातृत्व अवकाश: हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला कर्मचारी के दो बच्चे हैं, तो वह तीसरे बच्चे के जन्म पर Maternity Benefits की हकदार हैं।
कोर्ट ने सरकार और संबंधित विभाग को दो हफ्ते में याचिकाकर्ता रीमा देवी के मामले पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि आदेश के सभी लाभ याचिकाकर्ता को प्रदान किए जाएं।
Background: याचिकाकर्ता सरकारी कर्मचारी हैं। उनके पहले दो बच्चों का जन्म सरकारी सेवा में आने से पहले हुआ था, जबकि तीसरे बच्चे का जन्म 25 जुलाई 2025 को हुआ। विभाग ने 6 नवंबर 2025 को उनका आवेदन खारिज कर दिया था।
