पंचायतों को मजबूत बना रही है हमर छत्तीसगढ़ योजना

पंचायतों को मजबूत बना रही है हमर छत्तीसगढ़ योजना

रायपुर. राज्य के विकास को जन-जन तक पहुंचाने एवं त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना ‘हमर छत्तीसगढ़’ के तहत अब तक डेढ़ लाख जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी राजधानी के अध्ययन भ्रमण पर आ चुके हैं. पंचायत प्रतिनिधियों के अध्ययन भ्रमण के लिए 1 जुलाई 2016 को शुरू की गई इस योजना में समय-समय पर नए आयाम जोड़े गए हैं. सहकारी संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को 2 अक्टूबर 2016 से एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम कर रहीं महिला स्वसहायता समूह की पदाधिकारियों को 16 मई 2018 से इस योजना से जोड़ा गया है.

हमर छत्तीसगढ़ योजना के अंतर्गत अब तक एक लाख 50 हजार 210 जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने रायपुर और नया रायपुर का भ्रमण किया है. इनमें ग्राम पंचायतों और नगर पंचायतों के एक लाख 37 हजार 890 प्रतिनिधि, सहकारी संस्थाओं के छह हजार 456 प्रतिनिधि तथा महिला स्वसहायता समूह की पांच हजार 864 पदाधिकारी शामिल हैं. पिछले 23 महीनों में राज्य के सभी 27 जिलों और 146 विकासखंडों के जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी अध्ययन भ्रमण पर रायपुर पहुंचे हैं. योजना के तहत अभी बस्तर, दंतेवाड़ा, कोरिया, रायपुर और धमतरी के विभिन्न स्वसहायता समूहों की 554 पदाधिकारी अध्ययन प्रवास पर रायपुर आईं हुई हैं.

देश भर में चर्चित ‘हमर छत्तीसगढ़’ योजना को देखने केन्द्रीय मंत्री सहित कई राज्यों के मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी आ चुके हैं. इनमें वर्तमान राष्ट्रपति और बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद, भारत सरकार के पंचायतीराज, ग्रामीण विकास एवं खनन मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत और झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष सहित राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तरप्रदेश और हरियाणा के मंत्री शामिल हैं.

पंचायत जनप्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह

वर्ष 2016 में 1 नवम्बर को राज्योत्सव का शुभारंभ करने आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस दौरान अध्ययन भ्रमण पर आए पंचायत प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी. उन्होंने योजना को काफी सराहा भी था. भारत सरकार के पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय सहित अनेक मंत्रालयों के अधिकारी भी योजना को जानने-समझने आवासीय परिसर पहुंचे हैं.

गांवों और कस्बों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अध्ययन, सशक्तिकरण, शिक्षण-प्रशिक्षण और उनका अनुभव संसार समृद्ध करने के उद्देश्य से इस अनूठी योजना की शुरूआत 1 जुलाई 2016 को की गई थी. नया रायपुर के उपरवारा स्थित होटल प्रबंधन संस्थान को योजना के आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया गया है. यहां पंचायत प्रतिनिधियों के पंजीयन, आवास, भोजन, शिक्षण-प्रशिक्षण और मनोरंजन की व्यवस्था है. अध्ययन भ्रमण पर आने वालों को छत्तीसगढ़ में पिछले डेढ़ दशक में हुए विकास कार्यों, कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में हो रही नित नई प्रगति एवं प्रदेश की संस्कृति व कला सहित शासकीय योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाती है.

अध्ययन भ्रमण पर पहुंचने वाले डेढ़ लाख प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों में बस्तर और सरगुजा जैसे सुदूर वनांचलों के लोग भी बड़ी संख्या में हैं जिन्हें इस योजना की बदौलत पहली बार राजधानी देखने का मौका मिला. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और मंत्रीगण पंचायत प्रतिनिधियों से अपने निवास पर मुलाकात करते हैं. इस दौरान पंच-सरपंच उनसे अपने अध्ययन भ्रमण के अनुभव भी साझा करते हैं. कई विधायक भी यहां अपने क्षेत्रों से आए जनप्रतिनिधियों से मिलते हैं.

जंगल सफारी के भ्रमण पर पंचायत जनप्रतिनिधि

दो दिनों के अध्ययन प्रवास के दौरान जंगल सफारी, मंत्रालय, विधानसभा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, साइंस सेंटर, शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, स्वामी विवेकानंद विमानतल और पुरखौती मुक्तांगन का भ्रमण कराया जाता है. पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो के जरिए उन्हें छत्तीसगढ़ से जुड़े पौराणिक आख्यानों, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन में यहां के सेनानियों के योगदान तथा छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने की कहानी के साथ ही प्रदेश की उपलब्धियों एवं योजनाओं की जानकारी दी जाती है.

भ्रमण के साथ ही आवासीय परिसर में प्रशिक्षण एवं सामूहिक चर्चा का आयोजन किया जाता है. इसमें वे विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन संबंधी अपने अनुभव साझा करते हैं. स्वच्छता एवं विधिक जागरूकता के लिए भी यहां नियमित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

आवासीय परिसर में विधिक सहायता क्लिनिक भी संचालित है जहां जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों को निःशुल्क कानूनी परामर्श एवं सहायता दी जाती है. भ्रमण पर आने वालों को योगाभ्यास भी कराया जाता है. योग प्रशिक्षक की देखरेख में वे विभिन्न आसनों का अभ्यास करते हैं. साथ ही उन्हें स्वस्थ और प्रसन्न रहने के गुर भी बताए जाते हैं. उनकी सेहत की जांच के लिए आवासीय परिसर में समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाते हैं.