रामदयाल मुंडा जनजातीय संग्रहालय, जहां देखने को मिलती है 32 जनजातीय समाज की विस्तृत जानकारी

रामदयाल मुंडा जनजातीय संग्रहालय, जहां देखने को मिलती है 32 जनजातीय समाज की विस्तृत जानकारी - Panchayat Times

रांची. झारखंड के जनजातीय समाज की विस्तृत जानकारी लेनी हो तो मोराबादी स्थित डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय संग्रहालय आइए, राज्य की विभिन्न हिस्से में पाए जाने वाले सभी 32 जनजातीय समाज की विस्तृत जानकारी एक ही स्थान पर मिल जाएगी. संग्रहालय में जनजातीय समाज की सभ्यता संस्कृति व इतिहास से जुड़ी जानकारियां व दुर्लभ वस्तुएं मौजूद हैं. यहां अलग-अलग जनजाति जनजातियों के मॉडल शोकेस बनाया गया है.

आदिवासियों के जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी

इसमें आदिवासियों के जीवन के बारे में विस्तृत से जानकारी दी गई है, आदिवासियों का पहनावा, जीवन कार्य व आर्थिक स्थिति को भी मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया गया है. प्राचीन काल से अब तक की जीवन यात्रा को क्रमबद्ध तरीके से समझाया गया है. आधुनिक युग के पारंपरिक हथियार, खानपान से रूबरू होने का मौका मिलेगा, यही नहीं प्राचीन काल में आभूषण वाद यंत्र हस्तशिल्प व शिकार करने के हथियार भी सहेज कर रखा गया हैं.

इस प्रकार के अंनूठे संग्रहालय की स्थापना 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने की थी. संग्रहालय का संचालन कल्याण विभाग द्वारा होता है. बाद में संग्रहालय का नाम बदलकर रामदयाल मुंडा के नाम पर रखा गया इसी परिसर में डॉक्टर राम दयाल मुंडा जनजाति शोध संस्थान भी है, यह झारखंड का एकमात्र जनजातीय शोध संस्थान यहां जनजातीय समाज की जोड़ी इतिहास संस्कृति व उन्नति के लिए शोध होते हैं. संस्थान की स्थापना 31 अक्टूबर 1953 को हुई थी. इसका संचालन कल्याण विभाग द्वारा होता है.

कई दुर्लभ पुस्तके भी मौजूद

यह जनजातीय संग्रहालय झारखंड की आदिवासी संस्कृति और जनजातीय जीवन और कला का अद्भुत केंद्र है, संग्रहालय शोकेस में जनजातीय शायरी को दर्शाया गया दर्शाया ही गया है साथ में कोल जनजाति राज्य के किस इलाके में निवास करते हैं, और इसकी कितनी आबादी है इसकी भी पूरी जानकारी दी गई है. जनगणना के अनुसार आंकड़े अपडेट किये जाते है. वही शोध संस्थान में आदिवासियों के संबंधित कई दुर्लभ पुस्तके भी यहां मौजूद है.

संग्रहालय में प्रवेश के लिए नहीं लगता शुल्क

संग्रहालय घूमने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगता प्रवेश से पूर्व सिर्फ विजिटर रजिस्टर पर दस्तखत करना पड़ता है. सरकारी छुट्टी को छोड़कर प्रतिदिन संग्रहालय खुला रहता है, लोगों को गाइड करने के लिए संग्रहालय के कर्मी भी मौजूद रहते हैं.