हिमाचल में अवैध मकान बनाने और पेड़ काटने वालों सावधान, आ गया ड्रोन

सरकार ने अब जंगलों और सैरगाहों में हो रहे निर्माण पर ड्रोन से नजर रखने की तैयारी
प्रतीक चित्र

शिमला. हिमाचल में अवैध निर्माण और पेड़ों के अवैध कटान की समस्या से जूझ रही प्रदेश सरकार ने अब जंगलों और सैरगाहों में हो रहे निर्माण पर ड्रोन से नजर रखने की तैयारी कर ली है. पेड़ों के अवैध कटान के साथ साथ शिमला में पेड़ों की गणना को लेकर आए राज्य उच्च न्यायालय के ओदशों के बाद जहां जयराम सरकार ने जाखू और कनलोग वार्डों में जंगलों पर ड्रोन से नजर रखनी शुरू की है वहीं सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी अवैध निर्माण की समस्या से निजात पाने के लिए शिमला, कसौली, धर्मशाला, मनाली के अलावा प्रमुख शहरों में निर्माण पर भी ड्रोन से नजर रखने की तैयारी है.

एनजीटी के आदेशों के बाद प्रदेश में करीब 25 हजार अवैध निर्माणों को नियमित करने का मामला अधर में है. एक ओर जहां अवैध निर्माणों को नियमित करने में सरकार के हाथ बंधे हुए हैं वहीं दूसरी ओर एनजीटी ने शिमला की वहनीय क्षमता का अध्ययन करने के बाद कोर व ग्रीन एरिया में निर्माण पर रोक लगा दी है. साथ ही शिमला के साथ साथ कसौली में भी ढाई मंजिल से अधिक ऊंचाई के भवनों के निर्माण पर एनजीटी की रोक है. कसौली तथा कुल्लू में अवैध निर्माण को लेकर एनजीटी सख्त आदेश पारित कर चुका है. धर्मशाला में पेड़ों के कटान व अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट भी सख्ती जता चुका है. जाहिर है कि अवैध निर्माण के साथ साथ पेड़ों का अवैध कटान रोकना जयराम सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती है.

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राज्य सचिवालय में बीते दिनों हुए एक सेमिनार के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा था कि प्रदेश में अवैध निर्माण पर नकेल कसने के साथ साथ शहरों को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार ड्रोन मैपिंग की मदद ले सकती है. बताया जा रहा है कि अब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सर्वे ऑफ इंडिया की मदद से इस अवैध निर्माण तथा पेड़ों के गैर कानूनी कटान पर नजर रखने के लिए ड्रोन मैपिंग की मदद लेने की तैयारी में है. जल्द ही इस योजना को धरातल पर उतारा जाएगा.