विश्व साक्षरता दिवस: आजादी के बाद बढ़ा साक्षरता का ग्राफ, लेकिन 2011 की जनगणना के अनुसार 3077 गांवों में डाकिया ही पढ़ते हैं चिट्ठी

विश्व साक्षरता दिवस: आजादी के बाद बढ़ा साक्षरता का ग्राफ, लेकिन 2011 की जनगणना के अनुसार 3077 गांवों में डाकिया ही पढ़ते हैं चिट्ठी - Panchayat Times
Source UNESCO

नई दिल्ली. निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य के साथ 17 नवंबर 1965 को निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष आठ सि‍तंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जायेगा जिसके बाद 1966 में पहला विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया था. और साल 2009-2010 को संयुक्त राष्ट्र साक्षरता दशक घोषित किया गया.

भारत में परेशान करने वाले हैं आंकड़े

भारत में आजादी के बाद से साक्षरता दर में बढ़ोतरी हुई है लेकिन फिर भी आंकड़े परेशान करने वाले हैं. है. आंकड़ों के मुताबिक आजादी के समय 1947 में साक्षरता दर महज 18 फीसदी थी जो कि साल 2011 में बढ़कर 75.06 तक पहुंच गई. देश में चलाए जा रहे सर्व शिक्षा अभियान जैसे कार्यक्रमों के तहत सरकार भी काफी कदम उठा रही है.

ग्रामीण क्षेत्रों में कैसी है शिक्षा की वर्तमान स्थिति

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की वर्तमान स्थिति भी काफी अच्छी नहीं है. शिक्षा की वार्षिक रिपोर्ट, 2018 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा में नामांकन में वृद्धि अवश्य दर्ज की गई है पर प्राथमिक शिक्षा की स्थिति मात्र नामांकन के आधार पर नहीं आंकी जा सकती.

अगर हम सरकारी विद्यालयों की बात करें तो वहां पर स्वच्छता, अनुशासन और अनेक बुनियादी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं. यहां तक की अक्सर अध्यापकों के अंदर भी ज्ञान और गुण दोनों की कमी रहती है जिसकी स्थिति हम आए दिन देखते रहते हैं.

भारत में साक्षरता दर 77.7 फीसदी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में साक्षरता दर 77.7 फीसदी है. अगर देश के ग्रामीण इलाकों की बात करें तो वहां साक्षरता दर 73.5 फीसदी है जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 87.7 फीसदी है.

साक्षरता के मामले में देश का शीर्ष राज्य केरल है, जहां 96.2 फीसदी लोग साक्षर हैं. वहीं आंध्र प्रदेश इस मामले में सबसे निचले पायदान पर है. वहां की साक्षरता दर महज 66.4 फीसदी ही है.

3077 गांवों में डाकिया ही पढ़ते हैं चिट्ठी

चिट्ठी पढ़वाने के लिए डाकिया का रोका जाना ये भी एक हकीकत है कि भारत में 3077 गांव ऐसे भी हैं जहां एक भी नागरिक साक्षर नहीं है. लैंगिक आधार पर बांट कर देखें तो स्थिति और बुरी है. 9899 गांव में एक भी महिला साक्षर नहीं है जबकि 3546 गांव में एक भी पुरुष साक्षर नहीं हैं.

सबसे ज्यादा अनपढ़ हैं भारत में

यूनेस्को की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 78 करोड़ से ज्यादा लोग अनपढ़ हैं. इनमें से 75 फीसदी केवल 10 देशों से ही हैं. इन देशों में चीन, भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, इथियोपिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और कांगो का नाम शामिल है.

शिक्षा के क्षेत्र में भी लैंगिक असमानता

देश में महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक साक्षर हैं. पुरुषों की साक्षरता दर 82.14 फीसदी है. वहीं महिलाओं की साक्षरता दर 65.46 फीसदी है. अगर पड़ोसी देशों की बात करें तो उनमें भारत की स्थिति सबसे बेहतर है. वहीं विकसित देशों के मुकाबले भारत एक पिछड़ा देश ही है.

भारत में शिक्षा की गुणवत्ता की स्थिति

भारत में शिक्षा की गुणवत्ता की स्थिति यह है कि 2020 के वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में केवल 2 भारतीय विश्वविद्यालयों को शीर्ष 400 विश्वविद्यालयों में स्थान प्राप्त हुआ.