2019 में भाजपा की प्रचंड जीत के मायने

लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के मायने - Panchayat Times
फाइल फोटो

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के मायने समझना बहुत जरूरी है. पहले जान लेते हैं कि इतिहास में ऐसे महापुरुषों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने समय के प्रवाह को बदल दिया. आजादी के बाद एक ही दल के बैनर और एक ही प्रकार के विचार के नेतृत्व का वर्चस्व रहा. पं. नेहरू से लेकर इंदिरा और राजीव तक सेक्युलर नीति से उपजा तुष्टीकरण, जातिवाद, वंशवादी राजनीति का प्रवाह रहा. कभी गरीबी जैसे एक मुद्दे पर चुनाव लड़े, कभी बोफोर्स मुद्दे ने राजनीतिक बदलाव किया. कभी इंदिरा द्वारा थोपे गए आपातकाल के विरोध के कारण जनता ने इंदिरा सरकार को नकार दिया. जनता ने कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति से त्रस्त रहते हुए भी कांग्रेस को अवसर दिया. उसके सामने विकल्प के नाते न कोई नेतृत्व था और न वैचारिक विकल्प, जिसके आधार पर देश को महान बताने का कोई रोडमैप था. इसलिए कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार करने की बाध्यता बनी रही.

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अटलबिहारी वाजपेयी का नेतृत्व इतना प्रभावी था कि जनता ने विकल्प के रूप में स्वीकारा. छह वर्ष के शासन में उन्होंने भारत को न केवल परमाणु शक्ति संपन्न बनाया, बल्कि प्रधानमंत्री सड़क योजना से सुदूर गांवों को पक्की सड़कों की योजना काम प्रारंभ हुआ. अटलजी ने गठबंधन की राजनीति का सफलता से संचालन किया. स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से बाध्यता में से रास्ता निकाल कर विकास के काम हुए. इंडिया शाइनिंग के नारे से लोग प्रभावित हुए. बाद के दिनों में सोनिया गांधी की रिमोट कंट्रोल मनमोहन सरकार को भी जनता ने मजबूरी में स्वीकार किया. इस सरकार का दूसरा कार्यकाल गड़बड़ घोटालों का रहा.

क्षेत्रीय दलों ने अपने पुराने ढर्रे पर चुनाव लड़ा

2014 के चुनाव में नये तरह की राजनीति की शुरुआत हुई. भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी के नाम को आगे किया. उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा. कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने अपने पुराने ढर्रे पर चुनाव लड़ा. जातिवादी, वंशवादी राजनीति से समाज में विभाजन की रेखा खींचने की कोशिश की, लेकिन जनता ने विकास की सकारात्मक नीति को पसंद किया. लोकप्रिय और बेदाग नेतृत्व नरेन्द्र मोदी का था. इसलिए जनता ने उन पर स्वीकृति की मोहर लगा दी. 2014 से 2019 तक की मोदी सरकार की विकास यात्रा रही उज्ज्वला, सौभाग्य, आयुष्मान योजना आदि से विकास ने गरीबों के यहां दस्तक दी. सुरक्षा की दृष्टि से उरी हमले के बाद भारत के कमांडों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया. इसी तरह पुलवामा में केन्द्रीय रिजर्व फोर्स के 45 जवानों की धोखे से हमलाकर हत्या कर गई.

दुनिया में भारत का कद ऊंचा हुआ

मोदी सरकार ने एयर स्ट्राइक का निर्णय लिया और आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर हमारे जांबाज वायुसेना के जवान सुरक्षित लौट आए. न केवल पाकिस्तान बल्कि दुनिया को आभास हो गया कि भारत ऐसी महाशक्ति है, जिसे छेड़ेंगे तो वह छोड़ेगा नहीं. दुनिया में भारत का कद ऊंचा हुआ. यह भी कहा जा सकता है कि दुनिया की महाशक्तियों ने स्वीकार किया कि दुनिया की कोई भी समस्या भारत के बिना हल नहीं हो सकती. दुनिया में भारत के पासपोर्ट का सम्मान बढ़ा. दुनिया की सबसे तेजी से बढ़नेवाली आर्थिक समृद्धि से भारत सबसे ऊपर दिखाई दिया. सड़कों का निर्माण भी पहले से दोगुनी गति से हुआ. 2019 के आम चुनावों में मोदी सरकार ने अपना रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया. उधर, कांग्रेस ने झूठे और अनर्गल आरोपों के द्वारा मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश की. जातिवाद, अल्पसंख्यकवाद और वंशवादी राजनीति के पुराने फार्मूले से वोट बंटोरने की कोशिश हुई. लेकिन जनता ने झूठ और सच की परख कर ली.

भाजपा को बहुमत से अधिक 303 सीटें मिली

नरेन्द्र मोदी की इस बात पर लोगों ने भरोसा किया कि ईमानदारी के साथ सरकार ने काम किया है. नतीजतन पहले से ज्यादा समर्थन भाजपा को मिल गया. यह भी पुष्ट हो गया कि जो काम कांग्रेस सरकारें पचास वर्ष से नहीं कर सकी, वह मोदी सरकार ने पांच वर्ष में करके दिखाया. आज की राजनीति में भी यह प्रासंगिक है कि जनता दृढ़ इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व को पसंद करती है. मोदी सरकार ने उरी और पुलवामा के हमले का पाकिस्तान के अंदर घुसकर जो बदला लिया, तो लोगों को आभास हो गया कि नरेन्द्र मोदी के हाथों में देश सुरक्षित है. लोगों को यह भी लगा कि नरेन्द्र मोदी सरकार नहीं रही तो भारत उसी अंधेरे गर्त में पहुंच जाएगा, जहां रिमोट कंट्रोल सरकार के समय था. इसलिए आगे बढ़कर लोगों ने नरेन्द्र मोदी की झोली वोटों से भर दी. पहले से करीब पच्चीस प्रतिशत अधिक मतदान हुआ. भाजपा को बहुमत से अधिक 303 सीटें मिली और कुल एनडीए को 353 सीटें देकर जनता ने नरेन्द्र मोदी को जनहित में निर्णय लेने की पूरी छूट दे दी. नरेन्द्र मोदी ने इस महाविजय के बाद कहा कि जनता ने इस फकीर की झोली भर दी. नरेन्द्र मोदी ऐसे महानायक बनकर उभरे, जिन्होंने पं. नेहरू और इंदिरा गांधी की लोकप्रियता को पीछे छोड़ दिया.

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध

कांग्रेस देश में मान्यता प्राप्त विरोधी दल के लायक सीटें भी प्राप्त नहीं कर सकी. उसे केवल 52 सीटें मिली. यूपीए को कुल 91 सीटें मिलीं. भाजपा को ही 2014 की तुलना में करीब सात प्रतिशत अधिक (38.5 प्रतिशत) मत प्राप्त हुए. चौदह राज्यों में भाजपा को पचास प्रतिशत से अधिक मत मिले. उत्तर प्रदेश जहां महागठबंधन का शोरगुल अधिक था, वहां भाजपा को सपा-बसपा और रालोद के कुल जोड़ से दस प्रतिशत अधिक वोट मिले. यूपी में भाजपा को 64 सीटें मिलीं. भाजपा को जिन तीन राज्यों म.प्र., छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में बहुमत नहीं मिल सका था. वहां म.प्र. की 29 सीटों में से भाजपा को 28 सीटें मिलीं. राजस्थान में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया. सभी सीटों पर भाजपा का विजयी परचम फहराया. इसी तरह छत्तीसगढ़ की ग्यारह में से नौ सीटों पर भाजपा की विजय पताका फहराई. पं. बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध मारते हुए भाजपा को 40.23 प्रतिशत वोट मिले. जो प. बंगाल कम्युनिस्टों का गढ़ रहा वहां एक भी सीट उन्हें नहीं मिली. ममता बनर्जी भाजपा के बढ़ते प्रभाव से इतनी घबराईं कि उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच टीएमसी का अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश कर दी. इसी तरह कांग्रेस में भी राहुल गांधी ने केन्द्रीय कार्य समिति के समक्ष अध्यक्ष पद छोड़ने का ड्रामा किया, जो अभी जारी है.

समरसता का आंदोलन

अब सवाल यह कि मोदी सरकार की दिशा-दशा क्या होगी? मोदी के नेतृत्व में भारत किस ऊंचाई पर पहुंचेगा? इन सवालों के उत्तर की तलाश अधिक प्रासंगिक है. महाविजय के बाद नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली स्थित कार्यालय में कार्यकर्ताओं के बीच तीन संकल्प किए. पहला है काम करने में गलती हो जाती है, पर बदनीयत और बद इरादे से कुछ नहीं करूंगा. दूसरा, अपने लिए कुछ नहीं करूंगा. जो कुछ करूंगा सिर्फ देश के लिए करूंगा. तीसरा है, मेरे समय का पल-पल और शरीर का कण-कण मेरे देश के लिए होगा. इन तीन संकल्पों से यही लगता है कि नरेन्द्र मोदी अब केवल देश के लिए हैं. एनडीए के सांसदों के बीच नरेन्द्र मोदी ने जो भाषण दिया, वह भविष्य की दिशा को रेखांकित करने वाला है. उन्होंने सेन्ट्रल हाल में कहा कि सेवा भाव के कारण जनता ने इसे स्वीकार किया है. हमें सत्ता भाव से नहीं, सेवा भाव से काम करना होगा. उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव समरसता का आंदोलन बना. जातिवाद, वंशवादी राजनीति को जनता का नकारा मिला.

2019 का चुनाव जनता ने लड़ा है

2019 का चुनाव न दल ने लड़ा, न मोदी ने लड़ा, बल्कि जनता ने आगे आकर लड़ा है. जनता के नीर क्षीर विवेक का कोई मापदंड नहीं हो सकता. विश्वास की डोर जब मजबूत होती है, तो सरकार समर्थक लहर पैदा होती है. नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश परिश्रम की पूजा करता है. परिश्रम की पराकाष्ठा हो, ईमानदारी पर रत्तीभर भी संशय नहीं हो तो देश उसके साथ चल पड़ता है. देश परिश्रम की पूजा करता है. ईमानदार को सिर पर बैठाता है. उन्होंने नए सांसदों से आग्रह किया कि वे छपास और दिखास से जितने दूर रहेंगे, उतनी वे अधिक सेवा कर सकेंगे. मोदी ने कहा कि यह सरकार गरीबों ने बनाई है. गरीबों के साथ जो छल होता था, उसमें हमने छेद कर दिया है.