पाकिस्तान में आम चुनाव 2018 हो रहे हैं, क्या आपको पता है ?

पाकिस्तान में आम चुनाव 2018 हो रहे हैं, क्या आपको पता है ?

नई दिल्ली. भारत में जहां मुश्किल से एक साल से भी कम समय में 17वीं लोकसभा के आम चुनाव की गूंज सुनाई देगी, वहीं हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में आम चुनाव 2018 का बिगुल बज चुका है. पाकिस्तान की 15वीं संसद के लिए पाकिस्तान नेशनल असेंबली की कुल 342 सीटें में से 272 सीटों और पाकिस्तान के चार सूबों की विधानसभाओं के लिए 25 जुलाई को वोट डाले जाएंगे. पाकिस्तान में आजकल विभिन्न पार्टियों के नेताओं की तरफ से नामांकन और चुनाव प्रचार जोरों पर है. चुनावी रैली, नुक्कड़ सभाऔर जन संपर्क अभियान तेजी से चल रहा है.

पाकिस्तान की राजनीति के दिग्गज पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, उनके भाई शहबाज शरीफ, क्रिकेटर से नेता बने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान, पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी, उनके पिता पूर्व राष्टपति आसिफ अली जरदारी और चुनाव लड़ रही विभिन्न पार्टियों नेता चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. इन सबके बीच अमेरिका और चीन के साथ ही हमारे देश की निगाहें भी पाकिस्तान चुनाव पर लगी हुई हैं. हालांकि हमारे देश की मुख्यधारा की मीडिया में अभी पाकिस्तान चुनाव को लेकर कोई खास कवरेज या चर्चा देखने को नहीं मिल रही है. ऐसे में पंचायत टाइम्स अपने पाठकों को पाकिस्तान चुनाव की हर गतिविधि से रूबरू कराने जा रहा है.

फिर दौड़ेगा शेर, चलेगी तीर या बल्ले की बारी :

भारत में होने वाले आम चुनाव में जिस तरह राजनीति पार्टियों की तरफ से वोटरों को लुभाने के लिए तरह-तरह के नारे गढ़े जाते हैं और जनता को अपने पक्ष में करने के लिए कई तरह के पैरोडी और थीम सांग्स बनाए जाते हैं, उसी तरह पाकिस्तान के चुनाव में भी वोट पाने के लिए पार्टियां सभी हथकंडे अपनाती हैं.

हमारे देश भारत में जहां पंजे का निशान कांग्रेस की पहचान है, वहीं कमल को देखते ही भारतीय जनता पार्टी का अहसास होता है. उसी तरह पाकिस्तान में भी वहां की सबसे पुरानी पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का चुनाव चिन्ह तीर, नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) चुनाव चिन्ह शेर और इमरान खान की पार्टी का निशान बैट यानि बल्ला है. इसके लिए भारत से पाकिस्तान गए लोगों की पार्टी कही जाने वाली मुताहिदा कौमी मूवमेंट का चुनाव चिन्ह पतंग और जमाते-ए-इस्लामी का किताब है. इसके लिए और दूसरी पार्टियों के अलग-अलग चुनाव निशान हैं.

पाकिस्तान में पांच साल पहले 14वीं संसद के लिए वर्ष 2013 में पाकिस्तान नेशनल असेंबली की कुल 342 सीटें में से 272 सीटों के लिए चुनाव हुए थे. जिसका चुनाव परिणाम 14 मई 2013 को जारी किया था. जिसमें इस चुनाव में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) यानि (पीएमएल-एन) को 126 सीटों पर और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को 31 सीटों पर जीत मिली. इसी के साथ चार पाकिस्तान की चार प्रांतीय विधानसभाओं (पंजाब, केपीके, सिंध और बलूचिस्तान) के लिए भी चुनाव हुए थे. वर्ष 1947 में अलग राष्ट्र बनने के बाद पाकिस्तान में पहली बार किसी लोकतांत्रिक सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया है.

पाकिस्तान में 13वीं संसद के लिए वर्ष 2008 में चुनाव हुए थे. 2013 के चुनाव चुनाव के बाद नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे लेकिन अपना कार्यकाल वह पूरा नहीं कर पाए और कुछ महीना पहले की पनामा लीग पेपर प्रकरण में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा था. साल 2013 के चुनाव में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी यानि पीटीआई ने तब्दीली यानि बदलाव का मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ी थी लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई थी.

इसबार के चुनाव में इमरान खान एक बार फिर काफी ताकत के चुनाव मैदान में हैं और माना जा रहा है कि इस बार भी उनकी पार्टी का नवाज शरीफ की पार्टी से सीधी टक्कर है. पाकिस्तान चुनाव में जो चुनाव पूर्व सर्वे आए हैं उसके मुताबिक इमरान खान की पार्टी इस बार बड़ा फेरबदल करके सत्ता के नजदीक पहुंच सकती है.

कांग्रेस की तरह ही पीपीपी का हाल :

जिस तरह भारत में सबसे ज्यादा दिनों तक कांग्रेस का शासन रहा है उसकी तरह पाकिस्तान में भी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने राज किया है. भारत में जहां देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहीं, उसी तरह पाकिस्तान में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की तरफ से जुल्फिकार अली भुट्टो और उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो भी प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे. बेनजीर भुट्टो के शहीद होन के बाद भुट्टो और जरदारी परिवार की तीसरी पीढ़ी के बिलावल जरदारी भुट्टो ताल ठोक रहे हैं.

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और हमारे देश की कांग्रेस पार्टी में कई समानताएं हैं, जहां एक तरफ दोनों पार्टियों के पास देश को दशा और दिशा देने वाले नेताओं की समृद्ध परंपरा है वहीं कांग्रेस की तरह पाकिस्तान जैसे धर्म के आधार पर बने देश में भी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी एक सेक्यूलर पार्टी के तौर पर जानी जाती है. हालांकि भारत में जिस तरह कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में अपने वजूद को बनाए रखने के लिए जूझ रही है वहीं पाकिस्तान में भी बिलावल जरदारी भुट्टो की सरपरस्ती में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी सिकुड़ रही है. इस बार के आम चुनाव में भी अपने परंपरागत सिंध सूबे को छोड़कर पाकिस्तान के दूसरे प्रदेशों में पीपीपी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.

नेतृत्व के संकट से जूझ रही पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज):

“ शेर का निशान, रोशन पाकिस्तान  के नारे के साथ पांच साल पहले सत्ता में आई नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) इस चुनाव में नवाज शरीफ के चुनाव लड़ने पर लगी रोक और कोर्ट-कानून के चक्कर में जूझ रही है. नवाज शरीफ की बेटी मरियम और उनके भाई पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ भले ही पार्टी को बचाने के लिए चुनाव मैदान में हैं लेकिन उनके सामने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सरबरा इमरान खान एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं. नवाज शरीफ की पार्टी के पुराने नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में आए दिन इमरान खान की पार्टी में शामिल हो रहे हैं. ऐसे में पंजाब में मजबूत दखल रखने वाली इस पार्टी के सामने इस बार करो यहा मरो का सवाल है.

“क्या तब्दीली आएगी” :

पाकिस्तान की राजनीति में तब्दीली यानि सत्ता परिवर्तन को मुद्दा बनकार पिछले दो चुनाव में प्रधानमंत्री की कुर्सी से तक नहीं पहुंचने वाले इमरान खान इस बार कुछ करिश्मा कर पाएंगे. यह बाते आजकल पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया में चर्चा में हैं. पिछले चुनाव में उनकी पार्टी का नारा “इंशा अल्लाह, जीते बल्ला जीते बल्ला” क्या इस बार मतदाताओं को बल्ले पर वोट करने के लिए लुभा पाएगा ? यह तो 25 जुलाई के बाद पता चलेगा. हालांकि इमरान खान की लोकप्रियता इस बार के चुनाव में भी अपने चरम पर है और वह इस बार चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंके हुए हैं.

पाकिस्तान के एक्सप्रेस न्यूज चैनल के सर्वे के मुताबिक इस बार इमरान खान की पार्टी पिछली बार के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में हैं लेकिन मुकाबला कांटे का है. इमरान खान पिछले चुनाव की तरह इस बार के चुनाव में भी अपनी हर रैली में “ तब्दीली आएगी” को नारा लगाकर लोगों से बल्ले के चुनाव चिन्ह पर वोट करने की अपील कर रहे हैं.