अटल जी की याद में सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा, सीएम और नेता प्रतिपक्ष रहे मौजूद

अटल जी की अस्थि रांची पहुंचने के बाद शोक सभा का आयोजन-Panchayat Times
अटल जी की अस्थि रांची पहुंचने के बाद शोक सभा का आयोजन

रांची. भारत रत्न स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अस्थि कलश बुधवार को रांची पहुंचा. इसके बाद शोक सभा का आयोजन किया गया. जहां राज्य के राज्यपाल और मुख्यमंत्री समेत सभी वरिष्ठ बीजेपी नेताओं और सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने शामिल होकर उनकी अस्थि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और अपने विचारों को रखा.

प्रार्थना स्थल पर बोलते हुए राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के श्रद्धांंजलि के लिए शब्द नहीं है. उनके चरित्र का वर्णन चंद शब्दो में नहीं हो सकता है. मैं अटल जी के विचारों से प्रभावित हो कर ही राजनीति में आई थी. अटल जी गांव को शहर से, शहर को राज्य से, पंचायत को गांव से जोड़ने के लिए कार्य कर रहे थे. उन्होंने देश के सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत किया. प्रधानमंत्री बनने के बाद देश के विकास के लिए प्रत्येक मिनट काम किया.

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प्रार्थना सभा में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि देश का महान सपूत अटल जी हमारे बीच नहीं रहे. लेकिन, अटल जी अभी भी हमारे बीच है और हमेशा रहेंगे, अटल जी के आदर्श और जीवन के प्रति उनका नजरिया हमारे लिए प्रेरणास्रोत है. अटल जी जैसे विभूति सदियों में जन्म लेते हैं. वह कर्मयोगी, कुशल नेता, कुशल साहित्यकार थे. वह सदन से सड़क तक श्रोताओं को प्रभावित करते थे. अटल जी जब आंखे बंद करते थे तो देश की जनता की आंखे खुल जाती थी. अटल जी का पूरा शरीर बोलता था. अटल जी के बिना भारत की कल्पना अधूरा है. सभी दलों के नेताओं की ओर से श्रद्धांंजलि देना यह प्रमाणित करता है कि उनका व्यक्तित्व कितना प्रभावशाली था. उनका जीवन राष्ट्र सेवा के लिए था. वह विदेश मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक रहे. लेकिन उनमें घमंड नहीं था. झारखंड के साथ उनकी कई यादें हैंं.

नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि अटल जी का परिचय करवाना सूरज को दिया दिखाने जैसा है. ऐसा शायद ही कोई है जो उनके व्यक्तित्व से प्रभावित न हुआ हो. आने वाली पीढ़ी भी अटल जी को हमेशा याद रखेगी. उनके विचार हमारे लिए प्रेरणाश्रोत हैंं. अटल जी के अंदर जो गहराई थी उसे समझ पाना मुश्किल था. आज हमे संकल्प लेना चाहिए कि यदि हम अबके विचारों पर चले तो राजनीति की अलग परिभाषा होगी. आज हमे उनके दिए शिक्षा पर चलना चाहिए. अगर हम सभी अटल जी के राजनीतिक मूल्यों पर चले तो राजनीतिक कटुता समाप्त हो जाएगी. अटल जी का सभी दलों के प्रति आदर का भाव पढ़ा और सुना है. राजनीतिक विरोध के बावजूद उनका आदर करना सराहनीय रहा है.

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि अटल जी भारत माता के सपूत थे. अटल जी लोकतंत्र के स्तम्भ के रूप में थे. झारखंड के साथ उनकी कई स्मृति जुड़ी है. देह-दुनिया मे अपने नेतृत्व क्षमता को बिखरने वाले महान सपूत आज हमारे बीच नहीं हैंं. प्रत्येक जीव प्रकृति के नियम है कि कितना भी महान कोई क्यों न हो उनको ईश्वर में खुद को विलीन करने की परंपरा है. आज अटल जी नहीं है. लेकिन, उनकी स्मृति हमारे बीच है. अटल जी व्यक्ति नहीं एक संस्था थे. वह  भारतीय परंपराओं को मजबूती के साथ देश दुनिया के समक्ष रखा. वे अपने कार्यों, नेतृत्व और अपने गुणात्मक दृष्टि से भारत को स्थापित करते थे.