#विश्वप्रेसस्वतंत्रतादिवस के अवसर पर ट्वीट संवाद

#विश्वप्रेसस्वतंत्रतादिवस के अवसर पर ट्वीट चैट में हमने पूछे कुछ ऐसे सवाल-Panchayat Times

नई दिल्ली. विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर साल 3 मई को मनाया जाता है. भारत में पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है. प्रेस किसी भी समाज का आईना होता है. 1991 में यूनेस्को की जनरल असेंबली के 26वें सत्र में अपनाई गई सिफारिश के बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने दिसंबर 1993 में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की घोषणा की थी.

प्रेस की आजादी से यह बात साबित होती है कि किसी भी देश में अभिव्यक्ति की कितनी स्वतंत्रता है. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक जरूरत है. आज हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहां अपनी दुनिया से बाहर निकल कर आसपास घटित होने वाली घटनाओं के बारे में जानने का अधिक वक्त हमारे पास नहीं होता.

ट्वीट चैट आयोजित

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हमने एक ट्वीट संवाद आयोजित किया था. जिसमें हमने पत्रकारिता से जुड़े के कई अहम सवाल पूछ थे. इस ट्वीट चैट पर हमारे पैनलिस्ट थे सोशल मिडिया मैटर्स, प्रो. आनंद कुमार, राजन पाड़ेय, कलोल भट्टाचार्य जी, दिव्यांशु और अजय ब्रह्मात्मज शामिल थे.

इन लोगों से पूछा गया कि “भारत की आजादी के समय होने वाली और आज की पत्रकारिता के तरीको में क्या-क्या बदलाव आए हैं?”

इस सवाल पर प्रो. आनंद कुमार ने कहा ”आजादी के समय एक लोकतांत्रिक, आत्मनिर्भर और शांतिपूर्ण स्वाधीन राष्ट्र की रचना के लक्ष्य के बारे में आत्मविश्वास का माहौल था. इस माहौल के बनाने में पत्रकारिता की बड़ी भूमिका थी. पत्रकारों के प्रति राजनीतिज्ञों और समाज का भरोसा था. सांप्रदायिकता और क्षेत्रीयता की तुलना में अखबारों का राष्ट्रीय एकता के प्रति आग्रह था. पत्रकारों की संख्या कम थी लेकिन प्रभाव ज्यादा था.”

अजय ब्रह्मात्मज ने कहा “आजादी के समय की पत्रकारिता एक मिशन थी. अब यह ज्यादातर कमीशन हो गयी है. उन दिनों देशहित और सामाजिकता पर जोर रहता था. अभी इसकी बेहद कमी है.”

कलोल भट्टाचार्य जी ने कहा “यह सच है कि कुछ जानकारी आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध हो जाती है लेकिन वास्तविक रिपोर्टिंग मील के क्षेत्र में बनी रही. कोई वास्तविक कहानी तब तक संभव नहीं है जब तक कि रिसर्च करके न की जाए.”

सवाल दूसरे में पूछा गया कि  “क्या आज के पत्रकार निडर होकर अपनी बात सामने रख सकते हैं?”

इस सवाल पर सोशल मिडिया मैटर्स कहा “हाल की पत्रकारिता को देखते हुए ऐसा आंका जाता है कि अब न्यूज चैनल और पत्रकार खबरों को सिर्फ बेचने के लिए तैयार करते हैं न कि किसी मुद्दे विशेष पर बात करने के लिए. देश में ऐसे हादसे हुए जहां निडर और बेखौफ पत्रकारिता की आवश्यकता थी पर वो देखने को नहीं मिली.

प्रो. आनंद कुमार ने कहा “हमारा समाज बहुमुखी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. जन-साधारण में साक्षरता, चेतना और आधुनिकीकरण ने सूचना के महत्व को बहुत बढ़ा दिया है. चूंकि प्रेस ने राजनीतिक स्वतंत्रता और समाज सुधार में लंबे समय से योगदान किया है इसलिए पाठक-दर्शक के रूप में साधारण स्त्री-पुरुषों का भरोसा”