राजस्थान की राजनीति में लगातार बढ़ रही नारी शक्ति

राजस्थान की राजनीति में लगातार बढ़ रही नारी शक्ति

जयपुर. महिलाओं के मामले में परंपरावादी माने जाने वाले राजस्थान में महिलाओं की राजनीति में भागीदारी लगतार बढ़ रही है. यहां 1952 से 2013 तक हुए हर विधानसभा चुनाव में महिला प्रत्याशी और जीतने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है. हालांकि, विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट देने की मांग अभी दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल पूरी नहीं कर रहे हैं और अभी तक के हुए विधानसभा चुनावों में औसतन 10 प्रतिशत टिकट महिलाओं को मिला है. ऐसे में इस बार महिलाएं इस बात की उम्मीद कर रही हैं कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों दल महिलाओं को बड़ी संख्या में चुनाव मैदान में उतारेंगे.

चार से शुरुआत होकर संख्या सैकड़ों पार पहुंची 

आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के सभी बड़े राज्यों के मुकाबले राजस्थान की राजनीति में महिलाओं की भूमिका प्रभावी है. राज्य की राजनीति में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया सबसे प्रभावी महिला चेहरा हैं. हालांकि इनके अलावा भी कई और महिला विधायक हैं, जिनकी वजह से राज्य की विधानसभा में महिलाओं को दबदबा बना हुआ है. 200 विधायकों वाली विधानसभा में 27 महिला विधायक हैं, जिसमें से किरण महेश्वरी कैबिनेट मंत्री हैं, वहीं कृष्णेन्द्र कौर, अनिता भदेले, और कमसा राज्यमंत्री हैं. हालांकि महिलाओं को यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है.

अगर अतीत पर नजर दौड़ाएं तो राजस्थान में 1952 में हुए पहले चुनाव में सिर्फ चार महिलाएं चुनाव मैदान में उतरी थीं लेकिन इनमें से एक भी जीत नहीं पाई थीं. लेकिन इसके बाद भी महिलाएं लगातार चुनाव लड़ती रही. बात अगर पिछले विधानसभा चुनाव की जाए तो यहां पर 2013 के चुनाव में 166 महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में थीं. इनमें से 28 ने चुनाव जीता और 34 दूसरे नंबर पर रहीं. जीती हुई महिला प्रत्याशियों को 19 लाख 15 हजार 800 वोट मिले.

गौरतलब है कि राजस्थान देश का पहला राज्य था, जहां महिलाओं को पंचायत और नगरपालिका चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया. यह आरक्षण 2008 में भाजपा के पिछले कार्यकाल में दिया गया था. भाजपा के पिछले कार्यकाल में राजस्थान में एक बार यह स्थिति भी बनी थी कि राज्य के तीन सबसे बड़े पदों पर महिलाएं थीं. उस समय राज्यपाल प्रतिभा पाटील थीं, मुख्यमंत्री पद पर वसुंधरा राजे और विधानसभा अध्यक्ष पद पर सुमित्रा सिंह थीं.

दल दे रहे हैं औसतन 10-15 प्रतिशत टिकट

जहां तक राजनीतिक दलों का सवाल है तो पिछले दो विधानसभा चुनाव से राजनीतिक दल भी औसतन दस से पंद्रह प्रतिशत टिकट महिला प्रत्याशियों को दे रहे हैं. राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटें हैं और 2008 में भाजपा ने 32 सीटें महिलाओं को दी थी. इनमें से 13 जीत कर विधानसभा में आई. वहीं, कांगे्रस ने 23 टिकट दिए थे, जिसमें से 13 प्रत्याशी जीतीं. उधर, 2013 में भाजपा ने 26 महिलाओं को टिकट दिए और 22 जीतीं. कांग्रेस ने 24 को टिकट दिए, हालांकि जीत सिर्फ एक ने हासिल की.महिला सदस्यों के लिहाज से इस समय राजस्थान में 200 में से 28 महिला विधायक हैं.

महिला आयोग भेजेगा 33 प्रतिशत टिकट देने का प्रस्ताव

अभी तक कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के महिला अग्रिम संगठनों ने इस बार ज्यादा टिकट देने की मांग नहीं उठाई है, लेकिन इस मामले में राजस्थान महिला आयोग पहल करने जा रहा है. राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा कहती हैं कि हम आयोग की तरफ से सभी राजनीतिक दलों से अपील करेंगे कि आने वाले चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट दिए जाएं, क्योंकि राजस्थान में महिलाओं ने पंचायत से लेकर सरकार और प्रशासन में हर स्तर पर खुद को साबित किया है. राजस्थान कांग्रेस की उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा कहती हैं कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाया है और इस बार भी महिलाओं को अच्छा प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.

विधानसभा में महिलाओं ने मनवाया अपना लोहा

राजस्थान विधानसभा में विधायक बनी महिलाओं ने विधानसभा की कार्यवाही और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सबसे ज्यादा ध्यान खींचा. कांग्रेस की शकुंता रावत, बीजेपी की अल्का गुर्जर, निर्दलीय अंजू देवी धानका ने विधानसभा में सबसे ज्यादा सवाल उठाई हैं. इन्होंने उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जिनका सरोकार सीधे जनता से है. इन्होंने सदन का ध्यान महिला शिक्षा, महिलाओं से जुड़ी योजनाओं में भ्रष्टाचार पर खींचा.

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी दमदार छवि के लिए मशहूर हैं. बतौर मुख्यमंत्री वसुंधरा महिलाओं पर ध्यान देने की पूरी कोशिश करती है. साथ ही वह सत्ता चलाने के दौरान पुरुषों को यह संदेश देने में सफल साबित हुई हैं कि महिलाएं किसी भी सूरत में पीछे नहीं है. शायद इसी वजह से वसुंधरा झालावाड़ से पांच बार सांसद और तीन बार विधायक का चुनाव जीत चुकी हैं. वह दूसरी बार राज्य की मुख्यमंत्री बनी हैं.

राजस्थान सरकार में मंत्री किरण माहेश्वरी एक कुशल वक्ता हैं. विधानसभा के भीतर पर कठिन से कठिन मुद्दों पर बेहद चतुराई से जवाब देती रही हैं. उन्हें इलाके में लोग कॉलेज खुलवाने वाली विधायक कहते हैं. अल्का सिंह गुर्जर बेहद तेज-तर्रार महिला नेता हैं. विधानसभा में किसी भी मुद्दे पर बोलने की बारी आई तो उन्होंने मौके नहीं गंवाया है. राष्ट्रीय मुद्दों पर भी सदन का ध्यान खींचती रहती हैं.

पहली बार विधायक बनीं अनीता कटारा उभरती हुई राजनेता हैं. अपने पहले ही कार्यकाल में अनीता विधानसभा में कई मुद्दों पर सवाल पूछ चुकी हैं. सोना देवी भी पहली बार विधानसभा पहुंची हैं, लेकिन राज्य की समस्याओं पर सरकार का ध्यान खींचती रहती हैं. वह बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत जरूरतों पर अक्सर सवाल पूछती हैं. शकुंतला रावत राजस्थान में कांग्रेस की एकमात्र महिला विधायक हैं. वह राज्यस्तरीय मुद्दों पर कांग्रेस की ओर से जोरदार आवाज उठाई हैं.