भारत नेट : पंचायतों को मिलेगा 75% कम कीमत पर 100 एमबीपीएस तेज ब्राडबैंड कनेक्शन

भारत नेट का दूसरा चरण का साल के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. दूसरे चरण के पूरे होने के बाद डेढ़ लाख पंचायतों तक ब्राडबैंड की कनेक्टिविटी मिल जाएगी. गांवों के ऑप्टिकल फाइबर से जुड़ने के बाद डाटा शुल्क में 75 फीसदी तक कमी आएगी. भारत नेट के तहत कम-से-कम 100 एमबीपीएस ब्राडबैंड कनेक्शन से पंचायतों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.

सस्ते और तेज गति के इंटरनेट की सुविधा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के कई अवसर भी पैदा होंगे. एक रिसर्च के मुताबिक 10 फीसदी इंटरनेट डाटा खपत बढ़ने से करीब तीन फीसदी जीडीपी में वृद्धि देखने को मिला है.

भारत नेट परियोजना में अलग-अलग क्षेत्रों में आय के हिसाब से इंटरनेट कनेक्शन के लिए शुल्क रखा गया है. मसलन बिहार के लिए 70 रुपया और उत्तर प्रदेश में 94 रुपया का मासिक शुल्क रखा गया है. हालांकि निजी सेवा प्रदाताओं को घरों तक ब्राडबैंड कनेक्शन

टेक्निकल गुरूजी यू-ट्यूब चैनल चलाने वाले गौरव चौधरी कहते हैं, ” ब्राडबैंड कनेक्शन में सिर्फ एक बार तार बिछाने का खर्च लगता है. एक बार काम पूरा होने के बाद मेंटनेंस खर्च काफी कम हो जाता है. इसलिए यह मोबाइल इंटरनेट से काफी सस्ता है.” बाहरी वातारण के कम प्रभाव होने की वजह से ब्राडबैंड से लगातार निश्चित गति का इंटरनेट स्पीड मिलता है.

साल 2011 में राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क परियोजना की शुरुआत की गई. इसका लक्ष्य देश की ढ़ाई लाख पंचायतों को 100 एमबीपीएस के स्पीड के ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जोड़ना था. परियोजना के तहत स्कूल, स्वास्थ्य केन्द्र एवं कौशल विकास केन्द्र को मुफ्त में इंटरनेट कनेक्टिविटी देने का प्रावधान है. परियोजना के पूरा होने के बाद सस्ते दर पर उच्च गति का इंटरनेट कनेक्शन का सपना साकार हो जाएगा. पहले चरण को दो सालों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन अबतक इसकी प्रगति काफी धीमी रही है.

31 दिसम्बर 2017 तक 2,54895 किलोमीटर तक तार को बिछा दिया गया है.

एनडीए सरकार ने इस परियोजना का नाम बदलकर भारत नेट कर दिया और काम में तेजी लाने के लिए डेली-मॉनिटरिंग जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए. डिजिटल इंडिया के लिए इस परियोजना को काफी अहम माना जा रहा है. साथ ही भारत नेट का में प्रयोग होने वाला तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है और उपकरणों का निर्माण देश में ही हुआ है.

अब तक पूर्ण डिजिटल राज्य बनान में केरल को ही सफलता मिल पाई है. दक्षिणी राज्यों के अलावा भारतनेट ने केवल चंडीगढ़, पुदुच्चेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्से में डिजिटल कनेक्शन में सफलता पाई है. केरल, कर्नाटक तथा हरियाणा ऐसे राज्‍य थे जिन्‍होंने इस परियोजना के तहत सभी जीपीएस पूरे कर लिए थे. कर्नाटक ने भारतनेट के सर्वश्रेष्‍ठ उपयोगकर्ता का पुरस्‍कार प्राप्‍त किया.

शुरुआत में 20,000 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान लगाया गया था. जबकि अबतक 34 हजार करोड़(दूसरे चरण के लिए अनुमानित खर्च) रुपए खर्च हो चुके हैं. परियोजना के पूरा होते-होते 75,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं. यूनिवर्सल सर्विस अॉलिगेशन फंड से इस परियोजना को चलाया जा रहा है.