नई दिल्ली. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने मंगलवार को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह को वैश्विक इंटरनेट डेटा ट्रांसफर हब (Global Internet Data Hub) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इन द्वीपों की भौगोलिक स्थिति इसे इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक रणनीतिक केंद्र बना सकती है।
अंडमान से हो सकता है दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया को कनेक्ट
भारत एआई शक्ति’ (Bharat AI Shakti) कार्यक्रम के दौरान मंत्री वैष्णव ने कहा कि हम अंडमान को ग्लोबल इंटरनेट डेटा ट्रांसफर का अगला बड़ा हब क्यों नहीं बना सकते? अंडमान गूगल (Google) और अन्य इंटरनेट-आधारित कंपनियों को दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दुनिया के बड़े हिस्से तक पहुंचने में मदद कर सकता है, जो नई क्षमता की तलाश में हैं।
पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर
अपने संबोधन में मंत्री ने यह भी कहा कि अंडमान द्वीप से म्यांमार (Myanmar) और फिर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (Northeastern States) तक सबमरीन केबल नेटवर्क (Submarine Cable Network) को बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने कंपनियों से अपील की कि विशाखापट्टनम (Vizag) से सित्तवे (Sittwe, Myanmar) तक केबल कनेक्शन तैयार किया जाए, जिससे इसे आगे मिजोरम (Mizoram) तक ले जाया जा सके। वैष्णव ने कहा कि रेलटेल नेटवर्क के जरिए जो मौजूदा कनेक्टिविटी दी जा रही है, उसे और मजबूत करने की जरूरत है। अगर हम म्यांमार के रास्ते मिजोरम तक केबल ले जाएं, तो पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलेगा। मंत्री ने बताया कि मिजोरम के सैरांग (Sairang) तक रेलवे लाइन बिछाई जा चुकी है और प्रधानमंत्री ने इसके विस्तार को म्यांमार बॉर्डर तक ले जाने का निर्देश दिया है, जहां सित्तवे से एक हाईवे भी बन रहा है।
गूगल का भारत में बड़ा निवेश
मंत्री के इस विजन के साथ ही टेक दिग्गज Google ने भारत में अपना अब तक का सबसे बड़ा निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी 15 अरब डॉलर (USD 15 Billion) की लागत से आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में एक AI Hub और Gigawatt-scale Data Center बनाएगी, जिसका निर्माण अदाणी ग्रुप (Adani Group) के साथ साझेदारी में किया जाएगा।
गूगल ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारती एयरटेल (Bharti Airtel) के साथ भी हाथ मिलाया है। एयरटेल विशाखापट्टनम में Cable Landing Station (CLS) स्थापित करेगी, जहां गूगल की नई अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल्स (International Subsea Cables) जुड़ेंगी। इसके अलावा एयरटेल हाई-कैपेसिटी और लो-लेटेंसी फाइबर नेटवर्क विकसित करेगी, ताकि भारत में बढ़ती AI वर्कलोड्स की मांग को पूरा किया जा सके।
