नई दिल्ली. जनवरी 2026 में भारत के कुल निर्यात (मर्चेंडाइज़ और सेवाएं मिलाकर) में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (भारत) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल निर्यात साल-दर-साल आधार पर 13.17% बढ़कर 80.45 अरब डॉलर हो गया, जो जनवरी 2025 में 71.09 अरब डॉलर था।
हालांकि, इसी अवधि में आयात में निर्यात से तेज वृद्धि दर्ज की गई। जनवरी 2026 में कुल आयात 18.76% बढ़कर 90.83 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष इसी महीने 76.48 अरब डॉलर था।
व्यापार घाटा लगभग दोगुना
निर्यात और आयात के बीच अंतर बढ़ने से कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) जनवरी 2026 में बढ़कर 10.38 अरब डॉलर हो गया, जबकि जनवरी 2025 में यह 5.39 अरब डॉलर था। इसका मतलब है कि देश का आयात निर्यात की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ा है।
सेवाओं के निर्यात में मजबूत उछाल
जनवरी के दौरान वस्तु और सेवा दोनों क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज हुई:
मर्चेंडाइज़ निर्यात: 36.34 अरब डॉलर से बढ़कर 36.56 अरब डॉलर
सेवाओं का निर्यात: 34.75 अरब डॉलर से बढ़कर 43.90 अरब डॉलर
विशेषज्ञों के अनुसार, आईटी, बिज़नेस सेवाओं और डिजिटल सेवाओं की वैश्विक मांग बढ़ने से सेवा निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिली है, जिसने कुल निर्यात को मजबूत आधार दिया।
इसका क्या मतलब है?
निर्यात में वृद्धि आर्थिक गतिविधियों के मजबूत होने का संकेत है।
लेकिन आयात तेजी से बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ सकता है, जो मुद्रा विनिमय दर और चालू खाते के संतुलन पर असर डालता है।
