अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला 2018 का नवंबर 16 से आगाज

अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला 2018 का नवंबर 16 से आगाज

अजमेर. अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला 2018 की तैयारियों जोरों पर है. यह मेला 16 नवंबर से शुरू होकर 23 नवंबर तक चलेगा. देश-विदेश के पर्यटकों और हिन्दू तीर्थयात्रियों के लिए विशेष महत्व रखने वाले इस मेले को लेकर मेला स्थल सजने लगा है. इस बार का अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला कई मायनों में बेहद खास रहने वाला है.

अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला 2018 में इस बार दीपदान का कार्यक्रम वृहद स्तर पर होगा. जिसमें सरोवर के 52 घाटों पर विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से दीपदान होगा. विभिन्न घाटों पर पुख्ता लाइट व्यवस्था की जाएगी। घाट रोशनी से जगमगाएंगे. जिला कलेक्टर आरती डोगरा ने अधिकारियों की बैठक में कहा कि मेला क्षेत्र में रोशनी एवं पीने के पानी की कठिनाई नहीं हो इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की टंकी रखवायी जाए.

पुष्कर में आने वाले विभिन्न मार्गों की पुख्ता मरम्मत हो, पशुओं के लिए डेयरी के माध्यम से चारा व्यवस्था भी करवाने के निर्देश दिए गए. पुष्कर नगर पालिका के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेला क्षेत्र में सफाई का पर्याप्त माकुल इंतजाम रहे. मेला समाप्ति के बाद भी कुण्डों की सफाई आवश्यक रूप से करायी जाए.

मेले के दौरान होंगे रंगारंग कार्यक्रम

पुष्कर मेला 2018 के दौरान जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग, पर्यटन विभाग एवं समस्त संस्थाओं के सहयोग से प्रतिदिन भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. जिसमें स्थानीय प्रतिभाओं को भी पूर्ण मौका मिलेगा. मेले के दौरान 16 नवम्बर को प्रातः 10 बजे पूजा, झण्डारोहण, नगाड़ा वादन, ऊंट सज्जा एवं मेगा कल्चरल ईवेंट का आयोजन से आरम्भ होगा. उसके बाद माण्डना प्रतियोगिता स्कूली छात्राओं द्वारा, समूह नृत्य, चकदे राजस्थान फुटबॉल मैच, शिल्पग्राम हैंडीक्राफ्ट बाजार का आयोजन, दीपदान, रंगोली, महाआरती, पुष्कर अभिषेक के साथ ही शाम 7 बजे नव राज हंस की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं लोकनृत्य की प्रस्तुति होगी.

17 नवम्बर को लंगडी टांग, सितौलिया मैच, ऊंट सज्जा प्रतियोगिता, ऊंट नृत्य प्रतियोगिता, वंदना मिश्रा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति होगी, 18 नवम्बर को कबड्डी मैच, अश्व नृत्य प्रतियोगिता, अन्तर पंचायत समिति ग्रामीण खेलकूद तथा प्रेम जोशुहा द्वारा सांस्कृति कार्यक्रम एवं नाथूलाल जी द्वारा नगाड़ा वादन होगा.

19 नवम्बर को आध्यात्मिक यात्रा, अन्तर पंचायत समिति खेलकूद प्रतियोगिता, महाआरती, गीर एवं क्रॉस ब्रीड पशु प्रदर्शनी का उद्घाटन, वॉयस ऑफ पुष्कर तथा महाकाल ग्रुप द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा, 20 नवम्बर को हारमॉनी मैराथान, लगान स्टाईल क्रिकेट मैच एवं विभिन्न प्रतियोगिताएं, अन्तर पंचायत समिति खेलकूद प्रतियोगिता, महाआरती एवं वॉयस ऑफ पुष्कर फाइनल, सूफी म्यूजिक नाईट का आयोजन होगा.

21 नवम्बर को अन्तर पंचायत समिति ग्रामीण खेलकूद, मटका दौड़, म्यूजिकल चैयर रैस, महाआरती, विदेशी पर्यटकों द्वारा दूल्हा दूल्हन प्रतियोगिता और युग्म बैण्ड द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा. 22 नवम्बर को महाआरती एवं बेस्ट ऑफ राजस्थान सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा. 23 नवम्बर को सुबह 9 बजे से मेगा कल्चरल ईवेंट, पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह, पुष्कर महाआरती का आयोजन होगा.

लोगों को इसलिए लुभाता है अन्तर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला 

अजमेर से 11 किलोमीटर दूर हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पुष्कर है. यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक भी आते हैं. हजारों हिन्दू लोग इस मेले में आते हैं और अपने को पवित्र करने के लिए पुष्कर झील में स्नान करते हैं. भक्तगण और पर्यटक श्री रंग जी एवं अन्य मंदिरों के दर्शन कर आत्मिक लाभ प्राप्त करते हैं.

राज्य प्रशासन भी इस मेले को विशेष महत्व देता है. स्थानीय प्रशासन इस मेले की व्यवस्था करता है एवं कला संस्कृति तथा पर्यटन विभाग इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं. इस समय यहां पर पशु मेला भी आयोजित किया जाता है, जिसमें पशुओं से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम भी किए जाते हैं, जिसमें श्रेष्ठ नस्ल के पशुओं को पुरस्कृत किया जाता है. यहां का पशु मेला मुख्य आकर्षण होता है.

बड़ी संख्या में आते हैं विदेशी सैलानी

भारत में किसी पौराणिक स्थल पर आम तौर पर जिस संख्या में पर्यटक आते हैं, पुष्कर में आने वाले पर्यटकों की संख्या उससे कहीं ज्यादा है. इनमें बडी संख्या विदेशी सैलानियों की है, जिन्हें पुष्कर खास तौर पर पसंद है. हर साल कार्तिक महीने में लगने वाले पुष्कर ऊंट मेले ने तो इस जगह को दुनिया भर में अलग ही पहचान दे दी है.

मेले के समय पुष्कर में कई संस्कृतियों का मिलन सा देखने को मिलता है. एक तरफ तो मेला देखने के लिए विदेशी सैलानी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, तो दूसरी तरफ राजस्थान और आसपास के तमाम इलाकों से आदिवासी और ग्रामीण लोग अपने-अपने पशुओं के साथ मेले में शरीक होने आते हैं.

यह मेला रेत के विशाल मैदान में लगाया जाता है. ढेर सारी कतार की कतार दुकानें, खाने-पीने के स्टाल, सर्कस, झूले और न जाने क्या-क्या. ऊंट मेला और रेगिस्तान की नजदीकी है इसलिए ऊंट तो हर तरफ देखने को मिलते ही हैं.