महाराष्ट्र और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किया सूरजकुंड मेले का उद्घाटन

33वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला के महाराष्ट्र राज्य की थीम और मेजबान हरियाणा

फरीदाबाद. 33वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला के महाराष्ट्र राज्य की थीम और मेजबान हरियाणा की माटी के रिश्ते को उस समय और अधिक मजबूती मिली जब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने पानीपत में मराठा वीरों की याद में बनाए जा रहे युद्ध स्मारक को और अधिक आकर्षित बनाने की घोषणा की. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने इस स्मारक के लिए तीन करोड़ रुपये देने की घोषणा की.

अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पानीपत में जीटी रोड पर चार एकड़ में मराठों की वीरता का इतिहास लाइट एंड साउंड के माध्यम से दर्शाने के लिए एक विशेष स्मारक विकसित करने की घोषणा की. इसका उद्देश्य दोनों प्रदेशों को ऐतिहासिक व सांस्कृतिक रूप से और अधिक नजदीक लाना है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पानीपत के आठ एकड़ में स्थित काला आंब मराठा युद्ध स्मारक स्थल का विस्तार कर इसे 20 एकड़ में करने की घोषणा भी की.

 33वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला के महाराष्ट्र राज्य की थीम और मेजबान हरियाणा

सीएम ने कहा कि इस तरह के मेलों से देश की एकता व अखंडता मजबूत होती है. इस मेले में 31 से ज्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं और हम इसके लिए अन्य देशों को भी निमंत्रण दे रहे हैं. विश्व का संघर्ष, मानवता के लिए खतरा है और इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए हम विश्व में एकता व भाईचारे का संदेश पहुंचा सकते हैं. मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने अखिल भारतीय सांस्कृतिक कला परिषद नई दिल्ली के साथ समझौता किया है, जिसके जरिए हमारे कलाकार भी दूसरे देशों में अपनी सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाने के लिए आगे बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में हरियाणा लगातार तरक्की कर रहा है. कृष्णा सर्किट से हमने कुरुक्षेत्र के आसपास के 48 कोस क्षेत्रों को जोड़ा है. इसके अलावा महेंद्रगढ़ किला व माधोगढ़ किला को भी कृष्णा सर्किट से जोड़़ा गया है. उन्होंने कहा कि हरियाणा में कालका से कलेसर तक पर्यटन की आपार संभावनाएं हैं. इस क्षेत्र को हम पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर रहे हैं. मोरनी में 50 हजार एकड़ में विश्वस्तरीय हर्बल फोरेस्ट विकसित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में हम जातिवाद से ऊपर उठकर हरियाणा एक हरियाणवी एक की भावना से कार्य कर रहे हैं.

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इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि हरियाणा और महाराष्ट्र का माटी और खून का रिश्ता है. यहां महाराष्ट्र के एक लाख से अधिक वीर मराठाओं ने पानीपत की तीसरी लड़ाई में देश को आक्रांताओं से मुक्ति के लिए अपना खून बहाया था. आज लाखों मराठा हरियाणा की धरती को अपनी मातृभूमि बनाकर यहां रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर इस लड़ाई में मराठाओं की जीत होती तो देश पर अंग्रेजों का राज नहीं होता और बहुत पहले ही भारत स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका होगा.

फड़णवीस ने कहा कि दोनों प्रदेशों के सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती के लिए महाराष्ट्र सरकार यथासंभव योगदान करेगी. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि अगले वर्ष के सूरजकुंड मेले में आने वाले आगंतुक यहां के साथ-साथ पानीपत का भी दौरा करें और अपने महान इतिहास के बारे में जानकारी लें.

महाराष्ट्र के सीएम ने सूरजकुंड मेले के लिए इस बार महाराष्ट्र को थीम स्टेट चुनने पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल व पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने कहा कि आज हमने यहां स्मारक के तौर पर छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी रायगढ़ के किले की प्रतिकृति यहां पर स्थापित की है. यह महाराष्ट्र के उस 14 साल के वीर शिवाजी की स्वराज के लिए ली गई शपथ का स्मारक है, जिसने मां भवानी की शपथ लेकर देश को आक्रांताओं से मुक्त करने के लिए देश को प्रेरित किया था. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रामायण महोत्सव की शुरुआत की जा रही है. यही रामायण थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया सहित कई देशों में लोगों की जीवनशैली में शामिल है.

इस मौके पर हरियाणा के पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड मेले को विश्व में आकर्षण का केंद्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है. पिछले वर्ष 25 देशों ने इसमें हिस्सेदारी की थी और 600 स्टाल लगे थे तथा आगंतुकों की संख्या 16 लाख थी. इस बार 31 से ज्यादा देश भागीदारी कर रहे हैं और स्टालों की संख्या भी बढ़ाकर 1400 से ज्यादा कर दी गई है. समारोह को महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल, हरियाणा पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयवर्धन, महाराष्ट्र की पर्यटन सचिव विनिता सिंघल, केंद्रीय पर्यटन सचिव व सूरजकुंड मेला प्राधिकरण चेयरमैन योगेंद्र त्रिपाठी और मेला के पार्टनर देश थाईलैंड के राजदूत ने भी संबोधित किया.

इस अवसर पर हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह, उद्योग मंत्री विपुल गोयल, खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री कर्णदेव कांबोज, सामाजिक न्याय व आधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णदेव कांबोज, विधायक मूलचंद शर्मा, विधायक टेकचंद शर्मा, विधायक सीमा त्रिखा, विधायक प्रेमलता, विधायक असीम गोयल, हरियाणा पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन जगदीश चोपड़ा, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की चेयरमैन कृष्णा गहलावत, हरियाणा अनुसूचित जाति एवं वित्त विकास निगम की चेयरमैन सुनीता दुग्गल, भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा, मंडलायुक्त डॉ. जी अनुपमा, पुलिस आयुक्त संजय कुमार, गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त केके राव, हरियाणा पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक विकास यादव, उपायुक्त अतुल कुमार, एडीसी एवं मेला अधिकारी जितेंद्र कुमार सहित अनेक देशों के राजदूत व प्रतिनिधि मौजूद थे.

पहले दिन महाराष्ट्र की नागपुरी साड़ी की रही धूम

33वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला के महाराष्ट्र राज्य की थीम और मेजबान हरियाणा

फरीदाबाद, 01 फरवरी (हि.स.). 33वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में इस बार 1600 देश विदेश के शिल्पकारों के स्टॉल लगाएं गए हैं. इनमें थीम स्टेट महाराष्ट्र के हस्त शिल्पी इस बार कुछ ज्यादा आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं. मेले के पहले दिन बड़ी चौपाल के पास कोसा शिल्प से बुनी हस्त निर्मित साडियों की स्टॉल पर मेले में देश-विदेश से आए दर्शकों का हुजुम देखने को मिला है. जहां हस्त शिल्पकारों ने स्टॉल पर स्थापित हथकरघे द्वारा निर्मित साडियां सभी के आकर्षण का केंद्र रही. महाराष्ट्र के नागपुर से मेले में विशेष तौर पर अपनी कला का प्रदर्शन करने पहुंचे हस्त शिल्पकार गजानन वासुदेव डिकाटे ने दर्शकों को अपनी कलां की बारीकियों के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी पिछली तीन पीढियां इस कार्य में लगी हुई हैं और उनके द्वारा हाथ से निर्मित साडिय़ों, शॉल व अन्य प्रकार के होजरी सामान की मांग विदेशों तक है. उन्होंने बताया कि वे व उनका परिवार बरसों से इस कार्य को बखूबी करते हुए हस्त शिल्प की प्राचीन संस्कृति और विरासत को संजोए रखने में संजीदगी से भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने कोसा शिल्प की साडि़यों की विशेषता बताते हुए कहा कि इनमें बारिक काशीदा कारी का कार्य हजारों लोगों को रोजगार दे रहा है. महाराष्ट सरकार भी सोसायटी के माध्यम से इन शिल्पकारों को संगठित कर सभी साधन मुहैया करवा रही है. आज हमारे हस्त शिल्प की देश-विदेशों में भारी मांग है.