जे-पाल संस्था की रिपोर्ट, झारखंड में रद्द किए गए राशन कार्डों में से 88 फीसदी वैध जानिए क्या था ये पूरा मामला

जे-पाल संस्था की रिपोर्ट, झारखंड में रद्द किए गए राशन कार्डों में से 88 फीसदी वैध - Panchayat Times

नई दिल्ली/रांची. पिछले दिनों राज्य के 24 में से 10 जिलों (132 ब्लाक/तहसील) में अब्दुल लतीफ जमील गरीबी एक्शन लैब (जे-पाल) द्वारा किये गए एक सीमित अध्ययन (Survey) में पाया कि राज्य सरकार द्वारा तीन साल पहले रद्द किए गए 88 प्रतिशत राशन कार्ड वास्तविक (Original) घरों के थे. रद्द किए गए कार्डों में से केवल 12% या नकली (Fake) लाभार्थियों के थे.

“अर्थशास्त्रियों कार्तिक मुरलीधरन, पॉल निहास और संदीप सुखतंकर द्वारा राज्य के 10 जिलों में 2016 और 2018 के बीच राशन कार्डों को हटाने का अध्ययन किया गया है.

अध्ययन में ये भी दावा किया गया है कि 2017 में, झारखंड में संबंधित परिवारों को सूचित किए बिना भी लाखों राशन कार्ड हटा दिए गए थे.

तत्कालीन सरकार का दावा था कि अधिकांश कार्ड “नकली” थे, इस बारे में कहता है अध्ययन

27 मार्च, 2017 की पिछली सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए का हवाला देते हुए कहा था की “सभी राशन कार्ड जिन्हें आधार नम्बर के साथ नहीं जोड़ा गया है, वे 5 अप्रैल 2017 से मान्य नही होंगे. जिससे राज्य के इन 10 जिलों में लगभग तीन लाख राशन कार्ड अमान्य हो गए थे. “

22 सितंबर, 2017 को तत्कालीन राज्य सरकार ने एक पुस्तिका (Booklet) में कहा था कि, “आधार नंबरों के साथ राशन कार्डों का काम शुरू हो गया है. इस प्रक्रिया में 11.64 लाख नकली राशन कार्ड पाए गए हैं. “इसके माध्यम से एक वर्ष में राज्य सरकार ने 225 करोड़ रुपये की बचत की है जो अब गरीब लोगों के विकास के लिए उपयोग किया जा सकता है. 99 प्रतिशत राशन कार्ड आधार के साथ जोड़ दिए गए हैं.”

जे-पाल संस्था की रिपोर्ट, झारखंड में रद्द किए गए राशन कार्डों में से 88 फीसदी वैध - Panchayat Times

जिन 10 जिलों को इस अध्ययन के लिए चुना गया था उनमें कुल 2,449,610 राशन कार्ड थे – जिनमें से 144,161 या 5.9% को रद्द कर दिया गया था. झारखंड में राशन कार्डों को रद्द करने की प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई और 2018 में संपन्न हुई.

अगर वास्तविक लोगों के पास कार्ड नहीं, तो उनके नाम किए जाएंगे शामिल – मंत्री रामेश्वर उरांव

झारखंड के नियोजन, वित्त, खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा है कि “डुप्लीकेट कार्डों” को रद्द करने के लिए सत्यापन कार्य जारी है, और अगर वास्तविक लोगों के पास कार्ड नहीं है, तो उनके नाम शामिल किए जाएंगे “सत्यापन चल रहा है. लगभग पांच लाख संदिग्ध राशन कार्ड और कई डुप्लिकेट कार्ड हैं जिनका उपयोग कभी भी खाद्यान्न खरीदने के लिए नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा, “राशन कार्ड सूची में उन लोगों के नाम शामिल किए जाएंगे, जिनके राशन कार्ड रद्द कर दिए गए थे, जिनके असली कार्ड रद्द कर दिए गए थे. खाद्य सुरक्षा अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाएगा.”