जयपुर मेट्रो गुजर रही है मंदी के दौर से, इससे उबारने के लिए बनी योजना

जयपुर मेट्रो गुजर रही है मंदी के दौर से, इससे उबारने बनी योजना -Panchayat Times
प्रतीक चित्र

जयपुर. जयपुर मेट्रो को मंदी से उबारने के लिए योजना शुरू हो चुकी है. जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन स्टेशनों पर खुदरा दुकानों और मेगा स्टोरों को किराए पर देने का प्रस्ताव बना रही है. वहीं मेट्रो में विज्ञापन के लिए दी जाने वाली साइटें और बाकी रिक्त स्थानों पर दरें कम कर निवेशकों को आकर्षित किया गया है.

मानसरोवर मेट्रो स्टेशन में निविदाओं के संबंध में बैठक का आयोजन मंगलवार को किया गया. मेट्रो लगातार मंदी के दौर में है. विज्ञापन साइट पर कोई बड़ा राजस्व नहीं मिल पाया है. बल्कि मेट्रो का खर्च तक नहीं निकल पाया है. अभी भी आधी साइट खाली है. जानकारी के अनुसार मानसरोवर मेट्रो स्टेशन 350 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से सात स्थान उपलब्ध कराएगा. लीज़ देने की अधिकतम अवधि भी 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है.

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वॉलसिटी के लिए भी योजना तैयार

नए विकसित मेट्रो स्पेस से राजस्व अर्जित करने के लिए प्लान तैयार है. इससे पहले निगम खुदरा दुकानों के लिए बड़े और छोटे स्थानों को पट्टे पर देने के बाद प्रति वर्ष आठ करोड़ रुपए कमाने की उम्मीद कर रहा था. विभाग के सूत्रों के अनुसार जेएमआरसी अतिरिक्त गैरपरिचालन राजस्व अर्जित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है.

टिकटों की बिक्री से नहीं निकल पा रहा वेतन भी

सूत्रों के अनुसार टिकटों की बिक्री से होने वाली आय मेट्रो के संचालन और रखरखाव के लिए अपर्याप्त है. 2018 में जारी सीएजी रिपोर्ट बताया गया कि जयपुर मेट्रो के फेज -1 का प्रदर्शन खराब था. क्योंकि ऑपरेशन के पहले 22 महीनों के दौरान औसत यात्री सवार होने का अनुमान 19.17 प्रतिशत अनुमानित था जो लगातार नीचे आता गया. इस दौरान 18.87 करोड़ रुपए के परिचालन राजस्व के साथ जेएमआरसी पहले 22 महीनों के लिए 85.56 करोड़ रुपए के परिचालन खर्च को पूरा करने में असमर्थ था. 2015-17 के दौरान जेएमआरसी केवल 16.34 प्रतिशत राजस्व गैर स्त्रोत से प्राप्त कर पाई.  रिपोर्ट में कहा गया है कि वह न तो आवंटित मेट्रो पार्कों का व्यावसायिक उपयोग कर पाए और न ही नौ मेट्रो स्टेशनों के उपलब्ध क्षेत्र को पट्टे पर दे पाए.