नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को संसद से मंजूरी मिलने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक भारत में भरोसे पर आधारित प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करेगा और नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। प्रधानमंत्री ने इसे ‘Ease of Living’ और ‘Ease of Doing Business’ के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
PM मोदी बोले- पुराने और गैरजरूरी नियमों का दौर अब खत्म
X पर पोस्ट कर कहा- बिल से मुकदमों का बोझ घटेगा और मामलों का निपटारा होगा तेज प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा कि जन विश्वास बिल 2026 का पारित होना उन पुराने और अप्रासंगिक नियमों के अंत का संकेत है, जो लंबे समय से व्यवस्था पर बोझ बने हुए थे। उन्होंने कहा कि यह विधेयक Decriminalisation यानी छोटे-मोटे अपराधों को आपराधिक श्रेणी से बाहर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे मुकदमों का बोझ कम होगा और मामलों के निपटारे की रफ्तार तेज होगी।
प्रधानमंत्री ने लिखा,
“यह ‘Ease of Living’ और ‘Ease of Doing Business’ के लिए बड़ा बूस्ट है।” PM मोदी ने बिल के ड्राफ्टिंग प्रोसेस की भी सराहना की कहा- परामर्श आधारित तरीके से तैयार किया गया यह विधेयक प्रधानमंत्री ने इस विधेयक को तैयार करने की प्रक्रिया की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह बिल परामर्श आधारित (Consultative Approach) तरीके से तैयार किया गया है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक है।
उन्होंने उन सभी लोगों को बधाई दी, जिन्होंने इस विधेयक के मसौदे को तैयार करने में अपने सुझाव दिए और संसद में इसका समर्थन किया।
राज्यसभा ने वॉइस वोट से पारित किया जन विश्वास बिल 2026
लोकसभा से एक दिन पहले मिल चुकी थी मंजूरी जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को राज्यसभा ने गुरुवार को वॉइस वोट से पारित कर दिया। इससे पहले इसे बुधवार को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी थी। इस तरह अब यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है।
57 प्रावधानों में जेल की सजा खत्म, 158 में जुर्माना हटाने का प्रस्ताव
कई मामलों में सजा घटेगी, कई जगह जेल और जुर्माने की जगह केवल पेनल्टी इस विधेयक के तहत 57 प्रावधानों में जेल की सजा हटाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 158 प्रावधानों में जुर्माना समाप्त करने की बात कही गई है। साथ ही, 17 प्रावधानों में कारावास की अवधि कम करने और 113 प्रावधानों में जेल और जुर्माने को केवल पेनल्टी में बदलने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इससे साफ है कि सरकार छोटी तकनीकी या प्रक्रियागत चूकों को आपराधिक मामला बनाने के बजाय प्रशासनिक और सिविल कार्रवाई के दायरे में लाना चाहती है।
79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव
RBI Act, Insurance Laws, PFRDA Act, Motor Vehicles Act और NDMC Act भी शामिल यह विधेयक 79 केंद्रीय कानूनों (Central Enactments) में संशोधन का प्रस्ताव रखता है। इनमें Reserve Bank of India (RBI) Act, 1934, Insurance Acts, Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA) Act, Motor Vehicles Act, 1988 और New Delhi Municipal Council (NDMC) Act, 1994 जैसे अहम कानून शामिल हैं।
इसके अलावा 67 संशोधन खास तौर पर Ease of Living को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित किए गए हैं।
1000 से ज्यादा अपराधों को तर्कसंगत बनाने की दिशा में बड़ा कदम
छोटे उल्लंघनों पर पहले चेतावनी, दोबारा गलती पर पेनल्टी का प्रावधान विधेयक के Statement of Objects and Reasons के अनुसार, इसका मकसद व्यापार और आम नागरिकों पर अनुपालन (Compliance) का बोझ कम करना है। इस बिल के जरिए 1000 से ज्यादा अपराधों/उल्लंघनों को तर्कसंगत (Rationalise) करने की कोशिश की गई है। इसमें प्रस्ताव है कि पहली बार उल्लंघन होने पर चेतावनी (Warning) दी जाए, जबकि दोबारा उल्लंघन पर पेनल्टी लगाई जाए। यह व्यवस्था नियामक माहौल (Regulatory Environment) को सरल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
सरकार का फोकस: कम मुकदमे, ज्यादा भरोसा और आसान व्यवस्था
व्यापार, प्रशासन और आम नागरिकों के लिए राहत का दावा जन विश्वास बिल 2026 को सरकार व्यापार, निवेश, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुविधा से जोड़कर देख रही है। सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी घटेगी, सरकारी प्रक्रियाएं आसान होंगी और लोगों तथा संस्थाओं के बीच भरोसा बढ़ेगा। यह बिल आने वाले समय में भारत के Regulatory Reform Agenda का अहम हिस्सा माना जा सकता है।