जनजाति सुरक्षा मंच झारखंड सरकार से कर रही है ये मांग

रांची. जनजाति सुरक्षा मंच 15 सितंबर को करेगा मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी. प्रांत संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि आजादी के पूर्व अंग्रेजों कि ओर से स्थापित चर्चों की आड़ में जनजाति समाज का धर्मांतरण कर हमारी पहचान मिटाने की चेष्टा की जा रही थी. आजादी के 72 वर्ष बाद भी जनजाति आदिवासी समाज की पहचान एवं अस्तित्व को मिटाने का कार्य आज भी जारी है. ईसाई मिशनरी झारखंड में जनजाति समाज की लाखों की जमीन पर स्कूल एवं अस्पताल के नाम पर हजारों चर्चो के निर्माण कर चुके हैं. ये सभी चर्च हमारे भाई बंधुओं के धर्मांन्तरित कर ईसाई बनाने में लगे हुए है.

विदेशी ईसाई धर्म अपनाते ही जनजाति समाज के रीति-रिवाज, पूजा, परंपरा और संस्कृति समाप्त हो जाती है, धर्मान्तरित ईसाई अनुसूचित जनजाति के आधार पर जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर हजारों-हजार नौकरियां प्राप्त कर चुके हैं. आज से 45 वर्ष पूर्व स्वयं कार्तिक उरांव ने इसका विरोध किया था, उन्होंने राज्य सरकार से मांग करते कहा कि ग्राम सभा के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर जन जाति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जाए, उन्हें अल्पसंख्यक जाति घोषित करें जनजाति जनजातियों की पुरानी रीति रिवाज पूजा को मनाने वाले को ही अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण पत्र दिया जाए.

झारखंड सरकार से मांग

माता-पिता एवं संतान अगर जनजाति धार्मिक आस्था एवं रूढ़िवादी परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं तो उन्हें संतान को जनजाति का दिया जाए. विवाह के बाद महिला के पति के धर्मांतरण रोड सामाजिक आस्था के आधार पर विवाहिता को जनजाति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराया जाए, विवाहिता महिला को पिता के आधार पर नहीं, धर्मांतरित जनजाति को जनजाति आरक्षण से वंचित किया जाये. पेशा कानून के तहत ग्राम प्रधान, मुखिया, प्रखंड प्रमुख से जिला परिषद अध्यक्ष पद मूल जनजाति धर्म आस्था रीति रिवाज उड़ने वाले जनजाति के लिए आरक्षित है. लेकिन झारखंड में इसकी अवहेलना की जा रही है. इसकी जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए.
सीएनटी और एसपीटी एक्ट विद्यालय अस्पताल का निर्माण किया गया है, एक्ट का उल्लंघन किया गया है, इन सबकी उच्चस्तरीय जांच करा कर मालिकाना हक दिलाया जाए.