झारखंड विधानसभा में अनुपूरक बजट पास

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सदन ने चालू वित्तीय वर्ष
फाइल फोटो

रांची. झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सदन ने चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 का तृतीय अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पारित कर दिया. सदन ने भोजनावकाश के बाद 2239 करोड़ 82 लाख रुपये के तीसरे अनुपूरक बजट को ध्वनि मत से मंजूरी प्रदान कर दी. कांग्रेस के सुखदेव भगत के कटौती के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया गया. इसके बाद सभा की कार्यवाही मंगलवार 11 बजे दिन तक के लिए स्थगित कर दी गयी.

इससे पहले सदन में आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 को पेश किया गया. विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि राज्य में वर्ष 2015-16 में उत्पन्न सूखे के बाद अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार के साथ उच्च विकास दर का दौर शुरू हुआ. पिछले तीन वर्षों की औसत विकास दर 8.2 प्रतिशत रही. पिछले वर्ष 6.7 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई और वर्तमान वित्तीय वर्ष में 6.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है. सर्वेक्षण में बताया गया है कि राज्य की अर्थव्यवस्था के विकास में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है. राज्य में फसल, पशुधन और मत्स्य क्षेत्र को एक साथ लें तो इसका हिस्सा 11 प्रतिशत रहा है. अनाज की निरंतर आपूर्ति और सहज उपलब्धता सुनिश्चित कराना खाद्य आपूर्ति विभाग का प्रमुख कार्य है, इस दिशा में भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. उद्योग के क्षेत्र में भी तरक्की हुई है.

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वर्ष 2017- 18 में औद्योगिक विकास दर 5.58 प्रतिशत थी जबकि वर्ष 2018 -19 में बढ़कर 5.64 प्रतिशत हो गई. इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक गुणात्मक सुधार हुआ है. उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात राष्ट्रीय औसत से कम है लेकिन इसमें सुधार हुआ है. वर्ष 2010 -11 में 7.5 प्रतिशत से बढ़कर 17-18 में 18 प्रतिशत हो गया.

स्वास्थ्य में भी विगत वर्षों में व्यापक सुधार हुए हैं. स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या में वृद्धि, कुपोषण और मृत्यु दर में कमी के प्रयासों में सफलता हासिल हुई. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में जब स्वच्छता सर्वेक्षण आरंभ किया गया, तब झारखंड को बहुत कम अंक मिले और यह रैकिंग में निचले हिस्से में रहा लेकिन पिछले वर्ष झारखंड तीसरे स्थान पर रहा. पेयजल-स्वच्छता विभाग के अनुसार गांवों में बसने वाले केवल 30 प्रतिशत लोगों को आंशिक रूप से पेयजल मिल पाता है, फिर भी सरकार के निरंतर प्रयासों और सामुदायिक सहभागिता के वांछित परिणाम आने लगे है. वर्ष 2018 में नंदी महोत्सव और वृहद-वृक्षारोण अभियान के अंतर्गत नौ लाख पौधे लगाये गये.