नई दिल्ली. झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि ग्रामीण इलाकों में झारखंड पंचायती राज अधिनियम को झारखंड क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण अधिनियम पर प्राथमिकता मिलेगी। अदालत ने माना कि दोनों कानूनों में बुनियादी और ‘असमाधेय’ टकराव है, ऐसे में Panchayati Raj Act प्रबल माना जाएगा।
कोर्ट ने साफ किया कि Regional Development Authority Act की जो प्रावधान Panchayati Raj Act से असंगत हैं, वे “inconsistency के दायरे में आते हैं और उसी सीमा तक स्वतः निरस्त (impliedly repealed)” माने जाएंगे। इसी आधार पर कोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में जारी किए गए ध्वस्तीकरण (demolition) आदेशों को रद्द कर दिया।
ग्रामीण स्वशासन को मिलेगी मजबूती
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि उपयोग, निर्माण अनुमति और विकास से जुड़े अधिकार अब स्पष्ट रूप से Panchayati Raj संस्थाओं के पास रहेंगे। इसका मतलब है कि—
ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण से संबंधित अनुमति
स्थानीय विकास योजनाएं
पंचायत स्तर पर किए जाने वाले अनुशासनात्मक व प्रशासनिक निर्णय
इन सभी में Panchayati Raj Act की भूमिका सर्वोपरि होगी।
विकास प्राधिकरण के आदेश क्यों हुए रद्द?
मामले में Development Authority द्वारा कुछ निर्माणों को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए गए थे। प्रभावित पक्षों ने दलील दी कि—
संबंधित भूमि ग्रामीण क्षेत्र में आती है,
ऐसे मामलों में Development Authority का अधिकार क्षेत्र नहीं बनता,
Panchayati Raj Act के तहत ग्राम पंचायत ही अनुमोदन देने वाली संस्था है।
कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकारते हुए कहा कि जब दो कानूनों में टकराव हो और उन्हें साथ पढ़ना संभव न हो, तब नया व विशिष्ट कानून (special law) प्राथमिकता पाता है—यहाँ Panchayati Raj Act वही भूमिका निभाता है।
निर्णय का व्यापक प्रभाव
इस फैसले से—
भविष्य में ग्रामीण इलाकों में निर्माण से जुड़े विवाद कम होंगे,
Panchayat और Development Authorities के अधिकार क्षेत्र में स्पष्टता आएगी,
ग्रामीण प्रशासन और लोकल प्लानिंग को मजबूत आधार मिलेगा।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह निर्णय राज्य में ग्रामीण स्वशासन को बढ़ावा देगा और विकास प्राधिकरणों को अपने कार्यक्षेत्र की पुनर्परिभाषा करनी होगी।
