नई दिल्ली. झारखंड में हुए दर्दनाक विमान हादसे में सात लोगों की जान चली गई। इस दुर्घटना में एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज, उसके परिवार के दो सदस्य, एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक और दो युवा पायलट शामिल थे।
एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया जा रहा था मरीज
41 वर्षीय संजय कुमार को 16 फरवरी को झारखंड के लातेहार स्थित अपने रेस्टोरेंट में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में 60-65 प्रतिशत तक जलने के बाद रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के सीईओ डॉ. अनंत सिन्हा ने बताया कि इतनी गंभीर जलन की स्थिति में मरीज के बचने की संभावना 50-50 रहती है। परिवार को बताया गया था कि इलाज में कम से कम तीन हफ्ते लगेंगे।
परिवार बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के गंगा राम अस्पताल ले जाना चाहता था। सड़क मार्ग से 15-16 घंटे लगने की आशंका के कारण एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। इसके लिए परिवार ने रिश्तेदारों की मदद से 8 लाख रुपये जुटाए।
लेकिन सोमवार शाम रांची से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद विमान झारखंड के चतरा जिले के घने जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
परिवार के तीन सदस्यों की मौत
विमान में संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना देवी (35) और भांजा ध्रुव कुमार (17) सवार थे। इस हादसे में तीनों की जान चली गई। संजय और अर्चना अपने पीछे आठ साल के बेटे को छोड़ गए हैं।
समर्पित डॉक्टर की मौत
विमान में 32 वर्षीय डॉ. विकास कुमार गुप्ता भी थे, जो मरीज के साथ रांची से दिल्ली जा रहे थे। उन्होंने 2015 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और रांची में कार्यरत थे। वे अपनी पत्नी और आठ वर्षीय बेटे के साथ रहते थे। उनके पिता ने कहा कि वे बेहद मेहनती और समर्पित डॉक्टर थे।
परिवार का इकलौता कमाने वाला
22 वर्षीय पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा भी हादसे का शिकार हुए। वे लगभग डेढ़ साल से मेडिकल एविएशन कंपनी के साथ काम कर रहे थे और देशभर में मरीजों को एयर एंबुलेंस से ले जाने का काम करते थे। वे परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके बड़े भाई ने बताया कि सचिन ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय परीक्षा पास की थी, जिसका परिणाम हादसे के अगले दिन आना था।
दो युवा पायलटों की भी गई जान
27 वर्षीय पायलट विवेक विकास भगत ने कानपुर में चार साल की एविएशन ट्रेनिंग ली थी और दक्षिण अफ्रीका से टाइप रेटिंग कोर्स किया था। सितंबर 2022 से वे पेशेवर रूप से उड़ान भर रहे थे। उनके पिता ने बताया कि उन्होंने सभी पांच अनिवार्य पायलट परीक्षाएं एक ही प्रयास में पास की थीं।
दूसरे पायलट 30 वर्षीय सवराजदीप सिंह अमृतसर के गोविंद नगर क्षेत्र के निवासी थे। वे अपने पीछे पत्नी, तीन महीने का बेटा, माता-पिता और भाई को छोड़ गए हैं। उनके घर में मातम का माहौल है।
बचाव अभियान
चतरा के जिला अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना की सूचना सोमवार रात करीब 9 बजे मिली। हादसे की जगह घने और खतरनाक जंगल में थी, जहां एंबुलेंस नहीं पहुंच सकीं। छोटे वाहनों की मदद से पूरी रात बचाव अभियान चलाया गया। सुबह करीब 6:30 बजे तक सभी सात शव बरामद कर लिए गए। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने अस्पताल पहुंचकर अधिकारियों और परिजनों से मुलाकात की और घटना की विस्तृत जांच का आश्वासन दिया।
यह हादसा एक ऐसे परिवार की त्रासदी बन गया, जिसने अपने प्रियजन की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया।
