लगातार चौथे साल भी राजपथ पर नहीं दिखेगी झारखंड की झांकी

लगातार चौथे साल भी राजपथ पर नहीं दिखेगी झारखंड की झांकी

रांची. मांदर की थाप और नगाड़ों की गूंज और करमा के गीतों पर थिरकते युवक-युवतियों की टोली. लेकिन, अफसोस कि इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली के राजपथ पर झारखंड की कला और संस्कृति की झलक नहीं दिखेगी. इसकी वजह गणतंत्र दिवस की झांकी के लिए झारखंड की तरफ से भेजे गए मॉडल प्रस्ताव को केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की तरफ से बनाई गई एक्सप‌र्ट्स कमेटी ने खारिज कर दिया है.

राजपथ की परेड में झारखंड का डोकरा आर्ट

यह लगातार चौथा साल है जब झारखंड गणतंत्र दिवस की परेड में झारखंड की झांकी को नकार दिया गया है. अंतिम वर्ष 2015 में गणतंत्र दिवस पर झारखंड की झांकी, जो दुमका के मलुटी मंदिर की थीम पर आधारित थी उसको शामिल किया गया था. सबसे बड़ी बात यह थी कि उस समय झारखंड की इस झांकी को पूरे देश में दूसरा स्थान भी मिला था.

राजपथ की परेड में झारखंड के टाना भगत

झारखंड बनने के बाद 18 सालों में सिर्फ चार बार ही दिखी झारखंड की झांकी

झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद अबतक चार बार ही झारखंड की झांकी नई दिल्ली के राजपथ पर दिखी है. इसमें 2004, 2007, 2013 और 2015 की झांकी शामिल थी. 2004 की झांकी में झारखंड के टाना भगत का दिखाया गया था. वहीं साल 2007 की झांकी में झारखंड के प्रकृति पर्व सरहुल की थीम पर आधारित झांकी को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया गया था. वर्ष 2013 में झारखंड का डोकरा आर्ट को झांकी को शामिल किया गया था. वर्ष 2015 में गणतंत्र दिवस पर झारखंड की झांकी में दुमका जिले में स्थित मलूटी में 17 वीं शताब्दी के 76 टेरा कोटा मंदिर को दिखाया गया था.

राजपथ की परेड में झारखंड का प्रकृति पर्व सरहुल

ऐसे होता है झांकियों का चयन

हर साल 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली के राजपथ पर विभिन्न राज्यों को अपनी कला, संस्कृति और विकास को झांकी के माध्यम से दिखाने का मौका मिलता है. लेकिन, झांकी में शामिल होने के लिए रक्षा मंत्रालय की ओर से बनाई गई झांकी सेलेक्शन व एक्सपर्ट कमिटी के सामने तमाम राज्यों को प्रजेंटेशन देना होता है. सेलेक्शन कमिटी के अप्रूवल के बाद ही किसी भी झांकी को रिपब्लिक डे में शामिल होने का मौका मिलता है.

साल 2019 की गणतंत्र दिवस की परेड में झांकियों के चयन के लिए रक्षा मंत्रालय ने जो विशेषज्ञ एक्सप‌र्ट्स कमेटी बनाई है. यही कमिटी ही झांकियों को फाइनल अप्रूवल दी है. इसी कमिटी के सामने झारखंड की झांकी का प्रजेंटेशन दिया था लेकिन एक्सप‌र्ट्स ने झारखंड की झांकी को मंजूरी नहीं दी है.