राजस्थान विधानसभा चुनाव विशेष: जोधपुर संभाग में बारिश कम, राजनीति ज्यादा

जोधपुर. विधानसभा चुनाव अब लगभग सिर पर है. बात मारवाड़ की राजनीति...
प्रतीक चित्र

जयपुर. राजस्थान विधानसभा चुनाव का बिगुल भले ही अभी नहीं बजा है लेकिन पार्टियों ने चुनाव प्रचार करना शुरू कर दिया है. रैली और यात्रा के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिश सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से हो रही हैं. राजस्थान में सबसे बड़ा संभाग है जोधपुर, जिसमें छह जिले शामिल हैं. इस इलाके में वर्षा सबसे कम होती है पर यहां राजनीति बहुत गर्म रहती है. राजस्थान विधानसभा 2018 का किला फतह करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने अभी से इस क्षेत्र में फोकस करना शुरू कर दिया है.

राजस्थान गौरव यात्रा के दौरान जैसलमेर की जनसभा में मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी राजस्थान गौरव यात्रा को लेकर जैसलमेर पहुंच चुकी हैं. जहां उन्होंने क्षेत्र के लोगों का दिल जीतने की भरपूर कोशिश की. मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कई सारे लुभावने वादे कर लोगों से समर्थन मांगा.
जोधपुर संभाग की जनता ने भाजपा को 2013 में खूब मालामाल भी किया. इस इलाके से 33 विधानसभा सीटों में भाजपा को 30 सीटें मिली. वहीं, इस संभाग से कांग्रेस केवल पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीट सहित तीन ही सीटें जीत पाई थी.

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राजस्थान में सबसे बड़ा संभाग है जोधपुर जिसमें छह जिले - Panchayat Times
जोधपुर

गौरव यात्रा पर निकली मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मारवाड़ में गहलोत फैक्टर को ध्यान में रख अपनी रणनीति तय कर रही हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उनकी इस क्षेत्र की राजनीति पर बहुत मजबूत पकड़ मानी जाती है. उन्हें मारवाड़ के गांधी के नाम से ख्याति मिली हुई है. गहलोत के मजबूत राजनीतिक कद को चुनौती देने वाला एक भी क्षेत्रीय नेता भाजपा के पास इस क्षेत्र में मौजूद नहीं है.

क्या है मारवाड़ फैक्टर

जोधपुर संभाग में जोधपुर, पाली, जालोर, सिरोही, बाड़मेर और जैसलमेर जिले आते है. मारवाड़ के नजरिये से देखे तो नागौर की दस सीटें हैं. इनमें से नौ सीटों पर भाजपा के विधायक हैं. कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले इस क्षेत्र में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद केंद्र ने यहां के तीन सांसद को केंद्र में मंत्री बनाया. वहीं, राज्य सरकार में छह मंत्री मारवाड़ के हैं.

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पिछले चुनाव में मारवाड़ के जाट, राजपूत, विश्नोई और मेघवाल समाज ने खुलकर भाजपा का साथ दिया था, लेकिन अब गणित बदल भी सकता है. क्योंकि हाल के दिनों में कुछ समुदायों की तरफ से भाजपा के प्रति नाराजगी देखी गई है. पर चुनाव के समय क्या होगा ये देखने वाली बात होगी कि क्या भाजपा अपने वोट बैंक को बरकरार रख पाएगी या फिर से कांग्रेस का पुराना वोटर कांग्रेस को वोट देगा.

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पूर्व महारानी रासेश्वरी राज्यलक्ष्मी

वहीं, इस बीच जैसलमेर ने राजस्थान की राजनीति में हलचल बढ़ा दी. कारण बनी हैं पूर्व महारानी रासेश्वरी राज्यलक्ष्मी. जिन्होंने आने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव में जैसलमर से लड़ने का मन बना लिया है. अब कांग्रेस और भाजपा को समझ नहीं आ रहा है कि महारानी किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगी.