जुब्बल-कोटखाई

पृष्ठभूमि :-

जुब्बल-कोटखाई विधानसभा शिमला जिले में शिमला लोकसभा के अंतर्गत आने वाली विधानसभा है. यह हिमाचल प्रदेश विधानसभा की 68 सीटों में सीट संख्या 65 है. शिमला जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है. 2012 में इस क्षेत्र में कुल 61, 657 मतदाता थे. जिनकी संख्या बढकर 67,194हो गयी है. 2012 की विधानसभा में रोहित ठाकुर इस क्षेत्र से विधायक चुने गए.  राजनैतिक तौर पर देखा जाये तो जुब्बल-कोटखाई में कांग्रेस पार्टी का ही वर्चस्व रहा है.

शिमला जुब्बल-कोटखाई से लगभग 36.3 किलोमीटर दूर स्थित है. दोनों कस्बों जुब्बल और कोटखाई सेब के समृद्ध क्षेत्र हैं. यह कोटखाई में सबसे अधिक प्रचलित गांव है. यह स्थान हिमाचल प्रदेश की प्राचीन विरासत का हिस्सा है और रॉयल किंग्स हाउस के लिए जाना जाता है.जुब्बल राज्य का इतिहास 12वीं शताब्दी तक चला जाता है सतलज, पबबार और गिरि के घाटियों में स्थित 18 ठाकुरों में यह ठकुराई के लिए काफी प्रसिद्ध था. जुब्बल के शासक राठौड़ कबीले से संबंधित हैं. जुब्बल चमकदार नदियों, स्पार्कलिंग झीलें और कुशलता से निर्मित मंदिरों की महिमा के लिए जाना जाता है. कसुम्पटी 1,883 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह केलती महल और इसके सेब के बगीचों के लिए जाना जाता है. यह हिमाचल प्रदेश में सबसे बड़ी सेब की उभरती हुये घाटियों में से एक है और राज्य की प्रति व्यक्ति आय में इन चाय बागानों का महत्वपूर्ण योगदान है.

विधानसभा : संक्षिप्त जानकारी

विधानसभा सं. 65
सीट की प्रकृति सामान्य
प्रमुख बोलियां जुब्बल-कोटखाई की सरकारी भाषा हिंदी है किन्तु यहाँ के लोग संचार के लिए हिंदी और पहाड़ी भाषा का भी इस्तेमाल करते हैं.

पिछले चुनावों में विधानसभा की स्थिति

विधानसभा चुनाव/साल 2012 विधानसभा
जुब्बल-कोटखाई पार्टी कांग्रेस भाजपा अन्य
वोट प्रतिशत 57.55% 39.64% 2.81%

2012 विधानसभा चुनाव:

उम्मीदवार पार्टी कुल मत
रोहित ठाकुर कांग्रेस 29219
नरिन्दर ब्राग्टा बीजेपी 20124

जुब्बल-कोटखाई से अभी तक चुने गये विधायक

विधायक पार्टी वर्ष
रोहित ठाकुर कांग्रेस 2012
नरेंद्र ब्राग्टा भाजपा 2007
रोहित ठाकुर कांग्रेस 2003
राम लाल कांग्रेस 1998
राम लाल कांग्रेस 1993
राम लाल जनता पार्टी 1990
वीरभद्र सिंह कांग्रेस 1985
राम लाल कांग्रेस 1982
राम लाल कांग्रेस 1977

मतदाताओं की संख्या

विधानसभा (2017) आम निर्वाचक अप्रवासी भारतीय निर्वाचक
स.न. नाम पुरुष महिला अन्य कुल पुरुष महिला समस्त

योग (6+7+8)

1 2 3 4 5 6 7 8 9
1 जुब्बल-कोटखाई 33543 33651 0 67194 0 0 67194
विधानसभा (2012) आम निर्वाचक अप्रवासी भारतीय सर्विस एलेक्टोर्स
स.न. नाम पुरुष महिला अन्य कुल पु. म. अन्य कुल पु. म. कुल समस्त
योग (6+10+13)
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14
1 जुब्बल-कोटखाई 31206 30188 0 61394 0 0 0 0 168 95 263 61, 657
प्रमुख नेता

वर्तमान में रोहित ठाकुर यहाँ कांग्रेस से विधायक हैं. इससे पहले वह 2003 की विधानसभा में चुने जा चुके हैं. रोहित ठाकुर के दादा राम लाल ठाकुर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा इस सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं. जुब्बल-कोटखाई को हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री देने का गौरव हासिल है. दिवंगत ठाकुर राम लाल  1977 व 1982 की विधानसभा में यहाँ से चुने गए उसके बाद 1990 से लेकर 1998 की विधानसभा में लगातार तीन बार यहाँ से विधायक चुने गए. राम लाल 1975 से 1977 के बीच मुख्यमंत्री थे और फिर से 1980 से 1982 तक. वर्तमान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कांग्रेस से 1985 में इस सीट से विधायक चुने गए थे.

उम्मीदवार 2017
विधानसभा में सम्भावित प्रत्याशी / उम्मीदवार
प्रमुखनेता भाजपा कांग्रेस अन्य
1. नरेंद्र ब्राग्टा रोहित ठाकुर

वर्तमान स्थिति :

यह सीट कांग्रेस के दबदबे की सीट कही जा सकती है. इस सीट से 2007 में ही एक बार भाजपा जीतने में सफल हुई लेकिन अगले ही चुनाव में रोहित ठाकुर ने मंत्री रह चुके नरेंद्र बगरोटा को लगभग नौ हज़ार मतों से पराजित किया. रोहित ठाकुर की लोकप्रियता इस क्षेत्र में काफी है लेकिन यह क्षेत्र गुडिया-प्रकरण के कारण काफी विवादों में रहा जिसने वीरभद्र सरकार की खूब किरकिरी कराई.

Chaupal

बूथों की संख्या: 127

पिछली विधानसभा में महिला पुरुष के मतों का %

  • पुरुष
  • महिला

पिछली विधानसभा में पार्टियों की स्थिति

  • कांग्रेस
  • भाजपा
  • अन्य

प्रमुख मुद्दे

आपकी विधान सभा की प्रमुख समस्यायें आपकी विधानसभा के लोगों के सपनें (माँगें / उम्मीदें)
1. इलाके का सबसे प्रमुख मुद्दा गुड़िया को मिलने वाला इन्साफ होगा. पुलिस तो कुछ नहीं कर सकी लेकिन अब सीबीआई भी पूरी तरह लाचार दिख रही है. प्रोसेसिंग प्लांट को साढ़े 17 करोड़ स्वीकृत थे, जो कहीं और जाकर खर्च किए गए.
2. किसानों की फसलों का नुकसान हमेशा होता रहता है लेकिन मुवावजे की कोई व्यवस्था नहीं होती इंजीनियरिंग गुम्मा में पहले पांच ग्रेड थे, अब दो रह गए हैं.
3. ओलावृष्टि आदि से अगर फसलें बच भी जाती हैं तो जंगली जानवर किसानों की रीढ़ तोड़ देते हैं. जंगली जानवरों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाय.
4. सड़क, पानी आदि की समस्याओं का कोई स्थायी समाधान निकाला जाय.