शिक्षक की भूमिका में दिखे पद्म विभूषण कड़िया मुंडा

शिक्षक की भूमिका में दिखे पद्म विभूषण कड़िया मुंडा-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

खूंटी. 20 अप्रैल 1936 को झारखंड के रांची के पास खूंटी जिले के अंगार नामक गाँव में जन्मे पद्म विभूषण से सम्मानित और खूंटी संसदीय क्षेत्र से आठ बार सांसद और लोकसभा के उपाध्यक्ष रहे कड़िया मुंडा गुरुवार को यहां कुंजला में अपनी संस्था के स्कूल के बच्चों से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने फिर से शिक्षक की भूमिका निभाते हुये कक्षा में बच्चों को पढ़ाया भी। उल्लेखनीय है कि पद्म विभूषण से सम्मानित कड़िया मुंडा राजनीति में आने से पहले शिक्षक थे। वे 1977 से आठ बार खूंटी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधत्व किया।

लम्बे राजनीतिक सफ़र में उन्होंने अनेको उतार चड़ाव देखे पहली बार जब वो 1977 में खूंटी से चुने गए थे, तब वो जनसंघ बिहार में संयुक्त सचिव हुआ करते थे. चुने जाने के बाद उनको केंद्र सरकार में इस्पात और खनन राज्य मंत्री बनाया गया इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुडके नहीं देखा ये. 1996 में अटल बिहारी द्वारा बनाई गयी 13 दिन की सरकार में भी कडिया लोक कल्याण मंत्री रहे. इसके बाद भी इन्होने सक्रिय राजनीति में काफी अहम् भूमिका निभाई. हलाकि व्यक्तिगत रूप से आज भी मुंडा एक जमींन से जुड़े हुए नेता माने जाते है.जब भी उन्हें अपने व्यस्त कार्यक्रम से फुर्सत मिलती थी तो वो खेतों में काम करते हुए अक्सर नजर आते हैं.

हालाँकि खूंटी एक नक्सल प्रभावित आदिवासी बहुल जिला है लेकिन मुंडा आज भी अपने गाँव में यूँ ही बगेर ज्यादा सुरक्षा के पहुँच जाते है. खेतो में हल जोतते भी दिख जाते है. 2019 में उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने से इनकार कर दिया. उनकी जगह झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मुंडारी जाति के बड़े नेता अर्जुन मुंडा इस लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और जीतने के बाद मोदी सरकार में उन्हें जनजातीय मामलों का मंत्री बनाया गया.