अपनी जमीन वापस ले माली हालत सुधारेगा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड

मंडी. ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत शिल्पकारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य को लेकर हिमाचल खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड अपनी माली हालत को सुधारने का भी प्रयास करेगा. इसी कड़ी में सबसे पहले मंडी, सुंदरनगर, कांगड़ा और किनौर में पूर्व सरकार ने दूसरे विभागों को दी गई. खादी बोर्ड की जमीन को वापस लेने का प्रयास किया जाएगा. खादी एवं गामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष पुरूषोत्तम गुलेरिया ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने खादी बोर्ड के बजट में पचीस प्रतिशत कटौती कर दी थी.

जिसके चलते बोर्ड को अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देना भी मुश्किल हो गया था. उन्होंने कहा कि वर्तमान जय राम सरकार ने इस पचीस प्रतिशत बजट को बहाल कर बोर्ड की मदद की है. अब उनका अगला लक्ष्य पूर्व सरकार ने विभिन्न विभागों को दी गई खादी बोर्ड की जमीन अब वापस लेकर उन पर नए प्रोजेक्ट तैयार कर बोर्ड की माली हालत में सुधार लाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में आन लाइन रजिस्ट्रेशन की जाएगी. जिसके लिए पढ़े लिखे युवा आवेदन आन लाइन कर सकते हैं. इसके अलावा जो लोग ऑन लाइन आवेदन करने में असमर्थ हैं. वह विभागीय अधिकारियों के पास आएं ताकि वे स्वयं उनके आवेदन ऑन लाइन कर सकें. ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार सृजन के लिए उनकी काउंसलिंग की जाएगी. उनका रूझान किस ओर है उनकी रूचि के युनिट लगाने मदद की जाएगी.

खादी राष्ट्रीयता के साथ अब फैशन भी

उन्होंने कहा कि खादी न केवल राष्ट्रीयता की ही पहचान नहीं है बल्कि अब यह फैशन भी बन गई है. सिल्क खादी की साड़ी अब फैशन का पर्याय बन गई है. महात्मा गांधी ने खादी राष्ट्रीयता के लिए नारा दिया था. मगर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खादी फॉर ट्रांसफर्मेशन का नारा दिया है. वह हिमाचली टोपी, शॉल और चंबा रूमाल को विदेशों में लेकर जाते हैं तो खादी का प्रचार प्रसार अपने आप हो जाता है.

वापस लेंगे बोर्ड की जमीन

उन्होंने कहा कि मंडी के जेलरोड़ में खादी बोर्ड की साढ़े चार बीघा जमीन को पूर्व सरकार के शासनकाल में राजस्व विभाग के नाम करवा दिया था. जिससे यहां पर शॉपिंग मॉल बनाने की योजना थी. मगर एनजीटी ने इसे हाई फ ल्ड जोन करार दिया. अब इस जमीन को वापस खादी बोर्ड के नाम करवाने का प्रयास किया जा रहा है. जिसके लिए उपायुक्त मंडी और स्थानीय विधायक एवं ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा से बात की जा रही है. इसके अलावा सुंदरनगर में भी डुढ बीघा जमीन वापस ली जाएगी. उसी प्रकार किनौर और कांगड़ा की जमीन वापस लेकर उन पर नए प्रोजेक्ट लगाए जाएगें. जिससे खादी बोर्ड अपने पैरों पर खड़ा हो सके.