नई दिल्ली. गुरुवार को रसायन के क्षेत्र में मिलने वाले नोबेल पुरुस्कारों की घोषणा की गई. रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिये तीन यूरोपिय वैज्ञानिकों को नोबेल पुरुस्कार मिला है. 2017 का यह पुरुस्कार संयुक्त रूप से स्वीट्जलैंड के जाक दुबोटे, अमेरिका के जोएखिम फ्रैंक और यूके के रिचर्ड हेंडरसन को दिया गया है.
स्टॉकहोम में नोबेल पुरस्कार देने वाली कमेटी ने तीनों पुरुस्कार विजेताओं के योगदान को ‘जीवन को समझने में मदद करनेवाला’ बताया है. उनके इस खोज से कोशिका के ढांचों, विषाणुओं और प्रोटीन के सुक्ष्मतम ब्यौरे के बारे में जानकारी मिलेगी. उन्हें यह पुरुस्कार ‘क्रायो इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोपी’ को विकसित करने के लिये दिया गया है.
BREAKING NEWS The 2017 #NobelPrize in Chemistry is awarded to Jacques Dubochet, Joachim Frank & Richard Henderson. pic.twitter.com/RUZSnArJHO
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 4, 2017
जैविक मौलिकुल के संबंध में इन वैज्ञानिकों के अनुसंधान से भविष्य में जीका जैसे रोगों के इलाज में मदद मिलेगी.
जाक दुबोटे स्वीट्जरलैंड के लौसाने विश्वविद्यालय में जैव भौतिकी के विशेषज्ञ हैं. जोएखिम फ्रैंक न्यूयार्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. वहीं, रिचर्ड हेंडरसन वर्तमान में यूके स्थित ब्रिटिस मेडिकल रिसर्च काउंसिल लैबोरेटरी ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में वैज्ञानिक हैं.
तीन अमेरिकी को मिला भौतिकी का नोबेल पुरुस्कार
वहीं, राइनर वाइस, बैरी बैरिश और किप थोर्ने को इस साल का भौतिकी का नोबेल पुरुस्कार देने की घोषणा की गयी है. उन्हें यह पुरुस्कार गुरुत्वीय तरंगों की खोज के लिये दिया गया है. तीनों अमेरिका से हैं. राइनर वाइस मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से संबंध रखते हैं. वहीं बैरी बैरिश और किप थोर्ने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़े हैं.
The decision has been made! These voting tokens are used when Academy members make the final decision about who receives a #NobelPrize pic.twitter.com/rootZa5QzV
— Vetenskapsakademien (@vetenskapsakad) October 4, 2017
ये तीनों वैज्ञानिक लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल वेव ऑब्जर्वेशन से जुड़े थे. 100 साल बाद तीनों वैज्ञानिकों ने आंस्टाइन के ग्रैविटेशनल रिलेटिविटी के सिद्धांत को सच साबित किया.