जानिए, क्या है आकांक्षी जिला कार्यक्रम

जानिए, क्या है आकांक्षी जिला कार्यक्रम - Panchayat Times

नई दिल्ली/रांची. संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए बुधवार को केन्द्रीय नियोजन मंत्री राव इन्द्रजीत सिहं ने कहा कि एस्पिरेशनल जिलों के कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए NITI Aayog कि ओर से championsofchange.gov.in/dashboard नामक एक डैशबोर्ड को विकसित किया गया है. उन्होंने आगे बताया की 112 आकांक्षी जिलों में से प्रत्येक, इस डैशबोर्ड पर 81 डेटा बिंदुओं में से अलग किए गए 49 प्रमुख प्रदर्शनो से संबंधित अपने डेटा को प्रस्तुत करता है. इससे इन जिलों में महीने दर महीने हुए कामो की वृद्धि को दिखाता है.

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क्या है आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational District Programme)

देश में जीवन की गुणवत्ता विभिन्न अंतर-राज्यीय (Inter-State) और अंतर-जिला (Inter-District) विविधताओं पर निर्भर करती है. इसी भेदभाव को दूर करने के लिये केन्द्र सरकार ने 5 जनवरी 2018 को आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts’ programme-ADP) लागू किया था. ज्ञात हो कि वर्ष 2018 में UNDP द्वारा जारी मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) में भारत को 189 देशों में से 129वां स्थान प्राप्त हुआ था, जबकि वर्ष 2018 में भारत इस सूची में 130वें स्थान पर था.

आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational District Programme)

वर्ष 2018 में शुरू हुए इस कार्यक्रम का लक्ष्य देश के सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों की पहचान कर उनके समग्र (Overall) विकास में सहायता करना है.

इस कार्य के लिए देश के 115 जिलों की पहचान की गई थी. राज्य इस कार्यक्रम के प्रमुख परिचालक हैं और केंद्र की ओर से नीति आयोग द्वारा इसका संचालन किया जा रहा है. इसके अलावा कई मंत्रालय भी योजना के कार्यान्वयन में योगदान दे रहे हैं.

गौरतलब है कि यह कार्यक्रम प्रमुख रूप से 5 विषयों और 3 सिद्धांतों (Principles) पर आधारित है:-

स्वास्थ्य एवं पोषण (Health and Nutrition). शिक्षा (Education). वित्तीय समावेश एवं कौशल विकास (Skill Development). बुनियादी आधारभूत ढांचे पर केंद्रित है (Infrastructure).

गौरतलब है कि उपरोक्त पांचों विषयों का नागरिकों के जीवन पर सीधे तौर पर प्रभाव देखने को मिलता है.

सिद्धांत

अभिसरण (Co-ordination) (केंद्रीय और राज्य योजनाओं का). सहयोग (Collaboration) (नागरिकों एवं सरकारी अधिकारियों के बीच). जिलों के मध्य प्रतिस्पर्द्धा (Competition between Districts).

ज्ञात हो कि ADP दुनिया में परिणाम-केंद्रित शासन (Result Oriented Systems) के सबसे बड़े प्रयोगों में से एक है.

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Jharkhand’s Aspirational Districts

इस कार्यक्रम के तहत नीति आयोग द्वारा जिलों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है एवं उन्हें रैंकिंग दी जाती है.

क्या है कार्यक्रम के प्रमुख क्षेत्र एवं रैंकिंग सिस्टम

इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य वास्तविक समय (Real Time) में प्रगति के माध्यम से 5 मुख्य क्षेत्रों के 49 बिंदुओं पर आकांक्षी जिलों का मूल्यांकन करना है. इसके तहत विभिन्न जिलों की प्रगति का मूल्यांकन देश एवं राज्य के सबसे प्रगतिशील जिले से अंतर के आधार पर किया जाता है. इसके बाद आकांक्षी जिलों की रैंकिंग तय की जाती है.

इसमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं-

स्वास्थ्य एवं पोषण :

यदि रैंकिंग को 100 प्रतिशत सूचकांक में बदला जाए तो इसमें स्वास्थ्य एवं पोषण को 30 प्रतिशत हिस्से के रूप में शामिल किया गया है. इसमें प्रसव-पूर्व देखभाल, प्रसव-पश्चात् देखभाल, लैंगिक समता (Gender Equality), नवजात का स्वास्थ्य, बच्चों का विकास, संक्रामक बीमारी और स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित अवसंरचना (Infrastructure) के कुल 13 बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जाता है.

शिक्षा :-

इस इंडेक्‍स में शैक्षणिक क्षेत्र भी 30 प्रतिशत का योगदान करता है, जिसमें 8 बिंदुओं को शामिल किया गया है. इसमें शिक्षा से जुड़े परिणाम पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जैसे-प्राथमिक स्कूल से बच्चों का उच्च प्राथमिक स्कूल और उसके बाद माध्यमिक कक्षा में प्रवेश की दर, गणित एवं भाषा विषय में औसत अंक आदि. साथ ही स्कूल की अवसंरचना जिसमें बालिकाओं के लिये शौचालय, पेयजल तथा स्कूल में बिजली की आपूर्ति आदि को शामिल किया जाता है. इसके अतिरिक्त अन्य समस्थानिक संकेतक जैसे-छात्र-शिक्षक अनुपात, समय पर पुस्तकों का वितरण भी इसमें शामिल किया जाता है.

कृषि एवं जल संसाधन :

भारत देश एक कृषि प्रधान देश है. अभी भी 50 प्रतिशत से अधिक लेबर कृषि और कृषि से संबंधित गतिविधियों से अपना रोजगार प्राप्त करता है. इस सूचकांक में 20 प्रतिशत हिस्सा तथा 10 बिंदुओं कृषि एवं जल संसाधन से संबंधित हैं. इसके अंतर्गत पैदावार की उत्पादकता, उत्पाद का उचित मूल्य, बीजों की गुणवत्ता, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, साथ ही संस्थागत सहयोग जिसमें फसल बीमा, ई-विपणन, कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं का टीकाकरण आदि शामिल किये जाते हैं, पर विशेष ध्यान दिया जाता है.

आधारभूत ढांचा :

यह क्षेत्र सूचकांक में 10 प्रतिशत सहयोग प्रदान करता है, साथ ही इसके अंतर्गत 7 बिंदूं शामिल किये जाते हैं. इन बिदुंओ में सभी परिवारों के लिये घर जिसमें शौचालय, पेयजल, बिजली तथा संचार के लिए रोड कनेक्टिविटी की सुविधा हो. इसके साथ ही जिलों का मूल्यांकन ग्राम पंचायतों में इंटरनेट कनेक्शन तथा सामान्य सुविधा केंद्र की उपस्थिति के आधार पर भी किया जाता है.

वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास :-

वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास दोनों मिलकर इस इंडेक्‍स में 10 प्रतिशत योगदान देते हैं. साथ ही इसके अंतर्गत 6 बिदुंओं पर प्रगति को मापा जाता है. केंद्र सरकार की योजनाएँ जैसे-अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना आदि तक लोगों की पहुंच, संस्थागत बैकिंग व्यवस्था की लोगों तक पहुंच जिसमें जन धन योजना को शामिल किया जाता है तथा लघु एवं छोटे उद्योगों के लिये बैंकिंग ऋण प्राप्ति में सुगमता जैसे-मुद्रा लोन आदि के आधार पर जिलों का मूल्यांकन कर रैंकिंग प्रदान की जाती है.