जानिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों पर बनाई गई चार सदस्यी कमिटी पर क्यों उठ रहे है सवाल

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नई दिल्ली. पिछले 48 दिनों से राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर कंपा देने वाली सर्दी के बीच केन्द्र सरकार द्वारा बनाये गये तीन कृषि कानूनों के विरोध में बैठे किसानों के लिए आज थोड़ी सी राहत सुप्रीम कोर्ट को और से आई.

आज यानि 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है. इसके अलावा इन कानूनों पर विचार करने के लिए एक कमिटी का गठन किया गया है, जो किसानों से बात करके इस मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश करेगी.

कौन-कौन कमिटी में शामिल

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो कमिटी बनाई गई है उसमें चार लोग शामिल हैं. इसमें दो किसान नेता हैं. इसके साथ एक कृषि अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ भी शामिल हैं. हांलाकि ये सभी पहले कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके है.

भूपिंदर सिंह मान

भूपिंदर सिंह मान भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं. उन्हें कमिटी में शामिल किया गया है. ये पहले ही केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये इन तीनों कानूनों का समर्थन कर चुके है.

अनिल धनवत (शेतकरी संगठन) महाराष्ट्र

कमिटी में शामिल दूसरे किसान नेता हैं अनिल धनवत. वह शेतकारी संगठन के अध्यक्ष हैं. बता दें कि शेतकारी संगठन महाराष्ट्र का एक किसान संगठन है. इस संगठन का जन्म 1979 में हुआ था. यह किसान संगठन कृषि कानूनों के समर्थन में है. यह संगठन पहले केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलकर कृषि कानूनों का समर्थन कर चुका है.

प्रमोद कुमार जोशी (पी के जोशी)

प्रमोद कुमार सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमिटी के तीसरे सदस्य हैं. वह राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन (ICAR) के पूर्व निदेशक हैं. भारतीय कृषि अर्थशास्त्र का समाज, इंडिया सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग पर उन्होंने फेलोशिप कि है.

अशोक गुलाटी

अशोक गुलाटी को कृषि अर्थव्यवस्था का विशेषज्ञ माना जाता हैं. गुलाटी भारत सरकार के पूर्व सलाहकार भी रह चुके हैं. इन्होंने भी पहले हि केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये इन तीनों कानूनों का समर्थन किया है और कृषि कानूनों को लेकर अखबारों में भी लिख चुके हैं.

कमिटी के खिलाफ थे किसान संगठन

वहीं किसानों की तरफ से पेश वकील एमएल शर्मा ने कहा था कि किसान किसी समिति के समक्ष नहीं जाना चाहते. वो चाहते हैं कि कानून वापस हो. अन्यथा वह प्रदर्शन जारी रखेंगे. इसपर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम कानून के लागू होने पर रोक लगाकर हल निकालने का रास्ता निकालना चाह रहे हैं.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा हम लोगों के जान-माल और संपत्ति के नुकसान को लेकर चिंतित हैं और हमारे पास यह शक्ति है कि हम कानून पर रोक लगाएं और हल निकालने के लिए समिति का गठन करें, जो हल चाहता है वह समिति के पास जाएगा.

ट्रैक्टर मार्च पर नोटिस जारी, रामलीला ग्राउंड जाने के लिए लेनी होगी इजाजत

किसानों द्वारा 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाने के लिए सरकार के‌ आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. इस‌ आवेदन पर सोमवार को सुनवाई होगी. कोर्ट ने कहा कि हम ऑर्डर में इसका जिक्र करेंगे कि किसान दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पास रामलीला मैदान या किसी अन्य जगह प्रदर्शन की इजाजत मांग सकते हैं.