क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, कोरोना के बाद जिसकी हो रही है काफी चर्चा

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नई दिल्ली. हाल ही में केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) में बदलाव करते हुए मास्क (2 प्लाई एवं 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क) और हैंड सैनिटाइजर को 30 जून, 2020 तक आवश्यक वस्तु के रूप में घोषित करने के लिये एक आदेश जारी किए हैं.

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क्या है मामला

पिछले कुछ दिनों के दौरान कोविड-19 (कोरोना वायरस) के चलते मास्क और हैंड सैनिटाइजर या तो बाजार में अधिकांश दुकानदारों के पास उपलब्ध नहीं हैं या बहुत अधिक कीमतों पर काफी मुश्किल से मिल पा रहे हैं.

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955

आवश्यक वस्तुओं या सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित करने ओर उन्हें जमाखोरी एवं कालाबाजारी से बचाने के लिये साल 1955 में आवश्यक वस्तु अधिनियम बनाया गया था. आवश्यक वस्तुओं में दवाएं, उर्वरक (यूरिया, डिएपी) दलहन और खाद्य तेल (दाल, चावल) पेट्रोलियम (डीजल, पैट्रोल) इत्यादि शामिल हैं.

सरकार ने विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 (Legal Metrology Act, 2009) के तहत एक एडवाइजरी भी जारी की है. आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत राज्य, सामान बनाने वाली कम्पनीयों के साथ बात कर उनसे इन वस्तुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रंखला (Supply Chain) को सुचारू बनाने के लिये कह सकते हैं.

अधिनियम में शामिल करने के क्या है लाभ

इन दोनों वस्तुओं के संबंध में राज्य अपने शासकीय राजपत्र में अब केंद्रीय आदेश को लागू कर सकते हैं और इस संबंध में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपने स्वयं के आदेश भी जारी कर सकते हैं साथ ही संबंधित राज्यों में व्यापत प्रकोप के आधार पर कार्रवाई कर सकते हैं.

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आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केंद्र सरकार की शक्तियां वर्ष 1972 और 1978 के आदेशों के माध्यम से राज्यों को पहले ही प्रत्यायोजित की जा चुकी हैं. अतः राज्य/संघ राज्य क्षेत्र आवश्यक वस्तु अधिनियम और चोरबाजारी निवारण एवं आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत उल्लंघनकर्त्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई कर सकते हैं. विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत राज्य न्यूनतम खुदरा मूल्य पर इन दोनों वस्तुओं की बिक्री सुनिश्चित कर सकते हैं.

क्या हैं सजा के प्रावधान

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत किसी उल्लंघनकर्त्ता को 7 की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है ओर चोर बाजारी निवारण एवं आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत उसे अधिकतम 6 माह के लिये नजरबंद किया जा सकता है.

निर्णय के क्या होंगे प्रभाव

यह निर्णय केंद्र सरकार और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को मास्क (2 प्लाई एवं 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन95 मास्क) और हैंड सैनिटाइजर के उत्पादन, गुणवत्ता, वितरण आदि को ठिक करने और इन वस्तुओं की बिक्री एवं उपलब्धता को आसान बनाने तथा आदेश के उल्लंघनकर्ताओं एवं इनके ज्यादा मूल्य, कालाबाजारी आदि में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये सशक्त बनाएगा.

इससे आम जनता को दोनों वस्तुएं उचित कीमतों पर उपलब्ध होंगी. राज्यों को उपरोक्त दोनों वस्तुओं के संबंध में उपभोक्ताओं द्वारा शिकायतें दर्ज कराने के लिये राज्य उपभोक्ता हेल्पलाइन का प्रचार करने की सलाह भी दी गई है.