देश के वे नेता जो किसानों के लिए संघर्ष करते हुए सत्ता के शिखर तक पहुंचे

देश के वे नेता जो किसानों के लिए संघर्ष करते हुए सत्ता के शिखर तक पहुंचे
For representational purpose only Source :- Internet

नई दिल्ली. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा सितंबर माह में लाये गये कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 13 दिनों से देश भर के किसान धरना प्रदर्शन कर रहे है. अपनी मांगो को लेकर किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आहवान किया था. देश भर के किसान संगठन केन्द्र सरकार से संसद का विशेष सत्र बुला कर इन कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं.

जहां सरकार इन कानूनों को किसानों के लिए फायदेमंद बता रही है, तो वहीं तमाम विपक्षी दल किसानों की मांग का समर्थन कर रहे हैं. भारत में किसानों के आंदोलन का लंबा इतिहास रहा है. भारत की सियासत में ऐसे तमाम बड़े नेता रहे हैं जो किसानों के लिए संघर्ष करते हुए सत्ता के शिखर पर पहुंचे है. आज हम आपको उन्ही नेताओं के बारे में एक समरण करा रहे है :-

चौधरी चरण सिंह

28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक देश के प्रधानमंत्री के पद पर रहे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के नूरपुर गांव में जन्मे चौधरी चरण सिंह ने किसान राजनीति के जरिए साठ के दशक से उत्तर भारत में कांग्रेस के सामने एक चुनौती पेश की और बाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर 1979 में देश के प्रधानमंत्री तक बने. चरण सिंह कहते थे कि देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है.

चौधरी चरण सिंह का मानना था किसानों के उत्थान के बिना देश का विकास नहीं हो सकता. किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके इसके लिए वो संघर्ष करते रहे, जिसके चलते वो किसानों के मसीहा के तौर पर जाने जाते हैं. उनकी याद में दिल्ली में किसान घाट भी बनाया गया है.

एचडी देवेगौड़ा

1 जून, 1996 से 21 अप्रैल, 1997 तक देश के प्रधानमंत्री रहे एचडी देवेगौड़ा भी किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता खेती करते थे और उनकी राजनीति के केंद्र में किसान ही रहे हैं. उन्होंने कर्नाटक में किसान नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई और प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक बने, लेकिन किसानों के मुद्दों पर समझौता नहीं किया.

चौधरी देवीलाल

हरियाणा में किसान आंदोलन से निकले चौधरी देवीलाल ने केवल हरियाणा में ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई थी. देवीलाल खुद संपन्न परिवार के थे, लेकिन उनका अंदाज ठेठ ग्रामीणों वाला ही रहा, वो किसान, खेतिहर मजदूरों और गरीबों की आवाज उठाने वाले नेता के तौर पर जाने जाते थे. हरियाणा के मुख्यमंत्री से लेकर देश के उप-प्रधानमंत्री तक बने, लेकिन किसान राजनीति को नहीं छोड़ा और राष्ट्रीय कृषि नीति से लेकर जल नीति तक बनवाने में अहम भूमिका अदा की.

शरद पवार

महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले राष्ट्रीय काग्रेंस पार्टी के मुखिया शरद पवार की राजनीति भी किसानों के मुद्दों को लेकर ही रही है. महाराष्ट्र में किसानों के हक में पवार हमेशा आवाज उठाते रहे हैं और यूपीए सरकार में 2004 से 2014 तक कृषि मंत्री भी रहे.

बलराम जाखड़

23 अगस्त 1923 को पंजाब के फिरोजपुर जिले की अबोहर तहसील के पंजकोसी गांव में जन्मे बलराम जाखड़ की राजनीति भी किसानों और उनके मुद्दों के आसपास हि रही. यही वजह रही कि राजीव गांधी ने अपनी सरकार में कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी बलराम जाखड़ सौंपी थी और कांग्रेस में किसान नेता के तौर पर जाखड़ ने अपनी अलग जगह बनाई थी.

खेतों में पैदावार बढ़ाने के लिए उन्नत और वैज्ञानिक तकनीकों को लेकर जाखड़ हमेशा कोशिश में जुटे रहे. उन्होंने किसानों के हक में आवाज उठाने के लिए किसान संगठन का गठन भी किया था.

जाखड़ के इन्ही प्रयासों की वजह से उन्हें बागवानी क्षेत्र में योगदान के लिए 1975 में राष्ट्रपति ने उद्यान पंडित की उपाधि से नवाजा था. यही नहीं हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार ने उन्हें ‘डॉक्टर ऑफ साईंस’ और ‘विद्य मार्तण्ड’ की मानद उपाधि से भी नवाजा.

सोमपाल शास्त्री

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कृषि मंत्री रहे और किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड की सुविधा शुरू करने वाले सोमपाल शास्त्री भी एक बड़े किसान नेता है. शास्त्री ने अपने कार्यकाल में किसानों को क्रेडिट कार्ड की सुविधा के साथ गेहूं का समर्थन मूल्य 19.6 प्रतिशत बढ़ाकर इतिहास रच दिया था. इसके अलावा चीनी मिलों को लाइसेंस प्रणाली से मुक्त किया और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना तैयार कराई.

हरिकिशन सुरजीत

लेफ्ट की राजनीति का एक बड़ा चेहरा रहे हरिकिशन सुरजीत भी किसान आंदोलन से निकलकर राजनीति में आए थे. 1936 में अविभाजित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बन गए थे और पंजाब में किसान सभा की नींव रखने वालों में से एक थे.

पंजाब में सुरजीत किसानों की आवाज थे, जिसे सड़क से लेकर संसद तक उन्होंने उठाने का काम किया. राजनीतिक तौर पर उन्होंने काग्रेस-बीजेपी के सामने 1996 में तीसरे मोर्चे को खड़ा किया और फिर कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को खड़ा करने में अहम कड़ी बने.

प्रकाश सिंह बादल

पांच बार पंजाब के मुख्‍यमंत्री रहे अकाली दल के संस्थापक प्रकाश सिंह बादल को भी बड़ा किसान नेता माना जाता है, हाल ही में कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने अपने पद्म विभूषण सम्मान को लौटा दिया. खेती-किसानी के परिवार से आने वाले बादल ने पंजाब में किसानों के लिए काफी काम किए.

बादल ने पंजाब में पशुपालन और खेती से जुड़े डेयरी उद्योग में किसानों को काफी रियायतें दीं ताकि खेती को बढ़ावा मिल सके. पंचायतीराज पर भी बादल ने खूब काम किया ताकि स्थानीय स्तर पर ही व्यवस्था मजबूत हो सके. पंजाब किसानों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिसके चलते ही अकाली बीजेपी से अलग हुई है.

राज शेखर रेड्डी

डॉक्टर येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी (राज शेखर रेड्डी) की जयंती को आज भी आंध्र प्रदेश में लोग ‘किसान दिवस’ के रूप में मनाते हैं. आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राज शेखर रेड्डी की पहचान भी एक किसान नेता के तौर पर होती थी.

मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों के हक में कई अहम कदम उठाए थे और विपक्ष में रहते हुए किसानों के मुद्दे पर राज्य भर का दौरा किया था. राज शेखर कांग्रेस का चेहरा हुआ करते थे, लेकिन उनके निधन के बाद  जगन मोहन रेड्डी ने अपनी अलग पार्टी बनाई और प्रदेश की सत्ता पर काबिज हैं.