विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस, भारत में इस दिन का कितना है महत्व और देश के ग्रामीण इलाको में मानसिक स्वास्थ के क्या है मौजूदा हालात

विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस, भारत में इस दिन का कितना है महत्व और देश के ग्रामीण इलाको में मानसिक स्वास्थ के क्या है मौजूदा हालात - Panchayat Times
Source:- WFMH

नई दिल्ली. आज विश्व भर में ‘विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस ‘मनाया जा रहा है, यह दिवस विश्व भर के लोगो में मानसिक स्वास्थ को लेकर चेतना फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है. इसकी शुरुआत साल 1992 में विश्व मानसिक स्वास्थ संघ (WFMH) द्वारा की गयी थी.

विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा हर साल विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस के लिए अलग-अलग थीम रखी जाती है, इस साल “सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य: अधिक से अधिक निवेश, ज्यादा से ज्यादा पहुंच” रखी गई है. इसी थीम पर पूरे विश्व में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

हर साल के मुकाबले इस साल इस दिन का महत्व कहीं ज्यादा है क्योंकि इस समय पूरा विश्व कोरोना के प्रकोप में जी रहा है. जिसके चलते बहुत से लोग आर्थिक और मानसिक तनाव से जूझ रहे है.

भारत के ग्रामीण इलाको में मानसिक स्वास्थ के हालात

देश के ग्रामीण इलाको में जहां गरीब व्यक्ति साफ पानी तक के लिए संघर्ष कर रहा हो ऐसी स्थति में उसका ध्यान मानसिक स्वास्थ जैसे विषय पर कैसे जायेगा. ग्रामीण इलाको में लोगों को पता ही नहीं चलता के वह मानसिक बीमारी या तनाव में है लेकिन इसका परिणाम आत्महत्या के रूप में सामने देखा जा सकता है.

ग्रामीण इलाको में साक्षरता दर कम होने के कारण लोग मानसिक तनाव को साधारण समझ लेते है और नियति का लेख सोच कर इसी प्रकार अपना जीवन निर्वाह कर देते है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत सरकार की तरफ से मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 लाया गया. इससे पहले साल 1987 में कानून लाया गया था. नए कानून के तहत केंद्र सरकार ने दिमागी रूप से बीमार व्यक्ति को अधिकार देने की बात की है.

भारत में फिलहाल 43 मेंटल अस्पताल हैं जिनमें से दो या तीन सुविधाओं के स्तर पर बेहतर माने जाते हैं, 10-12 में सुधार हो रहा है जबकि 10-15 अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वचिंत हैं.

मानसिक स्वास्थ और परेशानियां

यदि आपके शरीर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य या दोस्त को तुरंत आभास जो जाता है की आपको डॉक्टर की जरूरत है लेकिन मानसिक बीमारी के मामले में मरीज को खुद इस बात का अंदाजा नहीं हो पाता की वह मानसिक रूप से बीमार है.

भारत में अक्सर मानसिक तनाव को पागलपन का नाम दे दिया जाता है और उसके सम्बन्ध में कई भ्रमक धारणायें बना दी जाती है. जिस डर के कारण बहुत से लोग अपनी समस्या का जिक्र करने से कतराते है, मानसिक तनाव कितनी गंभीर बीमारी है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति आत्महत्या के ख्यालो से घिर जाता है.

व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ का असर उसके रिश्ते, परिवार और दोस्तों पर भी पड़ता है. हर वक्त उदास रहना, चिडचिडापन, नींद ठीक से न आना, कम बोलना या न बिल्कुल न बोलना व्यक्ति के मानसिक तनाव की ओर संकेत करता है. लेकिन यह मानक मानसिक स्वास्थ के बारे में जानकारी पाने के लिए पर्याप्त नहीं है अच्छे से हंसने बोलने वाला व्यक्ति भी मानसिक तनाव या बीमारी से जूझ रहा होता है.

भारत में कैसा है लोगो का मानसिक स्वास्थ

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस के 2016 में किये गए सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में 2.7 प्रतिशत लोग डिप्रेशन के शिकार है जबकि 5.2 प्रतिशत कभी न कभी डिप्रेशन की चपेट में आये थे. इस सर्वेक्षण के आधार पर भारत के 15 करोड़ लोगो को मानसिक स्वास्थ के विषय पर डॉक्टर से मिलने की आवश्यता है.

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (NCRB) के डाटा के मुताबिक भारत में हर दिन 10 लोग गरीबी और बेरोजगारी के चलते आत्महत्या करते है.

भारत में 0.3 से लेकर 1.2 फीसदी बच्चे डिप्रेशन में घिर रहे हैं और अगर इन्हें समय रहते नहीं डॉक्टरी मदद नहीं मिली तो सेहत और मानसिक स्वास्थ्य संबधी जटिलताए बढ़ सकती हैं. गर्भवती मझिलाओ में भी डिलीवरी के बाद डिप्रेशन के लक्षण देखे जा सकते है.

महंगा इलाज और डॉक्टरों की कमी

विश्व स्वास्थ संगठन के 2014 से 2016 के सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में 1 लाख लोगो पर 0.7 डॉक्टर है यानि की 1 डॉक्टर से भी कम, विश्व स्वास्थ संगठन के मुताबिक यह संख्या 3 होनी चाहिए. इसके साथ ही इलाज के संसाधन और उनकी पहुंच भी कुछ ही लोगो तक सीमित है, भारत में देश के कुल बजट का 1% हिस्सा भी मानसिक स्वास्थ के लिए नहीं है.

बड़े शहरों में रहने वाले मरीज संसाधनों और डॉक्टर तक पहुंच तो सकते है लेकिन इलाज की फीस की रकम उन्हें और तनाव दे सकती है. देश के मैट्रो शहरों में 1 घंटे की काउंसिलिंग की सेशन की फीस 1000 से 3000 रूपये के बीच है, एक व्यक्ति को औसतन 30 से 40 सेशन से गुजरना पड़ता है.