भारतीय कृषि क्षेत्र की समस्याएं और कहां तक नजर आते हैं उनके समाधान

भारतीय कृषि क्षेत्र की समस्याएं और कहां तक नजर आते हैं उनके समाधान - Panchayat Times

नई दिल्ली. भारत में कृषि परंपरागत दृष्टिकोण के आधार पर खाद्यान आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये की जाती है. जिसमें कौशल, ज्ञान और नवीन तकनीकों की साफ तौर पर कमी देखी जा सकती है. इसके अतिरिक्त किसानों के समक्ष कृषि एवं फसल संबंधी जानकारियों का अभाव जैसी सामान्य समस्याएं हैं.

भारत में अभी भी समर्पित संस्थाओं (Dedicated Organisations), कृषि विशेष क्षेत्रों एवं अनुसंधानों (Research)और इन अनुसंधानों की जानकारी की किसानों तक पहुंच से दूरी जैसे कारण इस क्षेत्र की सफलता में बाधक बने हैं.

इटली की राजधानी रोम में स्थित खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा हाल के वर्षों में चिली और अर्जेंटीना जैसे देशों में इस प्रकार की कृषि के सफल प्रयोग किये हैं. इस प्रकार की कृषि के परिणामस्वरूप वहां पर कृषि उत्पादन और कृषकों कि आय में बेहतर सुधार देखा गया हैं.

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क्या हो सकते हैं समाधान :

भारत में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित समर्पित शोध संस्थाओं की स्थापना की जानी चाहिये इसके अतिरिक्त पहले से स्थापित संस्थानों के कार्य करने के तरिके में अपेक्षित सुधार किया जाना चाहिये. इस प्रकार के संस्थानों के शोध के आधार पर पाठ्यक्रम एवं तकनीकी ज्ञान का भी प्रसार किया जाना चाहिये.

किसी क्षेत्र से संबंधित स्वयं सहायता समूहों (SHG) एवं गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से सामान्य और तकनीकी जानकारी का प्रसार किया जाए इसके अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों में कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिये.

क्षेत्र विशेष पर समर्पित एप भी बनाए जाने चाहिये ताकि सभी प्रकार की जानकारियों को अद्यतन किया जा सके. इस प्रकार के एप के परिचालन संबंधी क्रिया-कलापों के लिए ग्राम पंचायत और स्थानीय स्तर पर नियमित कार्यशालाओं का किया जाना चाहिये. वित्तीय प्रवाह, अवसंरचना और जागरूकता के साथ-साथ बाजार पहुंच जैसी अन्य आवश्यकताओं को पूरा कर भारत अपनी श्रम शक्ति और जनसंख्या का बेहतर प्रयोग अपने आर्थिक एवं मानव विकास के लिये कर सकता है.