जानिए क्या है सांसद आदर्श ग्राम योजना और इससे कितनी ग्रामसभाओं की बदली तस्वीर

सिरमौर: प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अतंर्गत 14 गांव बनाए जाएंगे आदर्श - Panchayat Times

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में प्रारंभ ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ लक्ष्य से काफी दूर नजर आ रही है. हाल ही में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2014 में शुरू की गई सरकार की सांसद आदर्श ग्राम योजना के चौथे चरण के अंतर्गत 31 दिसंबर, 2019 तक केवल 252 सांसदों ने ही ग्रामसभाओं को आदर्श ग्राम योजना के लिये चुना था.

क्या है सांसद आदर्श ग्राम योजना?

इस योजना की घोषणा प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर 2014 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्म दिवस की वर्षगांठ के अवसर पर की गई थी. योजना के अंतर्गत सभी लोकसभा सांसदों को हर वर्ष एक ग्रामसभा का विकास कर उसे जनपद की अन्य ग्रामसभाओं के लिये आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना था.

इसके साथ ही राज्यसभा सांसदों को अपने कार्यकाल के दौरान कम-से-कम एक ग्राम सभा का विकास करना था. इस योजना का उद्देश्य शहरों के साथ-साथ ग्रामीण भारत के बुनियादी एवं संस्थागत ढांचे को विकसित करना था. जिससे गांवों में भी उन्नत बुनियादी सुविधाएं और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकें.

इस योजना का उद्देश्य चयनित ग्रामसभाओं को कृषि, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, आजीविका, पर्यावरण, शिक्षा आदि क्षेत्रों में सशक्त बनाना था. इस योजना के अंतर्गत ग्रामसभाओं के चुनाव के लिये जनसंख्या को आधार रखा गया.

जिसके अंतर्गत मैदानी क्षेत्रों के लिये 3000-5000 और पहाड़ी, जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में 1000-3000 की जनसंख्या को आधार मानने का सुझाव दिया गया था. इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक सांसद को वर्ष 2019 तक तीन और वर्ष 2024 तक पांच ग्रामसभाओं का विकास करना था.

क्या है वर्तमान स्थिति

योजना लागू होने के पांच वर्ष बाद उपलब्ध आंकड़ों में देखा जा सकता है कि योजना के क्रियान्वन में सांसदों के मध्य शुरुआत से ही उत्साह की कमी रही है. योजना के चौथे चरण के अंतर्गत गांवों विकास के लिये अभी तक लिये दो तिहाई लोकसभा सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्र से ग्रामसभाओं का चुनाव भी नहीं किया है.

सदस्यों की संख्या 790 है, जबकि केवल 252 सदस्यों ने ही चयनित ग्रामसभाओं की सूची की साझा

संसद के दोनों सदनों में सदस्यों की वर्तमान संख्या 790 है, जबकि दोनों सदनों से केवल 252 सदस्यों ने ही अभी तक चयनित ग्रामसभाओं की सूची साझा की है, जिनमें 208 लोकसभा तथा 44 सदस्य राज्यसभा से हैं.

इस योजना में शुरुआत के कुछ महीनों के बाद से ही संसद के सदस्यों की भागीदारी में कमी देखी गई है. योजना के पहले चरण में जहां लोकसभा के 703 सांसदों ने हिस्सा लिया था, वहीं दूसरे चरण में इनकी संख्या केवल 497 और तीसरे चरण में घटकर मात्र 301 रह गई.

वर्तमान में लोकसभा की सदस्य संख्या 545 है जिनमें 543 सदस्य चुनाव के द्वारा और 2 सदस्य मनोनीत होकर भारत के विभिन्न क्षेत्रों की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं. साथ ही राज्यसभा की सदस्य संख्या 245 है जिनमें से 12 सांसद मनोनयन की प्रक्रिया से इस सदन का हिस्सा बनते हैं, वर्तमान में संसद के इस सदन में 240 सदस्य हैं, जबकि 5 सीटें अभी खाली हैं.

क्रियान्वन को प्राथमिकता देकर आदर्श (Model) गांवों का निर्माण करना लक्ष्य

पिछले महीने संसद की एक स्टैंडिंग कमेटी ने इस योजना की कमियों पर अपनी चिंता प्रकट की, कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना का उद्देश्य विभिन्न योजनाओं के सामंजस्य और अभिसरण को सुनिश्चित कर और उनके पूर्ण क्रियान्वन को प्राथमिकता देकर आदर्श (Model) गांवों का निर्माण करना था.

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस योजना के आदर्श वाक्य की पूर्ति के लिये जिस गंभीरता की आवश्यकता थी, संसद सदस्यों में उसकी भारी कमी देखी गई है. ऐसे में कमेटी ने ग्रामीण विकास मंत्रालय को यह सलाह दी है कि मंत्रालय इस योजना के परिकल्पित ध्येय के अनुरूप SAGY गांव का विकास सुनिश्चित करे तथा यह भी सुनिश्चित करे की योजना के अंतर्गत कोई भी गांव छूटने न पाए.

आगे की राह

किसी भी देश के सर्वांगीण विकास के लिये यह आवश्यक है कि देश के हर वर्ग को जातिगत, लैंगिक अथवा अन्य किसी भेदभाव के बिना विकास के सामान अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिये. भारत की एक बड़ी आबादी आज भी दूरदराज के गांवों में निवास करती है और इनमें से अधिकतर कृषि या विभिन्न प्रकार के कुटीर उद्योगों पर निर्भर रहती है.

ऐसे में SAGY योजनाएं न सिर्फ इन गांवों को विकास का एक अवसर प्रदान करती हैं. बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाती हैं, इसलिये वर्तमान समय में यह बहुत ही आवश्यक है कि ग्रामीण विकास की नई योजनाओं की परिकल्पना के साथ उनके क्रियान्वन पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाए. योजनाओं की अनदेखी होने पर संबंधित विभाग/अधिकारी की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए.