जानिए क्या है विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), जिसकी 6 हजार के करीब संस्थानों के पंजीकरण रद्द होने के बाद खूब हो रही है चर्चा

जानिए क्या है विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), जिसकी 6 हजार के करीब संस्थानों के पंजीकरण रद्द होने के बाद खूब हो रही है चर्चा - Panchayat TImes

नई दिल्ली. पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (Non-Government Organisations) के विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (Foreign Contribution (Regulation) Amendment), 2010 के तहत पंजीकरण को रद्द कर दिया है.

विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम से संबंधित आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, जिन संगठनों और संस्थाओं का एफसीआरए के तहत पंजीकरण या वैधता समाप्त हो गई है, उनमें आईआईटी दिल्ली, जामिया मिलिया इस्लामिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल फाउंडेशन, लेडी श्री राम कॉलेज, श्री राम कॉलेज फॉर विमेन, दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और ऑक्सफैम इंडिया जैसे 5 हजार 933 संस्थान शामिल हैं.

जारी सूचना के अनुसार इन संस्थाओं ने या तो अपने एफसीआरए लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया या केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके आवेदनों को खारिज कर दिया है.

क्या है विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA)?

सन् 1976 में देश की तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा विदेशी चंदे को रोकने के लिए विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (Foreign Contribution Regulating Act, 1976) को लाया गया था. इस अधिनियम में 2010, 2012, 2015, 2017, 2019 और 2020 में या तो इस एक्ट में संसोधन किया गया था या फिर नियमों में बदलाव किया गया था.

भारत में एफसीआरए के जरिए विदेशों से मिलने वाले दान या चंदे को नियंत्रित किया जाता है. एफसीआरए का मकसद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए कोई किसी तरह की चुनौती न पैदा होने देना भी है. एफसीआरए विदेशी दान लेने वाले सभी संगठनों, समूहों और गैर-सरकारी संस्थाओं पर लागू होता है.

जो भी संस्थान विदेशों से चंदा लेते है उनको एफसीआरए के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य है. शुरुआत में यह पंजीकरण पांच वर्षों के लिए होता है, जिसे सभी मानदंडों को पूरा करने पर आगे भी बढ़ाया जाने का प्रावधान है.

वर्ष 2015 में गृह मंत्रालय ने नए नियम जारी किए थे जिसके तहत सभी एनजीओ को लिखित में देना होता है कि विदेशी फंड से भारत की संप्रभुता और अखंडता या किसी भी देश के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर किसी भी तरह से प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ेगा. ये संस्था ऐसे राष्ट्रीयकृत या निजी बैंकों में खाते रखेंगे, जिसपर सुरक्षा एजेंसिया किसी भी समय पर नजर डाल सकती हैं.

आखिर कौन नहीं ले सकता विदेशों से फंड?

देश में विधानमंडलों के सदस्य, राजनीतिक दल, सरकारी अधिकारी, जज और मीडिया के लोगों को विदेशों से चंदा लेने पर पाबंदी है.

हालांकि, 2017 में गृह मंत्रालय ने वित्त विधेयक (Money Bill) के जरिए इस नियम में थोड़ा सा संशोधन किया गया था. इसके बाद राजनीतिक दलों के लिए किसी विदेशी कंपनी की भारतीय सहायक कंपनियों या ऐसी विदेशी कंपनियां, जिसमें भारतीयों का शेयर 50 फिसदी या उससे अधिक हो, उनसे चंदा लेने का रास्ता साफ हो गया.

कैसे कर सकते है पैसे का उपयोग

एफसीआरए के तहत पंजीकृत संस्थाएं सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रयोजनों के लिए विदेशों से योगदान ले सकते हैं. इनके लिए सालाना आयकर दाखिल करना अनिवार्य है. इसके अलावा एनजीओ 20 प्रतिशत से अधिक पैसा खुद पर खर्च नहीं कर सकते.

एफसीआरए के तहत एनजीओ के सभी प्रमुख लोगों के पास आधार कार्ड होना जरूरी है. सरकार द्वारा बताए बैंक की शाखा में ही विदेशी अंशदान लिया जा सकेगा. विदेशी अंशदान लेने के बाद इसे किसी और को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा.

2020 के बाद नवीनीकरण में हो रही है परेशानी

एफसीआरए के नियमों में वर्ष 2020 में हुए बदलावों की वजह कई सभी एनजीओ को नवीनीकरण को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मदर टेरेसा द्वारा बनाये गये देश के बड़े एनजीओ में से मिशनरीज ऑफ चैरिटी के एफसीआरए प्रमाणपत्र का नवीनीकरण करने से मना कर दिया है.

हालांकि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के एफसीआरए पंजीकरण के नवीनीकरण से केंद्र सरकार के इंकार के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपने सभी जिलाधिकारियों को ये सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि राज्य में कार्यरत ‘मिशनरीज आफ चैरिटी’ की किसी भी इकाई को काम करने में दिक्कत और कोष का संकट ना हो. नवीन पटनायक ने कहा कि जरूरत पड़े तो मुख्यमंत्री राहत कोष का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

कितने एनजीओ है एफसीआरए के तहत पंजीकरत

भारत में अभी एफसीआरए के तहत कुल 22 हजार 762 गैर सरकारी संगठन पंजीकृत थे. लेकिन 1 जनवरी 2022 को यह संख्या घटकर 16,908 रह गई क्योंकि गृह मंत्रालय द्वारा 5 हजार 933 एनजीओ ने काम करना बंद कर दिया था.

क्या है एफसीआरए निलंबन का मतलब?

एफसीआरए लाइसेंस के निलंबन का मतलब है कि ये गैर-सरकारी संगठन अब विदेशी दाताओं से धन प्राप्त नहीं कर सकेंगे, जब तक कि गृह मंत्रालय द्वारा जांच पूरी नहीं की जाती है.

क्या है विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020?

केंद्र सरकार द्वारा 2020 में पास किये गये विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 के अनुसार कुछ लोगों पर विदेशी अंशदान स्वीकार करने पर रोक लगा दी गई है. 2020 में आया संशोधित अधिनियम लोक सेवकों को विदेशी अंशदान प्राप्त करने से रोकता है.

इस संशोधित विधेयक के अनुसार लोक सेवक में वे सभी व्यक्ति शामिल हैं, जो सरकार की सेवा में या वेतन पर कार्यरत हैं या फिर जिन्हें किसी लोक सेवा के लिये सरकार से मेहनताना मिलता है. 

2020 में संशोधित विधेयक के अनुसार प्रशासनिक उद्देश्यों के लिये विदेशी अंशदान के उपयोग में कमी कर दी गई है. अधिनियम के अनुसार, प्राप्त कुल विदेशी धन के 20 फिसदी से अधिक का उपयोग प्रशासनिक खर्चों के लिये नहीं किया जा सकता है. विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक,  2010 में यह सीमा 50 फिसदी थी.