जानिए, टिड्डियों के बारे में जिससे परेशान है गुजरात के किसान

जानिए, टिड्डियों के बारे में जिससे परेशान है गुजरात के किसान - Panchayat Times
Source:- Internet

नई दिल्ली. आज कल गुजरात में पाकिस्तान की सीमा से लगे क्षेत्रों में टिड्डीं दल ने हमला किया हुआ है. इससे बनासकांठा सहित जिले की कई तहसीलों के किसानों की फसलों के नुकसान का एक बड़ा संकट मंडरा रहा है. हालात को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार के साथ ही भुवनेश्वर की टीम भी आ पहुंची है. कृषि अधिकारियों ने दावा किया है कि छह गांवों के 20 हेक्टेयर में फैली टिड्डियों का नाश कर दिया गया है. किसानों में टिड्डियों के अंडे से भविष्य में होने वाले नुकसान की चिंता भी है.

क्या है ये टिड्डीं

टिड्डीं मुख्यत एक प्रकार के बड़े उष्णकटिबंधीय कीड़े होते है जिनके पास उड़ने की अतुलनीय क्षमता होती है. ये व्यवहार बदलने कि अपनी क्षमता मैं अपनी प्रजाती के अन्य कीड़ो से अलग होते हैं. और लंबी दूरी तक पलायन करने के लिये बड़े-बड़े झुंड का निर्माण करते हैं. टिड्डियों की जाती में रेगिस्तानी टिड्डियो को सबसे खतरनाक और विनाशकारी माना जाता है. आमतौर पर जून और जुलाई के महीने में इन्हें आसानी से देखा जाता है क्योंकि ये गर्मी और बारिश के मौसम में ही ये सक्रिय होते हैं. सामान्य तौर पर ये एक दिन में 150 किलोमीटर तक उड़ सकती है. यदी बारिश अच्छी होती है और परिस्थितयां इनके अनुकूल रहती है तो इनमें तेजी से प्रजनन करने कि क्षमता भी होती है और ये तीन महीने में 20 गुना तक बढ़ सकते है.

इन टिड्डियों का दल पाकिस्तान और राजस्थान की सीमा से गुजरात में घुसा है. इसके अक्रमण से फसलों के नुकसान को लेकर किसान काफी चिंतित है. दक्षिण गुजरात को छोड़कर उत्तरी गुजरात में बुवाई के काबिल बरसात नहीं होने से पहले ही किसान परेशानी से घिरे हुए हैं. वहीं, टिड्डियों के आक्रमण से उनकी समस्या और बढ़ गई है. दूसरी और राज्य सरकार ने टिड्डियों को नियंत्रित करने के लिए दवाई छिड़काव का बड़े स्तर पर अभियान शुरू कर दिया है.

केंद्र सरकार ने 11 टीमें भेजी गुजरात

वहीं पाकिस्तान की तरफ से टिड्डियों के हमले से फसलों को हो रहे नुकसान से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 11 टीमें गुजरात भेजी हैं. टिड्डियों के दल ने राजस्थान में भी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है और राज्य को केंद्र की मदद का इंतजार है. केंद्र व राज्य सरकार की टीम गुजरात में टिड्डीयों के नियंत्रण में जुट गई है. जो टिड्डियों से बचाव के लिए कीटनाशकों के छिड़काव सहित अन्य आवश्यक कदम उठाएंगे और जब तक समस्या का हल नहीं हो जाता, यह टीमें राज्य में ही बनी रहेंगी.

इस दौरान आशंका व्यक्त की गई है कि यदि टिड्डियों ने अंडे दिए होंगे तो 15 दिनों बाद एक बार फिर हमला हो सकता है. इसके मद्देनजर किसानों को आगाह किया जा रहा है कि वे टिड्डियों के अंडे दिखने पर इसकी जानकारी तुरंत प्रशासन को दें. खतरे को भांपते हुए राज्य सरकार ने टिड्डियों के आक्रमण को नियंत्रित करने के लिए भुवनेश्वर से अधिकारियों की टीम बुलाई है. इन अधिकारियों ने 1993 में भी इसी प्रकार के आक्रमण को नियंत्रित किया था. इन अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को आश्वस्त किया है कि अब टिड्डियों का खतरा टल गया है.

पांच जिले सबसे ज्यादा प्रभावित

उत्तरी गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, कच्छ, पाटन और साबरकांठा जिलों में पिछले कुछ दिनों में टिड्डियों ने सरसों, अरंडी, सौंफ, जीरा, कपास, आलू, गेहूं और जटरोफा की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है.

बुधवार को वडोदरा की अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने कहा था कि केंद्र सरकार ने इन टीमों को टिड्डियों से बचाव के लिए राज्य में भेजा है और राज्य सरकार भी इसका हल खोज रही है. उन्होंने कहा कि कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन का उपयोग करने के बारे में विचार किया जा रहा है.

फसलों/वनस्पति के लिए खतरा
एक व्यस्क टिड्डी प्रतिदिन अपने वजन के बराबर भोजन (लगभग 2 ग्राम वनस्पति प्रतिदिन) खा सकती है. जिसके
कारण ये फसलो और खाद्यान्नों के लिये बड़ा खतरा बन जाते हैं. यदि इनसे होने वाले संक्रमण को समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो गंभीर परिस्थतिया उत्पन्न हो जाती हैं.

भारत में टिड्डीयों के प्रकार :-

भारत में टिड्डियो की मुख्यत चार प्रजाति पाई जाती हैं :-

रेगिस्तानी टिड्डी (Desert Locust)

प्रवासी टिड्डी ( Migratory Locust)

बॉम्बे टिड्डी (Bombay Locust)

ट्री टिड्डी (Tree Locus