जानें, लाॅकडाउन में स्ट्रीट फूड बेचने वालों का क्या है हाल

जानें, लाॅकडाउन में स्ट्रीट फूड बेचने वालों का क्या है हाल
साभार इंटरनेट

रांची. इन तस्वीरों को देखकर अगर आपका चाइनीज, समोसा, चाट, गोलगप्पा खाने का मन कर रहा है, तो अब रेस्टोरेंट खुल गये हैं. स्विगी, जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म से आप बाहर का खाना घर पर मंगवा सकते हैं लेकिन स्ट्रीट फूड का स्वाद मिलने में वक्त लगेगा हालांकि कई जगहों पर, गलियों में आपको चाट, पापड़ी के ठेले नजर आ जायेंगे लेकिन वहा पर पहले के मुकाबले अब कम ग्राहक नजर आते हैं.

इस तरह के ठेले और छोटी दुकान लगाने वाले क्या सोचते हैं ? इस लॉकडाउन में उनकी क्या स्थिति है ? आइये जानते हैं

2) शिवा महली का कहना है कि वह इस लॉकडाउन में अपने पिता का हाथ बटा रहे हैं.
शिवा क्लास 9 के छात्र हैं, शिवा महली के पिता विजय महली पिछले 20-25 साल से मोरहाबादी में फास्ट फूड का ठेला लगते थे.आज ऐसी स्थिति हो गयी है खाने के लिए मोहताज हो गये हैं.

शिवा महली

शिवा बताते हैं परिवार में माता पिता के साथ एक भाई और एक बहन है. फर्स्ट फूड का दुकान बंद हो जाने से घर में में समस्या आने शुरू हो गया. उसके बाद मजबूरन हमें सब्जी बेचना शुरू कर दिया सब्जी बेचने से जो इनकम अभी हो रहा है उससे घर परिवार चल रहा है.

3) राजकुमार पिछले 10 सालों से चाय का स्टॉल लगा रहे हैं. राजकुमार से बात करने पर उन्होंने कहा कि साहब हम 2 महीना से बैठे हैं, हमारे तीन बच्चे छोटे-छोटे बच्चे हैं बीवी है रेंट में रहते हैं. हम गरीब हैं हम पैसा कहां से लाएंगे. जहां हम रहते हैं मालिक बोल रहा है पैसा दो नहीं तो रूम खाली करों. इस स्थिति में हम अपने पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं. जो थोड़ा बहुत पैसा था वह भी खत्म हो गया है.

राजकुमार

राजकुमार बताया की खाना पीना में बहुत दिक्कत हो रहा है. राशन कार्ड में नाम होने के वजह से चावल मिल पा रहा है लेकिन तेल सब्जी और जरूरत की समाने के लिए पैसा नहीं है मजबूरन हमें साग सब्जी बेचकर गुजारा चलाना पड़ रहा है.

4) पंकज कुमार मोराबादी में 20-25 सालों से चना भूंजा दुकान (किस्को) का दुकान है. पहले इस दुकान में पिता काम करते थे और अब हम इस दुकान को चला रहे हैं. हमारे परिवार में 15 सदस्य हैं घर में बूढ़ी माता और बूढ़े पिता है उन लोगों के लिए दवाई की सबसे बड़ा समस्या है. इसके साथ में बाल बच्चा और भाई के बच्चों को भी देखना पड़ता है.

पंकज कुमार

पंकज आगे बताते हैं कि दुकान बंद होने से हम गरीब पूरी तरह से टूट चुके हैं. अगर कुछ दिन और लॉकडाउन रहा तो हम सभी सड़क पर आ जाएंगे. जो कुछ भी इतने सालों में बचा बचा कर अपने बच्चों के लिए उच्च शिक्षा के लिए रखे हुए थे वह भी इन 2 महीना में खत्म हो चुका है. सरकार के द्वारा छूट मिलने के बाद राहत मिली है और हम कल से दुकान लगा रहे हैं अब जब थोड़ी बहुत बिक्री शुरू हुआ तो अब राहत की सांस लिया हूं.

रंजन कुमार ने बताया कि हम अंडा चौमिन का ठेला लगाया करते थे लॉकडाउन में सब बंद है जब से शराब की दुकान खुली है हम राहत में हैं. शराब की दुकान खोलने के बाद हम भी अंडा का ठेला लगाना शुरू किया हूं.

रंजन कुमार