जानिए क्या है वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना और इससे देश के 23 करोड़ ज्यादा राशन कार्ड धारकों और 80 करोड़ के करीब व्यक्तिगत लाभार्थियों को कितना होगा फायदा

जानिए क्या है वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना और इससे देश के 23 करोड़ ज्यादा राशन कार्ड धारकों और 80 करोड़ के करीब व्यक्तिगत लाभार्थियों को कितना होगा फायदा - Panchayat Times
A beneficiary receiving Ration under One Nation One Ration card in Ranchi

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने 29 जून को निर्देश दिया कि देश के सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश 31 जुलाई 2021 तक वन नेशन, वन राशन कार्ड स्कीम लागू करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन राज्यों ने अभी तक वन नेशन वन राशन कार्ड की स्कीम लागू नहीं की है वह 31 जुलाई तक इस स्कीम को लागू करें.

प्रवासी मजदूर और राशन

कोरोना वायरस महामारी की दो खतरनाक लहरों के बाद बेरोजगार प्रवासी मजदूरों के सामने दो वक्त की रोटी (Food Security) और आय सुरक्षा (Income Security) दो प्रमुख चिंताओं के रूप में सामने आये है.

ऐसे में देश में खाद्य सुरक्षा की समस्या से निपटने के लिये केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ (One Nation One Ration Card- ONORC) योजना की शुरुआत की है. वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना के तहत लाभार्थी को उसका राशन कार्ड चाहे देश के किसी भी हिस्से का हो वो देश में कहीं से भी अपने हिस्से का राशन ले सकते है.

वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना की अभी क्या है स्थिति

28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों की 5,45,580 उचित मूल्य की दुकानों (FPS) में से 4,88,832 दुकानों में ई-प्वाइंट ऑफ सेल (e-POS) मशीन को लगाया जा चुका, 22.11 करोड़ राशन कार्ड होल्डर्स, 72 करोड़ 45 लाख व्यक्तिगत लाभार्थियों को अभी तक मैनुअल सिस्टम से डिजिटिल सिस्टम से जोड़ा जा चुका है.

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act- NFSA), 2013 के तहत खाद्य सब्सिडी के पूरा कार्यान्वयन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के डिजिटलीकरण पर निर्भर करता है जो 5.46 लाख उचित मूल्य की दुकानों (Fair-Price Shops- FPS) के नेटवर्क से सीधा संबध रखता है. इसे आधार (Aadhar) के द्वारा प्रमाणित और जांचे हुए डेटा के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा.

कैसे रखा जाता है हिसाब

सार्वजनिक वितरण प्रणाली का एकीकृत प्रबंधन (Integrated Management of Public Distribution System- IMPDS) पोर्टल के तहत की गई सभी खरीद को दर्ज करता है. जिससें ये पता चलता रहता है कि कहां पर कितना स्टाक है.

एक देश एक राशन कार्ड के लाभ

पहले राशन कार्डधारक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सब्सिडी युक्त राशन की अपनी पात्रता का लाभ केवल संबंधित राज्य के अंदर निर्धारित उचित मूल्य की दुकान (FPS) से ही प्राप्त कर सकते थे.

यदि कोई लाभार्थी किसी दूसरे राज्य में प्रवास या पलायन करता है तो उसे उस दूसरे राज्य में नए राशन कार्ड के लिये आवेदन करना होता है. एक देश एक राशन कार्ड योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद देश के किसी भी हिस्से बने राशनकार्ड का लाभ कोई कहीं से भी ले सकता है.

37% आबादी प्रवासी श्रमिकों की

एक अनुमान के अनुसार देश की लगभग 37% आबादी प्रवासी श्रमिकों की है. इसलिये यह योजना उन सभी लोगों के लिये महत्त्वपूर्ण है जो रोजगार या फिर अन्य कारणों से एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर पलायन करते हैं.

एक देश एक राशन कार्ड से सरकार का मकसद रिसाव यानि लीकेज को भी कम कर सकता है क्योंकि इस योजना की पूर्व शर्त नकली/डुप्लिकेट राशन कार्डों की पहचान करना या डी-डुप्लीकेशन है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि एक ही व्यक्ति देश के दो अलग-अलग स्थानों पर तो लाभ नहीं ले रहा है.

गांवों की और हुआ बड़ी संख्या में पलायन

कोरोना वायरस महामारी के चलते भारत समेत पूरी दुनिया बड़े स्तर पर बदलाव देखे गये है. कोरोना के चलते भारत के बड़े तबके के सामने ‘जीवन बनाम आजीविका’ की बड़ी समस्या उत्पन्न हुई है. कोरोना महामरी का सबसे बड़ा प्रभाव प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है. जैसे ही कोरोना के चलते लॉकडाउन लगाया गया था इसके साथ ही बड़ी संख्या में शहरों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों ने अपने गांवों की और जाना शुरू कर दिया था.

चुनौतियां भी कम नही

आधार से जोड़े गये राशन कार्ड और स्मार्ट कार्ड के माध्यम से इस सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) प्रक्रिया के डिजिटलीकरण को लीकेज कम करने के प्रयास के तहत आगे बढ़ाया गया है. हालांकि आधार से राशनकार्ड जोड़ देने के बाद बहुत सारे लोगों के नाम या तो जुड़ नही पाये है या उनके डेटा में कुछ गड़बडी के चलते नही जुड़े है ऐसे में मामलों में काफी वृद्धि हुई है.

समाज के कई वर्ग ऐसे हैं जिनके पास अभी भी आधार कार्ड नहीं है और इस कारण वे खाद्य सुरक्षा से वंचित हो रहे हैं.