[vc_row css=”.vc_custom_1519192414147{background-image: url(https://www.panchayattimes.com/wp-content/uploads/2017/06/2767819c2f17cafab03fbb84031e72f5.jpg?id=12482) !important;}”][vc_column][vc_column_text]कोल्हान प्रमंडल के अंतर्गत तीन जिले आते हैं. सरायकेला खरसावाँ, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंह सिंहभूम. इस प्रमंडल में झारखण्ड का सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र है तथा यहाँ लौह अयस्क, कॉपर, और यूरेनियम भारी मात्रा में पाए जाते हैं, तथा सोने के भी खान इस क्षेत्र में मौजूद हैं. वहीँ इस प्रमंडल के अंतर्गत पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर तथा टाटा के नाम से भी पूरे विश्व में जाना जाता है. 1907 ईसवी में जमशेद नौशारवांजी टाटा ने यहाँ पर टाटा स्टील एंड आयरन कम्पनी की स्थापना की थी जिसका आकार आज पूरे विश्व में काफी बड़ा हो गया है.वहीं यहाँ पर टाटा घराने की कई कंपनियों के उत्पादन इकाई जैसे टिस्को, टाटा मोटर्स, टिस्कॉन, टिन्पलेट, टिमकन, ट्यूब डिवीजन, इत्यादि यहाँ कार्यरत है. टाटा कम्पनी के अलावा भी आज यहाँ पर कई बड़ी कंपनियों के उद्योग लगे हुए हैं. टाटानगर पूरे देश में प्लांड सिटी की एक मिसाल है क्योंकि उस ज़माने में इस शहर को काफी अच्छे ढंग से बसाया गया था. उच्च शिक्षण संस्थानों में यहाँ पर नेशनल इंस्टिट्यूट और टेक्नोलॉजी और XLRI जैसे संस्थान हैं.
पश्चिम सिंहभूम झारखंड का सबसे पुराना जिला है. 1837 में कोल्हन पर ब्रिटिश विजय के बाद, एक नए जिले को सिंहभूम उभर कर आया जिसका मुख्यालय चाईबासा है. इसके बाद पूर्व सिंहभूम, प सिंहभूम और सराइकेला-खारसावाँ के तीन जिले सिंहभूम एक साथ आये और चाईबासा मुख्यालय के रूप में बनाए गए हैं. पश्चिमी सिंहभूम झारखण्ड राज्य का सबसे बड़ा जिला है तथा विश्व की सबसे प्रसिद्ध जंगलों में एक सारंडा जंगल इसी जिले के अंतर्गत आता है और आज भी यह इलाका खनिज सम्पदा से भरपूर होने के बाद भी काफी पिछड़ा हुआ है. इस प्रमंडल के तीसरे जिले सरायकेला खरसावाँ की बात करें तो यह पश्चिमी सिंहभूम को काटकर बनाया गया है और यह 2001 में अस्तित्व में आया.
झारखण्ड के राजनीति के हिसाब से यह प्रमंडल काफी महत्वपूर्ण है. इस प्रमंडल से झारखण्ड के वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास तथा पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा आते हैं. वहीँ इस प्रमंडल में दो लोकसभा सीटें है और 14 विधानसभा सीटें हैं. 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा की झोली में दोनों सीटें गयी थी वहीँ विधानसभा चुनावों में भाजपा को यहाँ पर अच्छे परिणाम नहीं मिले. भाजपा ने यहाँ पर 13 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे पांच सीटों पर ही जीत मिली, यहाँ तक की अर्जुन मुंडा को भी हार का सामना करना पड़ा था. वहीँ एक विधानसभा पर विधानसभा पर एनडीए की सहयोगी आजसू से चुनाव लड़ा था जहाँ उसे जीत मिली थी.[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row]