शाही स्नान के साथ शुरू हुआ कुम्भ, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं

कुम्भ नगर (प्रयागराज ). राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कुम्भ के पहले शाही स्नान पर देश और दुनिया से आए श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं. मकर संक्रांति के मौके पर शाही स्नान के साथ ही प्रयागराज में कुम्भ का शंखनाद हो गया है. 45 दिन तक चलने वाले इस मेले में देश और दुनिया से 12 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संदेश में कहा ‘कुम्भ मेले के शुभारम्भ पर सभी देशवासियों, तीर्थयात्रियों और पूरी दुनिया से आए अतिथियों को मेरी बधाई. कुम्भ हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस भव्य आयोजन की व्यवस्था के लिए केंद्र और उत्त‍र प्रदेश सरकार की मैं सराहना करता हूं.’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा ‘प्रयागराज में आरंभ हो रहे पवित्र कुम्भ मेले की हार्दिक शुभकामनाएं. मुझे आशा है कि इस अवसर पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विविधताओं के दर्शन होंगे. मेरी कामना है कि अधिक से अधिक लोग इस दिव्य और भव्य आयोजन का हिस्सा बनें.’

किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी शाही स्नान की सवारी में

जूना के साथ किन्नर अखाड़ा ने भी किया शाही स्नान

प्रयाग कुम्भ के पहले शाही स्नान पर जूना अखाड़ा के साथ किन्नर अखाड़े के संन्यासियों ने भी मंगलवार को पवित्र संगम में डुबकी लगाई. जूना अखाड़े के साथ आवाहन और अग्नि अखाड़े ने भी परंपरागत तरीके से आज शाही स्नान किया.

मकर संक्रांति के अवसर पर प्रथम शाही स्नान के साथ तीर्थराज प्रयाग में संगम की रेती पर कुम्भ मेले की आज औपचारिक शुरुआत हुई. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और कुम्भ मेला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से तय समय के अनुसार सबसे पहले महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के सन्यासियों ने शाही स्नान किया.
इसके बाद निरंजनी और आनंद अखाड़े के संन्यासी शाही स्नान के लिए संगम तट पर पहुँचे. फिर आवाहन, अग्नि और किन्नर अखाड़े के साथ जूना अखाड़े के सन्यासियों ने शाही स्नान किया.

कुम्भ के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब किन्नर अखाड़े ने आधिकारिक रुप से शाही स्नान में भाग लिया. दरअसल किन्नर अखाड़े को लेकर पिछले कई वर्षों से अखाड़ा परिषद में अंर्तद्वंद की स्थिति बनी हुई थी. इसी बीच शाही स्नान से दो दिन पहले जूना अखाड़ा ने किन्नर अखाड़े को अपने साथ शाही स्नान करने की मान्यता दी. संगत के पवित्र संगम तट पर अखाड़ों के शाही स्नान का सिलसिला जारी रहा. पूर्व निर्धारित क्रम के अनुसार कुल 13 अखाड़ों के शाही स्नान का यह सिलसिला शाम करीब पांच बजे तक जारी रहेगा. सबसे अंत में निर्मल अखाड़ा के संत शाही स्नान करेंगे.

किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी साथी सन्यासियों के साथ

उल्लेखनीय है कि कुम्भ पर्व हिन्दू सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है. जिसमें करोड़ों श्रद्धालु कुंभ पर्व स्थल हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं. इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष और प्रयागराज में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ होता है. 2013 का कुंभ प्रयागराज में हुआ था. 2019 में प्रय़ागराज में अर्धकुंभ मेले का आयोजन फिर से हुआ है.

मान्यता है कि मकर संक्रान्ति के दिन सूर्य और चन्द्रमा वृश्चिक राशि में और बृहस्पति, मेष राशि में प्रवेश करते हैं. इस योग को कुम्भ स्नान योग करते है. इस दिन को विशेष मंगलकारी माना जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन पृथ्वि से उच्च लोकों के द्वार इस दिन खुलते हैं और इस प्रकार इस दिन स्नान करने से आत्मा को उच्च लोकों की प्राप्ति सहजता से हो जाती है.

यहां स्नान करना साक्षात स्वर्ग दर्शन माना जाता है. इस परम्परा के तहत करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए संगम नगरी में डेरा जमाये हुए हैं. मकर संक्रांति पर्व से लेकर पूरे एक माह तक करोड़ों हिन्दू पूरी आस्था के साथ गंगा स्नान कर दान पुण्य करेंगे.

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सत्रह श्रृंगार कर नागा सन्यासियों ने शाही स्नान किया

कुम्भ मेला के मकर संक्रान्ति पर्व पर नागा सन्यासी सज-धज कर एवं सत्रह श्रृंगार कर मां गंगा से मिलने (शाही स्नान) की खुशी में उछलते-कूदते चलते हैं, जैसे बच्चे अपनी मां को देखकर। इस प्रकार मंगलवार को नागा सन्यासियों ने शाही स्नान किया.

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि का कहना है कि लोग नित्य क्रिया के बाद खुद को शुद्ध करने के लिए गंगा स्नान करते हैं लेकिन नागा सन्यासी शुद्धीकरण के बाद एवं सज-धज कर अपने सत्रहों श्रृंगार करने के बाद ही शाही स्नान करते हैं. नागा सन्यासी अपने पूरे शरीर पर भभूत मलते हैं, इसके बाद पंचकेश होता है. अगर सन्यासी बाल रखता है तो संवारता है और नहीं रखता तो उसे साफ करता है. इसके बाद नागा रोरी, तिलक और चंदन से खुद को सजाते हैं. जैसे महिलाएं गहने धारण करती हैं तो नागा सन्यासी हार की जगह रूद्राक्ष की माला, चूड़ी की जगह कड़ा, चिमटा, डमरू और कमंडल आदि धारण करते हैं.

श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा के श्री महंत का कहना है कि शाही स्नान के पूर्व नागा सन्यासी पूरी रात जागते हैं और पूरे विधि विधान से अस्त्र-शस्त्र को सुसज्जित कर पूजा पाठ किया जाता है. शाही स्नान से पूर्व धर्म ध्वजा के तहत पर्व ध्वजा भी फहराई जाती है.

कुम्भ मेले की भव्यता में चार चांद लगा रहे साइबेरियाई पक्षी

प्रयागराज स्थित कुम्भनगरी में तीर्थयात्रियों का आना जारी है, वहीं जीव-जन्तुओं और पक्षियों ने भी यहां अपना डेरा जमा लिया है. साइबेरिया से आए हुए लाखों की संख्या में साइबेरियाई पक्षी पूरी त्रिवेणी संगम को अपनी चहचाहट से सराबोर कर कुम्भ नगरी की भव्यता को बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

कुम्भ नगरी को इस बार इस कदर सजाया गया है की मानो पौराणिक काल से चले आ रहे कुम्भ को छायाचित्रों से ही पूरे इतिहास को बता दिया गया हो. हिन्दुओं की आस्था के लिए बना ये कुम्भ हर रोज श्रद्धालुओं को कुछ नई अनुभूति करा रहा है. इस अनुभूति को करने के लिए लोगों ने मन बना लिया है और देश और विदेश से लोग यहां आ रहे हैं. इतना ही नहीं इस अनुभूति को सिर्फ मनुष्य ही नहीं लेना चाहता है, बल्कि उनके साथ ही जीव-जन्तु और पक्षी भी लेने को आतुर हैं. ऐसा ही कुछ दृश्य संगम तट पर देखने को मिला रहा है.

हर साल की तरह इस साल भी साइबेरियाई पक्षियों का आना यहां शुरू हो गया है. लाखों की संख्या में ये पक्षी यहां पहुंच चुके हैं. यहां पहुंच कर इन्होंने अपना डेरा भी जमा लिया है. दूर देश से आए इन पक्षियों को अपना मेहमान समझने वाले श्रद्धालु भी इन पक्षियों को उतना ही प्यार दे रहे हैं, जितना एक इंसान अपने घर में आए मेहमान का करता है.