हड्डियां गलाने वाली ठंड में ऐसे रहते हैं लाहौल-स्पीतिवासी

शिमला. हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. पारा जमाव बिंदु से काफी नीचे चला गया है. बीते मंगलवार की रात को जिला मुख्यालय कैलांग में न्यूनतम तापमान शून्य से 15 डिग्री नीचे रिकॉड किया गया. भीषण ठंड से पूरे लाहौल-स्पीति जिले में प्राकृतिक जल स्त्रोत बर्फ में तब्दील हो गए हैं और सर्दी का सामान्य जनजीवन पर खासा असर देखा जा रहा है.

बीते दिनो में हुई भारी बर्फ़बारी के बाद हिमाचल के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में इन दिनों पारा शून्य से 20 डिग्री तक नीचे तक गिर गया है. लाहोल-स्पीति के कई उपरी इलाकों में तो पारा शून्य से 25 डिग्री माइनस में भी पहुंच गया है. जबरदस्त ठंड के कारण नदी-नाले, झील और झरने सब जम गए हैं.

ये भी पढे़ं- शिमला में माइनस है तापमान, देवभूमि में कई जगह बर्फबारी

कड़ाके की ठंड के कारण पेयजल पाइप भी जम गए हैं. बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि सरकारी महकमो में कमरों को गर्म रखने के लिए प्रशासन ने एलपीजी हीटर का प्रबंध किया है. बीती रात लाहौल के कोकसर गांव में तापमान माइनस 20 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है. जबकि जिला मुख्यालय कैलांग में तापमान शून्य से 15 डिग्री दर्ज हुआ है.

ज़्यादातर दुकाने बंद

दिन के समय भी बादल छाए रहने से सूर्य की तपिश भी काफी कम हो गयी है. दिन के समय भी सर्द हवाओं ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. दोपहर में तापमान शून्य से 5 से 7 डिग्री तक रह रहा है. ठंड के कारण कैलांग के मेन बाजार में लोगों की चहलकदमी काफी कम हो गयी है. बाज़ार की ज़्यादातर दुकाने बंद पड़ी हुई है. ठंड के कारण सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की मौजूदगी भी घट गई है.

दिसम्बर में ही ठंड से हर कोई परेशान

स्थानीय लोगों के मुताबिक ठंड से स्थानीय जनजीवन बहुत प्रभावित हुआ है. तापमान शून्य से 20 डिग्री तक माइनस में पहुंच गई है. अभी तक जनवरी में ऐसी ठंड हुआ करती थी लेकिन इस बार दिसम्बर में ही ठंड से हर कोई परेशान है. पानी के सभी स्त्रोत जम गए हैं जिसके बाद यहां पानी की खासी कमी हो गयी है. लोगों को काफी दूर जाकर पीने के लिये पानी लाना पड़ रहा है. बच्चों को भी स्कूल आने-जाने में काफी दिक्कतें हो रही हैं.

यहां रहना एक बड़ी चुनौती

पिछले कुछ दिनों में तापमान में भारी गिरावट हुई है. दिन के समय तो हालात फिर भी ठीक है लेकिन शाम ढलते ही ठंड और बढ़ जाती है. जबरदस्त ठंड से शाम 5 बजे के बाद पानी की पाइपें जमना शुरू हो जाती हैं. हालांकि ठंड को देखते हुए स्थानिय लोगों ने हीटर, तंदूर का इंतजाम पहले से ही किया हुआ है. यहां के हालात को देख के कहा जा सकता है कि पहाड़ देखने में खूबसूरत जरूर लगते हैं पर यहां रहना एक बड़ी चुनौती है. जिसे स्वीकार कर लाहौलवासी यहां अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं.