जानें, टपक सिंचाई के लाभ

जानें, टपक सिंचाई के लाभ-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

नई दिल्ली/ रांची. टपक सिंचाई वह प्रणाली है जिसमें पानी की बूंद-बूंद फसलों के जड़ तक पहुंचाया जाता है. इसके साथ ही एक छोटी व्यास की प्लास्टिक पाइप भी उपयोग में लाया जाता है. इस सिंचाई विधि का आविष्कार सबसे पहले इजराइल में हुआ था. जिसका प्रयोग आज दुनिया के अनेक देशों में हो रहा है. इस विधि में जल का उपयोग सस्ता होता है. जिससे सतह वाष्पन एवं भूमि रिसाव से जल की हानि कम से कम होती है.

सिंचाई की यह विधि सूख क्षेत्रों के लिए अत्यन्त ही उपयुक्त होती है. जहां इसका उपयोग फल बगीचों की सिंचाई के लिए किया जाता है, टपक सिंचाई ने लवणीय(खारा) भूमि पर फल बगीचों को सफलतापूर्वक उगाने को संभव कर दिखाया है. इस सिंचाई विधि में उर्वरकों को घोल के रूप में भी प्रदान किया जाता है. टपक सिंचाई उन क्षेत्रों के लिए अत्यन्त ही उपयुक्त है. जहां जल की कमी होती है, खेती की जमीन असमतल होती है और सिंचाई प्रक्रिया खर्चीली होती है.

टपक सिंचाई के होते हैं ये लाभ

जल उपयोग दक्षता 95 प्रतिशत तक होती है.

इस सिंचाई विधि में जल के साथ-साथ उर्वरकों को अनावश्यक बर्बादी से रोका जा सकता है.

विधि से सिंचित फसल की तीव्र वृद्धि होती है फलस्वरूप फसल शीघ्र परिपक्व होती है.

खर-पतवार नियंत्रण में अत्यन्त ही सहायक होती है क्योंकि सीमित सतह नमी के कारण खर-पतवार कम उगते हैं.

टपक सिंचाई विधि अच्छी फसल विकास के लिए आदर्श मृदा नमी स्तर प्रदान करती है.

इस सिंचाई विधि में कीटनाशकों एवं कवकनाशकों के धुलने की संभावना कम होती है.

लवणीय जल को इस सिंचाई विधि से सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा सकता है.

इस सिंचाई विधि में फसलों की पैदावार 150 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

पारम्परिक सिंचाई की तुलना में टपक सिंचाई में 70 प्रतिशत तक जल की बचत की जा सकती है.

इस सिंचाई विधि के माध्यम से लवणीय, बलुई एवं पहाड़ी भूमियों को भी सफलतापूर्वक खेती के काम में लाया जा सकता है.

टपक सिंचाई में मृदा अपरदन की संभावना नहीं के बराबर होती है, जिससे मृदा संरक्षण को बढ़ावा मिलता है. यह भी पढ़ें जीवामृत बनाने का सबसे आसान तरीका भारत में टपक सिंचाई पिछले 15 से 20 वर्षों में टपक सिंचाई विधि की भारत के विभिन्न राज्यों में लोकप्रियता बढ़ी है. आज देश में 3.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल टपक सिंचाई के अन्तर्गत आता है जो कि 1960 में मात्र 40 हेक्टेयर था.

भारत में टपक सिंचाई के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले मुख्य राज्य महाराष्ट्र (94 हजार हेक्टेयर), कर्नाटक (66 हजार हेक्टेयर) और तमिलनाडु (55 हजार हेक्टेयर) हैं.

भारत में टपक सिंचाई

पिछले 15 से 20 वर्षों में टपक सिंचाई विधि की भारत के विभिन्न राज्यों में लोकप्रियता बढ़ी है. आज देश में 3.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल टपक सिंचाई के अन्तर्गत आता है जो कि 1960 में मात्र 40 हेक्टेयर था. भारत में टपक सिंचाई के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले मुख्य राज्य महाराष्ट्र (94 हजार हेक्टेयर), कर्नाटक (66 हजार हेक्टेयर) और तमिलनाडु (55 हजार हेक्टेयर) हैं.

माध्यमPT DESK
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