धनबाद: बढ़ते प्रदूषण को लेकर ग्रामीण एकता मंच का प्रशासन को पत्र

धनबाद: बढ़ते प्रदूषण को लेकर ग्रामीण एकता मंच का प्रशासन को पत्र - Panchayat Times

धनबाद/पुटकी. ग्रामीण एकता मंच के अध्यक्ष रंजीत सिंह उर्फ बबलू सिंह ने एक पत्र प्रेषित किया है. महाप्रबंधक सिजुआ के उपायुक्त धनबाद, डीजीएमएस धनबाद, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड धनबाद प्रयोजन पद अधिकारी बासुदेवपुर कोलरी एवं केंदुआ थाना प्रभारी को अपने पत्र में सिंह ने कहा कि देश में धनबाद जिला सबसे प्रदूषित शहर के रूप में जाना जा रहा है. इस जिले को प्रदूषण के मामले में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ.  

इसका मुख्य कारण बीसीसीएल के द्वारा नियमों का पालन नहीं करना ओपन कास्ट को बढ़ावा देना इसका जीता जागता उदाहरण बासुदेवपुर कोलावरी में के अंतर्गत चल रहे. आउटसोर्सिंग कंपनी संजय उद्योग प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा भारी पैमाने पर प्रदूषण फैलाया जा रहा है. और कर केंद्र केंदुआ के नाली का पानी भी रोक दिया गया.  जिससे महामारी फैलने की आशंका बढ़ गई है. इन्हीं सब मुद्दों को लेकर 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया अगर इन सभी मांगों को 15 दिनों के भीतर पूरा नहीं करता है. तो ग्रामीण एकता मंच इस संबंध में कोई भी कड़क कदम उठाने के लिए बाध्य होगा.

धनबाद: बढ़ते प्रदूषण को लेकर ग्रामीण एकता मंच का प्रशासन को पत्र - Panchayat Times

आपको बताते चलें कि सिंह पर्यावरण और प्रदूषण को लेकर सड़क से लेकर वो न्यायालय तक में लड़ाई लड़ रहे है. अवैध वृक्ष कटाई को लेकर 2008 में पीआईएल दर्ज कराए थे. जिसमें सुनवाई के उपरांत 134 हेक्टेयर में  बीसीसीएल को पौधारोपण करना पड़ा था. उस समय से एक कानून भी पास हुआ था, कि बगैर अनुमति के आप एक भी वृक्ष नहीं काट सकते 2019 में भी प्रदूषण को लेकर सिंह ने उच्च न्यायालय झारखंड रांची में पीआईएल दर्ज करा चुके हैं. इस बार प्रदूषण का मुद्दे को लेकर सिंह 2019 में विधानसभा चुनाव भी लड़े थे, और तीसरे स्थान पर रहे थे.

सिंह ने बासुदेवपुर कोलरी के आउटसोर्सिंग कंपनी के द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण का फोटो भी साथ में संलग्न किया है.  साथ ही जो नाली बंद कर दि गई है उसकी भी फोटो दी है. अब एक तरफ तो सफेदपोश नेता अपने जेब भरने में लगे हुए है वहीं ग्रामीण प्रदूषण को लेकर बहुत ही चिंतित है. अब देखना यह है कि हम इस लड़ाई में कितना कामयाब होगें ये तो आने वाला समय बताएगा कि अपने पहुंच और पैसे के बल पर पर या 144 लगवा कर प्रदूषण फैलाने में बीसीसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनी कितने कामयाब होते हैं.