नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखने लगा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें आज से लागू हो गई हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
किस शहर में कितना हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर?
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की वेबसाइट के मुताबिक, देश के प्रमुख महानगरों में 19 किलो कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए दाम इस प्रकार हैं:
कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए रेट
दिल्ली: 2,078.50 रुपये
कोलकाता: 2,208 रुपये
मुंबई: 2,031 रुपये
चेन्नई: 2,246.50 रुपये
इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैटरिंग और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है।
घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने साफ किया है कि 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू सिलेंडर के दाम, सामान्य घरेलू LPG सिलेंडर: 913 रुपये PMUY लाभार्थियों के लिए सिलेंडर: 613 रुपये यानी आम उपभोक्ताओं और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को फिलहाल राहत बरकरार है।
कमर्शियल LPG महंगा क्यों हुआ?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में तेज उछाल है।
मंत्रालय ने बताया कि Saudi Contract Price (CP) मार्च में 542 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था अप्रैल के लिए यह बढ़कर 780 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गया यानी इसमें करीब 44% की भारी बढ़ोतरी हुई है। सरकार के मुताबिक, वैश्विक सप्लाई पर दबाव इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि दुनिया की 20% से 30% LPG सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होरमुज (Strait of Hormuz) में अटकी हुई है।
सरकार ने क्या कहा?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें डीरिगुलेटेड (deregulated) हैं। यानी इनके दाम बाजार के आधार पर तय होते हैं और आमतौर पर हर महीने संशोधित किए जाते हैं।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि:
कमर्शियल LPG का उपयोग मुख्य रूप से उद्योगों और होटलों में होता है
देश में कुल LPG खपत में इसकी हिस्सेदारी 10% से भी कम है
इसका मतलब है कि कीमतों में बढ़ोतरी का असर मुख्य रूप से व्यापारिक और व्यावसायिक सेक्टर पर पड़ेगा।
तेल कंपनियों पर कितना दबाव?
सरकार के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इस समय घरेलू LPG पर प्रति सिलेंडर 380 रुपये की अंडर-रिकवरी झेल रही हैं।
मंत्रालय ने कहा कि मई के अंत तक कुल नुकसान लगभग 40,484 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा:
पिछले साल ऑयल PSU कंपनियों ने करीब 30,000 करोड़ रुपये का बोझ उठाया
वहीं सरकार ने भी करीब 30,000 करोड़ रुपये वहन किए
ताकि अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों का पूरा बोझ आम जनता पर न पड़े।
भारत में LPG अब भी कई देशों से सस्ता
सरकार ने दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल के बावजूद भारत में घरेलू LPG की कीमतें अब भी कई पड़ोसी देशों की तुलना में कम हैं। मंत्रालय के मुताबिक, भारत में घरेलू LPG के दाम पाकिस्तान से कम
श्रीलंका से कम नेपाल से कम यानी सरकार फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश में है।
पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर
पश्चिम एशिया संकट के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
दिल्ली में ईंधन के मौजूदा दाम
पेट्रोल: 94.77 रुपये प्रति लीटर
डीजल: 87.67 रुपये प्रति लीटर
हालांकि मंत्रालय के मुताबिक, तेल कंपनियां अभी भी: पेट्रोल पर 24.40 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 104.99 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी झेल रही हैं। प्रीमियम पेट्रोल पर 2 रुपये की बढ़ोतरी, आम पेट्रोल नहीं हुआ महंगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल ही में 2 रुपये प्रति लीटर की जो बढ़ोतरी हुई है, वह केवल प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट्स पर लागू है, जैसे: XP95,Power95 Speed सरकार के अनुसार, ये हाई-ऑक्टेन परफॉर्मेंस फ्यूल हैं और इनकी कीमतें हर 15 दिन में संशोधित की जाती हैं। इनकी कुल बिक्री में हिस्सेदारी भी काफी कम है। यानी देशभर के पेट्रोल पंपों पर रेगुलर पेट्रोल और डीजल अभी भी पुरानी कीमतों पर ही मिल रहे हैं।
किन लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा होने का असर सबसे ज्यादा इन सेक्टर्स पर पड़ सकता है:
होटल और रेस्टोरेंट
ढाबा और फूड स्टॉल
कैटरिंग बिजनेस
बेकरी और फूड यूनिट्स
छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान
ऐसे में आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी कुछ दबाव देखने को मिल सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई बाधा के बीच भारत में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़ना एक बड़ा संकेत है। हालांकि फिलहाल घरेलू सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखकर सरकार ने आम जनता को राहत देने की कोशिश की है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं, तो आने वाले समय में ईंधन और गैस कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।
