नई दिल्ली. राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को राज्य के सभी 41 जिलों में पंचायतों के पुनर्गठन और नई ग्राम पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। इस कदम से पूरे राज्य का पंचायती राज ढांचा बदल गया है। लगभग हर पंचायत की सीमाओं में बदलाव हुआ है, जिसका सीधा असर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर पड़ने की उम्मीद है।
नई पंचायतों के गठन के साथ सरपंच, उप-सरपंच और वार्ड पंचों के पदों में बड़ी संख्या में बढ़ोतरी होगी। हर नई ग्राम पंचायत को अपना अलग सरपंच और उप-सरपंच मिलेगा, जबकि वार्ड पंचों की संख्या हजारों में बढ़ जाएगी। अब आगामी पंचायत चुनाव इसी नए ढांचे के आधार पर कराए जाएंगे।
मानदंडों में ढील से कई जिलों में बनी अधिक पंचायतें
सरकार की ओर से मानदंडों में छूट दिए जाने के कारण विशेष रूप से मरुस्थलीय जिलों में नई पंचायतों की संख्या अधिक रही। लगभग एक साल पहले शुरू हुई इस प्रक्रिया में जिलों से नए पंचायत गठन और पुनर्गठन के प्रस्ताव मंगाए गए थे, जिन्हें पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग को भेजा गया। राजनीतिक रूप से भाजपा ने भी इस मुद्दे पर अपनी समिति का गठन किया था।
लोगों को मिलेगी राहत, पंचायत मुख्यालय तक दूरी कम होगी
नए पंचायत गठन की सबसे बड़ी वजह लोगों को सुविधा देना है। पश्चिमी राजस्थान—जैसे बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी, बीकानेर, चूरू—और कई जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों का क्षेत्र बहुत विस्तृत था।
राशन, सरकारी दस्तावेज़, पंचायत संबंधी काम, या सरपंच व ग्राम सचिव से मिलने के लिए लोगों को कई किलोमीटर दूर पंचायत मुख्यालय तक जाना पड़ता था। तीन-चार गाँव एक पंचायत में होने से यह दूरी और बढ़ जाती थी। नई पंचायतों से क्षेत्र छोटे हो जाएंगे, जिससे आम जनता को समय और दूरी दोनों में राहत मिलेगी।
नए पंचायतों से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
नई ग्राम पंचायतों के गठन के साथ ही ग्राम सचिव, पटवारी, ग्राम सहायकों और अन्य सहायक कर्मचारियों के पदों में वृद्धि होगी। जितनी नई पंचायतें बनी हैं, उतने ही नए पद स्वाभाविक रूप से सृजित होंगे। इससे शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। आने वाली भर्तियों में इन बढ़े हुए पदों को शामिल कर नियुक्तियाँ की जाएंगी।
