जिला परिषद अध्यक्ष चंपा ठाकुर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश

मंडी. पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी जिला परिषद अध्यक्ष चंपा ठाकुर के खिलाफ आखिर अविश्वास प्रस्ताव आ ही गया. लंबे अर्से से इसको लेकर सुगबुगाहट जारी थी. वीरवार को मंडी के परिधि गृह में जिला मंडी के 36 जिला सदस्यों में से 22 सदस्यों ने जिला अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं.

अविश्वास प्रस्ताव को जिप सदस्यों ने जिप उपाध्यक्ष पूर्ण चंद ठाकुर को सौंप दिया हैंं. कांग्रेस समर्थित जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कई दिनों से चर्चा चल रही थी. सरकार बदलते ही जिप अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव न लाए जाने को लेकर उर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने अपनी ही सरकार पर तंज भी कसा था. जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार अनिल शर्मा के खिलाफ चुनाव लड़ा थी लेकिन उन्हें मामूली वोटों से हार मिली थी.

चुनाव हारने के बाद करीब 6 महीने तक उनकी अध्यक्ष पद की कुर्सी छीनने को लेकर कोई भी सुगबुगाहट नहीं हुई. जिससे कुछ भाजपा नेताओं और सदस्यों में अपने ही दल के खिलाफ रोष पनप रहा था. जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए चंपा ठाकुर को कांग्रेस का समर्थन हासिल था. जबकि भाजपा की ओर से कटौला वार्ड से चुनाव जीती पमिता शर्मा को मैदान में उतारा गया था. चंपा ठाकुर प्रदेश के आला कांग्रेसी नेता और सरकार में नंबर दो के मंत्री ठाकुर कौल सिंह की बेटी होने के कारण उन्हें जिला सदस्यों का खुला समर्थन मिला. उन्होंने भाजपा समर्थित उम्मीदवार को 4 मतों से हराया था.

उस समय कांग्रेस समर्थित चंपा ठाकुर का कांग्रेस सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल शर्मा ने विरोध किया था. उस समय से ही दोनों के बीच 36 का आंकड़ा हो गया था. समय रहते अनिल शर्मा ने कांग्रेस पार्टी को बाय-बाय करते हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का दामन थाम लिया और चुनाव में जीत भी दर्ज की. अविश्वास पेश होने के बाद भाजपा की ओर से पमिता शर्मा को फिर से मैदान में उतारा जा सकता है.

15 दिन में बुलाया जाएगा हाउस

इधर, जिला परिषद उपाध्यक्ष पूर्ण चंद ठाकुर ने कहा कि उनके पास 22 सदस्यों का हस्ताक्षरित प्रस्ताव आ गया है. अब वह जिला पंचायत अधिकारी से बात कर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि तय करेंगे. उन्होंने बताया कि संविधान के अनुसार यह प्रावधान है कि अगर जिप अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव हो तो वह उपाध्यक्ष को सौंपा जाता है. अगर उपाध्यक्ष के खिलाफ हो तो अध्यक्ष को सौंपा जाता है. मगर दोनों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में यह उपायुक्त को सौंपा जाता है. उन्होंने कहा कि 15 दिनों के अंदर हाउस बुलाकर इस पर मतदान करवाया जाएगा.