मानसी ने कार्डियोवस्कुलर की डीएम परीक्षा पास कर पहला स्थान हासिल किया

मानसी ने कार्डियोवस्कुलर की डीएम परीक्षा पास कर पहला स्थान हासिल किया-Panchayat Times
साभार इंंटरनेट

कांगड़ा. कांगड़ा जिले के पालमपुर की रहने वाली डॉ. मानसी वर्मा ने आल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट में  कार्डियोवस्कुलर रेडियोलॉजी में डीएम परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया. पीजीआई चंडीगढ़ में सीनियर रेसीडेंट के रूप में कार्य कर रहीं डॉ. मानसी वर्मा कार्डियोवस्कुलर रेडियोलॉजी विषय में डीएम करने वाली प्रदेश की पहली महिला विशेषज्ञ डाॅक्टर होंगी.

टांडा मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर सेवाएं दे रहें डॉ. आरके वर्मा और केएलवी कॉलेज पालमपुर की प्रधानाचार्य मां मंजु कौशल की बेटी मानसी बचपन से मेहनती हैं. उन्होंने पहले प्रयास में नीट पास किया.

आईजीएमसी शिमला से गोल्ड मेडल के साथ एमबीबीएस की. पीजीआई चंडीगढ़ से रेडियो डायगोनोसिस में एमडी करने के बाद अब यह मुकाम हासिल किया है. मानसी ने इस सफलता का श्रेय गुरू विशुद्धानंद सरस्वती, नाना स्व. हरनाम दास कौशल, मां मंजु कौशल और पिता डॉ. आरके वर्मा को दिया है.

अच्छी बात यह है कि ईजीएमसी से एमबीबीएस की पढ़ाई में भी डॉक्टर मानसी ने स्वर्ण पदक हासिल किया था. महज 27 साल की उम्र में डॉ. मानसी की सफलता हर मायने में अहम है.

छोड़ी 3 से 4 लाख  की नौकरी

प्रदेश की काबिल बेटी डॉ. मानसी वर्मा ने बताया कि जब उन्होंने एमडी की पढ़ाई पूरी की थी तो उन्हें  प्राइवेट सेक्टर में 3 से 4 लाख प्रतिमाह का ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था. इसकी वजह पूछे जाने पर डॉ. वर्मा ने कहा कि बचपन से ही डाॅक्टर बनने का सपना देखा करती थी. उन्होंने यह भी बताया कि अधिकतर लोग इस क्षेत्र में एमडी से आगे की पढ़ाई के बारे में नहीं सोचते हैं. डॉ. वर्मा ने बताया कि एम्स में इस साल डॉक्ट्रेट ऑफ मेडिसन के लिए एक ही सीट थी. महज एक अंक के अंतर से इस सीट को हासिल किया. जनवरी में ही डीएम करने के बारे में सोचा. पीजीआई में कम से कम 12 घंटे की डयूटी के साथ ही मानसी ने यह सफलता हासिल की है. करीब 6 घंटे की पढ़ाई नियमित तौर पर की.

ये है कार्डियोवस्कुलर

कार्डियोवस्कुलर (हार्ट डिजीज) का मुख्‍य कारण कोलेस्‍ट्राल के स्तर में वृद्धि है. कार्डियोवस्कुलर (हार्ट डिजीज) दिल और रक्त वाहिकाओं के विकारों के कारण होती हैं. इनमें कोरोनरी हृदय रोग, दिल के दौरे, स्ट्रोक, बढ़ा हुआ रक्तचाप, हाइपरटेंशन जन्मजात हृदय रोग तथा हार्ट अटैक भी शामिल है.