जानिए क्या है खरसावां गोलीकांड, जिसमें शहीदों के आश्रितों को मिलेगी नौकरी

जानिए क्या है खरसावां गोलीकांड, जिसमें शहीदों के आश्रितों को मिलेगी नौकरी - Panchayat Times

रांची/खरसावां. खरसावां में शहीद दिवस के अवसर पर शहीद स्मारक पर शहीदों के नमन करने के बाद आयोजित जनसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हमारे पुरखों ने शोषण के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है. लड़ाई शोषक सामंतों, महाजनों और यहां तक की अंग्रेजों के खिलाफ भी उलगुलान (आंदोलन) किया है. राज्य का कोल्हान हो, संथाल परगना हो, पलामू हो या फिर छोटा नागपुर, हर जगह शहीदों की वीर गाथा इस राज्य की गरिमा को बढ़ा रही है, उनके संघर्ष को दर्शा रही है. हमें इन शहीदों के आदर्शों से शक्ति मिलती है.

उन्होंने कहा कि जिस तरह गुवा गोलीकांड में शहीद लोगों को चिन्हित कर नौकरी दी गई, उसी तरह खरसावां गोलीकांड में शहीद के आश्रितों को वर्तमान सरकार नौकरी देगी. उन्हें पेंशन देने का कार्य किया जाएगा. अब इस राज्य में ऐसा कोई काम नहीं होगा और कोई ऐसा नियम नहीं बनेगा, जिससे राज्य के लोगों को परेशानी हो, तकलीफ हो और जनमानस में गुस्सा हो.

मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने खरसावां में शहीद स्मारक की परिक्रमा कर शहीदों को पुष्प अर्पित किया। @HemantSorenJMM @JharkhandCMO pic.twitter.com/xDcz9x2ASj

— IPRD Jharkhand (@prdjharkhand) January 1, 2020

आखिर क्या है खरसावां गोलीकांड

1 जनवरी 1948 को खरसावां का विलय होना था. इसके विरोधस्वरूप आदिवासियों के नेता जयपाल सिंह मुंडा के आह्वान पर हजारों की संख्या में आदिवासी खरसावां हाट मैदान में सभा के लिए जमा हुए थे. हालांकि ये बात अलग है कि जयपाल सिंह मुंडा नहीं आ पाये थे. आदिवासी खरसावां को बिहार में शामिल करने की मांग कर रहे थे. जबकि ओड़िशा सरकार इसके खिलाफ थी. ओड़िशा सरकार किसी भी सूरत में सभा नहीं होने देना चाहती थी. जबकी वहां पर हजारों की संख्या में आदिवासी सभा के लिए जमा हुए थे. नतीजा ये हुआ कि भीड़ पर पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां बरसायी. गोलियां बरसती रही और लाशें बिछती रही. जब गोलीबारी रूकी तो पूरे हाट मैदान में आंदोलनकारियों के शव बिखरे थे.

इससे मानने वालें आजाद भारत का यह सबसे बड़ा गोलीकांड मानते है. यह अभी तक रहस्य ही बना हुआ है कि इस गोलीकांड में आखिर कितने लोग मारे गये थे. तत्कालीन ओड़िशा सरकार ने केवल 35 के मारे जाने की पुष्टि की थी. जबकि आदिवासी नेताओं का कहना था कि एक हजार से ज्यादा आदिवासी मारे गये. फायरिंग स्थल पर अब खरसावां गोलीकांड की याद में शहीद स्थल बनाया गया है.

वही निर्णय लिया जाएगा जो झारखण्डी के हित में होगा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वर्तमान सरकार की पहली कैबिनेट की बैठक में जो निर्णय लिया गया, उसमें एक संदेश है. उस संदेश में कई चीजें हैं. अब इस राज्य में सिर्फ वही काम होगा जो राज्य हित में होगा. यहां सिर्फ आदिवासियों और झारखंडियों के हित में निर्णय लिए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि राज्य में अब सिर्फ वही काम होगा जो जनमानस के लिए लाभदायक होगा. झारखंड में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं मरेगा. सबको अनाज सरकार देगी. पिछले 5 वर्ष में जो कलंक लगा है उसको भी धोना है. शपथ ग्रहण के बाद से मुझसे लोगों का मिलना अनवरत जारी है. उनकी आकांक्षाएं और उम्मीदें बहुत हैं. मेरा प्रयास होगा कि राज्यहित में और यहां के लोगों के हित में ही काम होगा. मेरा हर कदम झारखण्ड का मान-सम्मान बढ़ाने, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर रास्ता निकालने वाला, हमारी मां, बहन और बेटियों की सुरक्षा के लिए और अच्छी शिक्षा व्यवस्था के लिए होगा. झारखण्ड को सोने की चिड़िया बनाने के लक्ष्य को हम सभी झारखंडवासी मिलकर प्राप्त करेंगे.

सोरेन ने कहा कि राज्य में सरकार बनने के बाद उनका यह पहला कदम है. सरकार गठन के बाद मैं आज रांची से बाहर आया हूं. हर साल की तरह इस साल भी हम लोग खरसावां के शहीद स्थल पर एकत्रित हुए हैं. निश्चित रूप से झारखण्ड शहीदों का राज्य है. मैं पुनः उन सभी शहीदों को नमन करता हूं और उन शहीदों को याद करके ही हम हर काम प्रारंभ करेंगे. राज्य के पिछड़ा होने के बावजूद शोषण करने वाले वर्गों के खिलाफ हमारे लोगों ने लंबी लड़ाई लड़ी.

उन्होंने कहा कि पूरे राज्य के लोगों ने, आंदोलकारियों ने एक मजबूत प्रयास किया और आज इस राज्य में झारखंडवासियों की सरकार का निर्माण हुआ है. आपने जिस सोच के साथ आशा और उम्मीद के साथ हमें झारखण्ड को आगे ले जाने की जिम्मेवारी सौंपी है, उसका निर्वहन ईमानदारी से करुंगा. यह जिम्मेदारी, यह चुनौती बहुत बड़ी है. हम मिलकर इसके बीच से रास्ता भी निकलेंगे. राज्य के शहीदों ने हमें चुनौतियों को सीने से लगाने का बुलंद हौसला दिया है.